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Auraiya News: मिट्टी के चूल्हों से सजने लगा बाजार, बढ़ी मांग
Sat, 21 Mar 2026 11:49 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 21 Mar 2026 11:49 PM IST
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फोटो-7-गाड़ी में रखे मिट्टी के चूल्हे व अन्य बर्तन। संवाद
औरैया। घरेलू गैस सिलिंडर की किल्लत के बीच अब लोग फिर से पुराने पारंपरिक साधनों की ओर लौटने लगे हैं। बाजार में इन दिनों मिट्टी से बने चूल्हों, तवा और अन्य सामान की खूब बिक्री हो रही है। राजस्थान से आए कारीगर गाड़ियों में भरकर यह सामान बेच रहे हैं।
शहर के प्रमुख बाजारों के अलावा कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी इन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ी है। गैस की किल्लत से जूझ रहे परिवारों के लिए यह सस्ता और आसान विकल्प बनकर सामने आया है। राजस्थान से आए विक्रेता केदार ने बताया कि वह पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए चूल्हे और तवे लेकर अलग-अलग जिलों में घूम-घूमकर बिक्री करते हैं। इस बार उन्हें उम्मीद से ज्यादा अच्छा कारोबार मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि मिट्टी का छोटा चूल्हा 100 से 200 रुपये में है। बड़ा चूल्हा 250 से 350 रुपये तक बिक रहा है। इसके अलावा मिट्टी के तवे 80 से 150 रुपये और लोहे के तवे 200 से 350 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं।
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विक्रेताओं के अनुसार सामान्य दिनों में जहां 20 से 30 चूल्हे ही बिकते थे वहीं, अब रोजाना 50 से 70 चूल्हों की बिक्री हो रही है। कुछ भीड़भाड़ वाले दिनों में यह संख्या 80 से 100 तक पहुंच जाती है। लोगों का कहना है कि गैस सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति ने उन्हें मजबूर कर दिया है कि वैकल्पिक साधन अपनाएं।
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जरूरत पर आएगा काम
कई दिन तक सिलिंडर नहीं आ रहा। ऐसे में यह चूल्हा जरूरत पड़ने पर काम आएगा। रास्ते में बिकता देखा तो खरीद लिया।- गणेश कुमार
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सिलिंडर खत्म हो रहा
सिलिंडर खत्म होने वाला है, नया आने में समय लग रहा है। चूल्हा और तवे से काम चल सकता है, यही सोचकर लिया है।
- गौतम सिंह
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शहर के प्रमुख बाजारों के अलावा कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी इन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ी है। गैस की किल्लत से जूझ रहे परिवारों के लिए यह सस्ता और आसान विकल्प बनकर सामने आया है। राजस्थान से आए विक्रेता केदार ने बताया कि वह पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए चूल्हे और तवे लेकर अलग-अलग जिलों में घूम-घूमकर बिक्री करते हैं। इस बार उन्हें उम्मीद से ज्यादा अच्छा कारोबार मिल रहा है।
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उन्होंने बताया कि मिट्टी का छोटा चूल्हा 100 से 200 रुपये में है। बड़ा चूल्हा 250 से 350 रुपये तक बिक रहा है। इसके अलावा मिट्टी के तवे 80 से 150 रुपये और लोहे के तवे 200 से 350 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं।
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विक्रेताओं के अनुसार सामान्य दिनों में जहां 20 से 30 चूल्हे ही बिकते थे वहीं, अब रोजाना 50 से 70 चूल्हों की बिक्री हो रही है। कुछ भीड़भाड़ वाले दिनों में यह संख्या 80 से 100 तक पहुंच जाती है। लोगों का कहना है कि गैस सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति ने उन्हें मजबूर कर दिया है कि वैकल्पिक साधन अपनाएं।
जरूरत पर आएगा काम
कई दिन तक सिलिंडर नहीं आ रहा। ऐसे में यह चूल्हा जरूरत पड़ने पर काम आएगा। रास्ते में बिकता देखा तो खरीद लिया।- गणेश कुमार
सिलिंडर खत्म हो रहा
सिलिंडर खत्म होने वाला है, नया आने में समय लग रहा है। चूल्हा और तवे से काम चल सकता है, यही सोचकर लिया है।
- गौतम सिंह