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प्रदूषित धुंध ने किया बेहाल, मास्क लगाकर निकले लोग
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औरैया। जहरीले हो रहे वातावरण का असर रविवार को औरैया में भी देखने को मिला। सुबह जबरदस्त धुंध छाई रही। प्रदूषित धुंध के कारण सुबह टहलने निकले लोगों को आंखों में जलन महसूस हुई। सांस लेने में भी दिक्कत हुई। प्रदूषण से बचने के लिए लोगों ने मास्क का सहारा लिया। धुंध का असर सबसे अधिक नौनिहालों पर दिखा। चिकित्सकों का कहना है कि धुंध में अधिक समय तक रहने से नौनिहालों के फेफड़े, दिमाग पर सीधा असर पड़ सकता है। यह धुंध बच्चों की याददाश्त पर भी असर डाल सकती है।
शनिवार देर शाम लगभग नौ बजे से जिले में धुंध का असर देखने को मिला। जो धीरे-धीरे बढ़ती गई। रात लगभग एक बजे यह स्थिति रही कि सड़कों पर छाई धुंध के कारण सड़क पर मौजूद लोगों की आंखों में जलन का अहसास हुआ। रविवार को सुबह यही स्थिति देखने को मिली। सड़कों पर टहलने निकले लोगों ने आंखों में जलन का अहसास हुआ। कई लोग तो अस्पताल में आंखों में जलन का इलाज कराने भी पहुंचे।
रविवार सुबह सड़कों पर दिखे लोग मास्क पहनकर आते-जाते दिखे। यही नहीं बाइकों पर सवार लोग धुंध से बचने के लिए मास्क का सहारा लेते दिखाई दिए। पूरे दिन धुंध के कारण चौराहे पर तैनात सिपाही भी मास्क पहनकर अपनी ड्यूटी करते नजर आए। चिकित्सकों का कहना है कि धुंध के महीन कण बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। खेल के दौरान सांस लेने में यही कण श्वास नली से फेफड़ों में पहुंचते हैं। यही कण अधिक समय तक फेफड़ों में रहने से बच्चों के डीएनए को भी प्रभावित कर सकते हैं।
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बच्चों का डीएनए हो सकता प्रभावित
चिकित्सक डॉ. विशाल अग्निहोत्री ने बताया कि मौसम में बदलाव और हवाओं की गति कम होने के कारण प्रदूषण का धुंध दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि हवा में धूल भरे कण बढ़ जाते हैं। प्रदूषण को कम करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आम नागरिकों को भी जागरूक होने की जरूरत है। प्रदूषण से बचने के लिए कूड़ा न जलाना बहुत जरूरी है। धंध में वीओसी होते हैं। यही बच्चों की याददाश्त को कमजोर करने, पेट में दर्द, उनके स्वभाव में बदलाव व शरीर पर असर डालते है। डीएनए भी प्रभावित हो सकता है।
बढ़ सकता है कैंसर का खतरा
डा. देवेंद्र सिंह ने बताया कि बच्चों में सांस की नालियां बेहद नाजुक होती है। धुंध के कारण धूल के कण सांस के दौरान बच्चों के फेफड़ों तक पहुंचते हैं। फेफड़ों में यही कण के चिपके रहने से अंदर सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते है। जिससे सांस नली गलने लगती है। यह कण खून में ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित करते हैं। इससे कैंसर का खतरा बढ़ता है। बच्चों के लिए धुंध बड़ा खतरा है। इसका मुख्य कारण बच्चों की नाक में बालों का कम होना और कमजोर होना है। इससे बेहद सावधान रहने की जरूरत है। जिससे बच्चे स्वस्थ रहे।
बुजुर्गों में हुई सांस की समस्या
जमाली सिंह ने बताया कि आज सुबह जब वह टहलने निकलने तो धुंध जबरदस्त देखने को मिला। धुंध के कारण कुछ दूरी पर नहीं दिख रहा था। टहलते-टहलते जब खुली जगह पर पहुंचे तो वहां कई बुजुर्गों को हांफते हुए भी देखा। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। यह केवल प्रदूषण की वजह से हुआ या धुंध के कारण। इस बारे में डाक्टर ही बता सकते हैं। फिलहाल लोग मास्क लगाकर निकले तो उन्हें सांस लेने में कुछ राहत मिली, लेकिन आंख में जलन कम नहीं हुई। धुंध सेहत बिगाड़ सकता है।
आंखों में जलन का अहसास हुआ
संजय दीक्षित ने बताया कि आज सुबह जब बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए घर से निकले, तो छाई धुंध के चलते आंखों में जलन का अहसास हुआ। घर से कुछ दूर निकलने पर बच्चों ने भी आंखों में जलन होने की बात कही। जलन भी ठीक हो रही थी। ठंड के साधारण धुंध में इतनी जलन नहीं होती है। वातावरण में कुछ प्रदूषित होने के कारण धुंध से इतनी जलन महसूस हो रही है। इस बार धुंध के कारण सांस लेने में दिक्कत, हांफने की समस्या आदि चीजें भी दिख रही हैं। जिससे लोगों का ज्यादा परेशानी हो रही है।
अन्य जिलों की अपेक्षा जिले में धुंध का असर कम है। धुंध का असर अभी और बढ़ने के आसार हैं। इसका स्वास्थ्य पर असर देखने को मिलेगा। नए पौधों पर भी असर देखने को मिलेगा। धुंध के कारण पौधों में क्लोरोफीला का निर्माण नहीं होगा। आगे भी अच्छी स्थिति नहीं हैं। - डा. एसएन सिंह, मौसम विशेषज्ञ
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शनिवार देर शाम लगभग नौ बजे से जिले में धुंध का असर देखने को मिला। जो धीरे-धीरे बढ़ती गई। रात लगभग एक बजे यह स्थिति रही कि सड़कों पर छाई धुंध के कारण सड़क पर मौजूद लोगों की आंखों में जलन का अहसास हुआ। रविवार को सुबह यही स्थिति देखने को मिली। सड़कों पर टहलने निकले लोगों ने आंखों में जलन का अहसास हुआ। कई लोग तो अस्पताल में आंखों में जलन का इलाज कराने भी पहुंचे।
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रविवार सुबह सड़कों पर दिखे लोग मास्क पहनकर आते-जाते दिखे। यही नहीं बाइकों पर सवार लोग धुंध से बचने के लिए मास्क का सहारा लेते दिखाई दिए। पूरे दिन धुंध के कारण चौराहे पर तैनात सिपाही भी मास्क पहनकर अपनी ड्यूटी करते नजर आए। चिकित्सकों का कहना है कि धुंध के महीन कण बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। खेल के दौरान सांस लेने में यही कण श्वास नली से फेफड़ों में पहुंचते हैं। यही कण अधिक समय तक फेफड़ों में रहने से बच्चों के डीएनए को भी प्रभावित कर सकते हैं।
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बच्चों का डीएनए हो सकता प्रभावित
चिकित्सक डॉ. विशाल अग्निहोत्री ने बताया कि मौसम में बदलाव और हवाओं की गति कम होने के कारण प्रदूषण का धुंध दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि हवा में धूल भरे कण बढ़ जाते हैं। प्रदूषण को कम करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आम नागरिकों को भी जागरूक होने की जरूरत है। प्रदूषण से बचने के लिए कूड़ा न जलाना बहुत जरूरी है। धंध में वीओसी होते हैं। यही बच्चों की याददाश्त को कमजोर करने, पेट में दर्द, उनके स्वभाव में बदलाव व शरीर पर असर डालते है। डीएनए भी प्रभावित हो सकता है।
बढ़ सकता है कैंसर का खतरा
डा. देवेंद्र सिंह ने बताया कि बच्चों में सांस की नालियां बेहद नाजुक होती है। धुंध के कारण धूल के कण सांस के दौरान बच्चों के फेफड़ों तक पहुंचते हैं। फेफड़ों में यही कण के चिपके रहने से अंदर सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते है। जिससे सांस नली गलने लगती है। यह कण खून में ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित करते हैं। इससे कैंसर का खतरा बढ़ता है। बच्चों के लिए धुंध बड़ा खतरा है। इसका मुख्य कारण बच्चों की नाक में बालों का कम होना और कमजोर होना है। इससे बेहद सावधान रहने की जरूरत है। जिससे बच्चे स्वस्थ रहे।
बुजुर्गों में हुई सांस की समस्या
जमाली सिंह ने बताया कि आज सुबह जब वह टहलने निकलने तो धुंध जबरदस्त देखने को मिला। धुंध के कारण कुछ दूरी पर नहीं दिख रहा था। टहलते-टहलते जब खुली जगह पर पहुंचे तो वहां कई बुजुर्गों को हांफते हुए भी देखा। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। यह केवल प्रदूषण की वजह से हुआ या धुंध के कारण। इस बारे में डाक्टर ही बता सकते हैं। फिलहाल लोग मास्क लगाकर निकले तो उन्हें सांस लेने में कुछ राहत मिली, लेकिन आंख में जलन कम नहीं हुई। धुंध सेहत बिगाड़ सकता है।
आंखों में जलन का अहसास हुआ
संजय दीक्षित ने बताया कि आज सुबह जब बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए घर से निकले, तो छाई धुंध के चलते आंखों में जलन का अहसास हुआ। घर से कुछ दूर निकलने पर बच्चों ने भी आंखों में जलन होने की बात कही। जलन भी ठीक हो रही थी। ठंड के साधारण धुंध में इतनी जलन नहीं होती है। वातावरण में कुछ प्रदूषित होने के कारण धुंध से इतनी जलन महसूस हो रही है। इस बार धुंध के कारण सांस लेने में दिक्कत, हांफने की समस्या आदि चीजें भी दिख रही हैं। जिससे लोगों का ज्यादा परेशानी हो रही है।
अन्य जिलों की अपेक्षा जिले में धुंध का असर कम है। धुंध का असर अभी और बढ़ने के आसार हैं। इसका स्वास्थ्य पर असर देखने को मिलेगा। नए पौधों पर भी असर देखने को मिलेगा। धुंध के कारण पौधों में क्लोरोफीला का निर्माण नहीं होगा। आगे भी अच्छी स्थिति नहीं हैं। - डा. एसएन सिंह, मौसम विशेषज्ञ