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सैकड़ों एकड़ भूमि में जलभराव, परती रहेंगे खेत
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कंचौसी (औरैया)। कंचौसी स्टेशन के पश्चिम डीएफसी के दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक पर बनी पुलिया चोक होने से सैकड़ों एकड़ भूमि पानी से जलमग्न हैं। खेतों में पानी भरा होने के कारण किसान गेहूं, लाही, आलू की फसल नहीं बो पा रहे हैं। किसानों ने कई बार डीएफसी और नहर विभाग के अधिकारियों से दुखड़ा रोया, लेकिन आज तक समस्या का निदान नहीं हो सका है। फसलों की बुआई न कर पाने से किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है।
इनदिनों किसान खेतों में आलू की बुआई कर रहे हैं। इसके साथ ही लाही और गेहूं की बुआई के लिए खेत तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन कंचौसी क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए इन फसलों को बो पाना इस बार संभव नहीं लग रहा है। रेलवे ड्रेनेज की पुलिया बरसात के पहले से चोक है। यहीं कारण रहा कि पिछले माह हुई तेज बारिश से आसपास के गांवों का पानी आकर खेतों में भर गया है। पुलिया से जलनिकासी न हो पाने के कारण पानी आज भी खेतों में लबालब भरा है। चाहते हुए भी किसान अपने खेतों में फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे हैं।
इस समय आलू और गेहूं की बुआई का सीजन शुरू है। गेहूं फसल के लिए किसान खेत तैयार कर रहे हैं, जबकि आलू की बुआई तेजी से हो रही है। कंचौसी क्षेत्र के नौगवां, ढिकियापुर, कंचौस गांव के किसानों के रेलवे किनारे पड़ने वाली लगभग 200 एकड़ जमीन में पानी भरा हुआ है। इसको लेकर किसान परेशान नजर आ रहे हैं।
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धान की फसल हो चुकी बर्बाद
जल निकासी का प्रबंध न होने के कारण किसानों की सैकड़ों बीघा धान की फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी है। इसको लेकर किसान पहले ही मुआवजे की मांग के साथ संबंधित विभागों के प्रति विरोध जता चुके हैं। किसान रामचंद्र, नीरज कुमार, उमेश चंद्र, रामस्वरूप, सियाराम, वीरेंद्र, बलवीर, राधेश्याम, वली बाथम आदि पहले से नुकसान की भरपाई कराए जाने की मांग करते चले आ रहे हैं।
बोले किसान
खेतों में पानी भरा है, लगातार डीएफसी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से समस्या बताई जा रही है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा दे है। यहीं हालात रहे तो सैकड़ों बीघे जमीन परती रहेगी। - पंकज भदौरिया, किसान
धान के खेत में पानी भर जाने के कारण फसल डूबकर बर्बाद हो गई। एक आस थी कि जल्द ही खेतों से पानी निकल जाएगा और गेहूं की बुआई कर सकेंगे, लेकिन पानी न निकलने से खेत तैयार नहीं हैं। - सूरज नाथ, किसान
अफसरों की लापरवाही का खामियाजा अन्नदाता भुगत रहा है, किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यहीं कारण है कि महीनों से खेतों में पानी भरा है। जल निकासी का प्रबंध सही न होने से समस्या है। - जहीर खांन, किसान
आलू की फसल का समय गुजर रहा है, गेहूं की फसल भी नहीं बो सकेंगे। सिंचाई विभाग साइफन से पानी निकालने की बात तो कह रहा है, लेकिन अभी तक इस पर कोई अमल नहीं किया गया है। -देव लाल राठौर, किसान
बोले जिम्मेदार
जिला प्रशासन को इस समस्या के बारे में पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। आगे जो भी निर्माण कार्य रह गया है, उसे प्रशासन ही कराएगा।- डीएस चमपिया, सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर, डीएफसी।
जल निकासी के लिए जब तक साइफन नहीं बन जाता समस्या पूरी तरह से हल नहीं हो सकती। विभाग में इसकी कवायद चल रही है। -मनीष कुमार, अवर अभियंता, सिंचाई खंड दिबियापुर।
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इनदिनों किसान खेतों में आलू की बुआई कर रहे हैं। इसके साथ ही लाही और गेहूं की बुआई के लिए खेत तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन कंचौसी क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए इन फसलों को बो पाना इस बार संभव नहीं लग रहा है। रेलवे ड्रेनेज की पुलिया बरसात के पहले से चोक है। यहीं कारण रहा कि पिछले माह हुई तेज बारिश से आसपास के गांवों का पानी आकर खेतों में भर गया है। पुलिया से जलनिकासी न हो पाने के कारण पानी आज भी खेतों में लबालब भरा है। चाहते हुए भी किसान अपने खेतों में फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे हैं।
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इस समय आलू और गेहूं की बुआई का सीजन शुरू है। गेहूं फसल के लिए किसान खेत तैयार कर रहे हैं, जबकि आलू की बुआई तेजी से हो रही है। कंचौसी क्षेत्र के नौगवां, ढिकियापुर, कंचौस गांव के किसानों के रेलवे किनारे पड़ने वाली लगभग 200 एकड़ जमीन में पानी भरा हुआ है। इसको लेकर किसान परेशान नजर आ रहे हैं।
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धान की फसल हो चुकी बर्बाद
जल निकासी का प्रबंध न होने के कारण किसानों की सैकड़ों बीघा धान की फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी है। इसको लेकर किसान पहले ही मुआवजे की मांग के साथ संबंधित विभागों के प्रति विरोध जता चुके हैं। किसान रामचंद्र, नीरज कुमार, उमेश चंद्र, रामस्वरूप, सियाराम, वीरेंद्र, बलवीर, राधेश्याम, वली बाथम आदि पहले से नुकसान की भरपाई कराए जाने की मांग करते चले आ रहे हैं।
बोले किसान
खेतों में पानी भरा है, लगातार डीएफसी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से समस्या बताई जा रही है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा दे है। यहीं हालात रहे तो सैकड़ों बीघे जमीन परती रहेगी। - पंकज भदौरिया, किसान
धान के खेत में पानी भर जाने के कारण फसल डूबकर बर्बाद हो गई। एक आस थी कि जल्द ही खेतों से पानी निकल जाएगा और गेहूं की बुआई कर सकेंगे, लेकिन पानी न निकलने से खेत तैयार नहीं हैं। - सूरज नाथ, किसान
अफसरों की लापरवाही का खामियाजा अन्नदाता भुगत रहा है, किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यहीं कारण है कि महीनों से खेतों में पानी भरा है। जल निकासी का प्रबंध सही न होने से समस्या है। - जहीर खांन, किसान
आलू की फसल का समय गुजर रहा है, गेहूं की फसल भी नहीं बो सकेंगे। सिंचाई विभाग साइफन से पानी निकालने की बात तो कह रहा है, लेकिन अभी तक इस पर कोई अमल नहीं किया गया है। -देव लाल राठौर, किसान
बोले जिम्मेदार
जिला प्रशासन को इस समस्या के बारे में पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। आगे जो भी निर्माण कार्य रह गया है, उसे प्रशासन ही कराएगा।- डीएस चमपिया, सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर, डीएफसी।
जल निकासी के लिए जब तक साइफन नहीं बन जाता समस्या पूरी तरह से हल नहीं हो सकती। विभाग में इसकी कवायद चल रही है। -मनीष कुमार, अवर अभियंता, सिंचाई खंड दिबियापुर।