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धनिया की अगेती खेती से दोगुनी होगी किसानों की आय
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औरैया। धनिया खाने को स्वादिष्ट बनाती हैं। ज्यादातर लोग अपने भोजन में धनिया की पत्ती का इस्तेमाल करते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र परवारा के प्रभारी ने बताया कि धनिया की खेती कर किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं। अक्तूबर से नवंबर माह धनिया की खेती के लिए उपयुक्त समय है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार ने बताया धनिया की खेती शुष्क और ठंडे मौसम में अच्छी रहती है। धनिया को पाला रहित मौसम की आवश्यकता होती है। खेती सभी तरह की मिट्टी में हो सकती है। यदि खेती में जैविक खाद का प्रयोग किया है तो अच्छे जलनिकास वाली दोमट मिट्टी बेहतर मानी जाती है। जुताई के समय करीब 15 से 20 क्विंटल गोबर या कंपोस्ट की सड़ी खाद खेत में डाले। धनिया की कई किस्में आती हैं। किसान उन्नत किस्म का चयन कर सकते हैं। जो भूमि के लिए उपयुक्त हो। धनिया बोने के लिए सबसे अच्छा समय अक्तूबर से नवंबर रहता है।
इसके अलावा हरे पत्तों की फसल के लिए अक्तूबर से दिसंबर तक जुताई करनी चाहिए। धनिया की अच्छी पैदावार मौसम व फसल की देखभाल पर निर्भर है। अगर धनिया की खेती वैज्ञानिक तकनीक से की गई हो तो सिंचित फसल के लिए लगभग 15 से 20 क्विंटल व असिंचित सात से नौ क्विंटल उपज प्रति हेक्टेयर प्राप्त कर सकते हैं। धनिया की खेती में सबसे पहली सिंचाई लगभग 30 से 35 दिन बाद करनी चाहिए। जब फसल में पत्तियां बनने लगें तब दूसरी सिंचाई 50 से 60 दिन बाद करनी चाहिए। जब शाखा निकलने लगे तो तीसरी सिंचाई 70 से 80 दिन बाद फूल आने पर करें। चौथी सिंचाई लगभग 90 से 100 दिन यानी बीज बनने पर कर दें। पांचवीं सिंचाई जब दाना बनने लगे तब। 105 से 110 दिन बाद करें।
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फसल की कटाई
जब धनिया की पत्तियां पीली और धनिया भूरा और पीली होने लगे और दानों में 18 फीसदी की नमी हो तब फसल की कटाई कर देनी चाहिए। फसल की कटाई नहीं हुई तो दानों का रंग खराब होने लगता है। धनिया की छोटे बंडल बना लें और एक से दो दिन तक खुली धूप में सुखाएं।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार ने बताया धनिया की खेती शुष्क और ठंडे मौसम में अच्छी रहती है। धनिया को पाला रहित मौसम की आवश्यकता होती है। खेती सभी तरह की मिट्टी में हो सकती है। यदि खेती में जैविक खाद का प्रयोग किया है तो अच्छे जलनिकास वाली दोमट मिट्टी बेहतर मानी जाती है। जुताई के समय करीब 15 से 20 क्विंटल गोबर या कंपोस्ट की सड़ी खाद खेत में डाले। धनिया की कई किस्में आती हैं। किसान उन्नत किस्म का चयन कर सकते हैं। जो भूमि के लिए उपयुक्त हो। धनिया बोने के लिए सबसे अच्छा समय अक्तूबर से नवंबर रहता है।
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इसके अलावा हरे पत्तों की फसल के लिए अक्तूबर से दिसंबर तक जुताई करनी चाहिए। धनिया की अच्छी पैदावार मौसम व फसल की देखभाल पर निर्भर है। अगर धनिया की खेती वैज्ञानिक तकनीक से की गई हो तो सिंचित फसल के लिए लगभग 15 से 20 क्विंटल व असिंचित सात से नौ क्विंटल उपज प्रति हेक्टेयर प्राप्त कर सकते हैं। धनिया की खेती में सबसे पहली सिंचाई लगभग 30 से 35 दिन बाद करनी चाहिए। जब फसल में पत्तियां बनने लगें तब दूसरी सिंचाई 50 से 60 दिन बाद करनी चाहिए। जब शाखा निकलने लगे तो तीसरी सिंचाई 70 से 80 दिन बाद फूल आने पर करें। चौथी सिंचाई लगभग 90 से 100 दिन यानी बीज बनने पर कर दें। पांचवीं सिंचाई जब दाना बनने लगे तब। 105 से 110 दिन बाद करें।
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फसल की कटाई
जब धनिया की पत्तियां पीली और धनिया भूरा और पीली होने लगे और दानों में 18 फीसदी की नमी हो तब फसल की कटाई कर देनी चाहिए। फसल की कटाई नहीं हुई तो दानों का रंग खराब होने लगता है। धनिया की छोटे बंडल बना लें और एक से दो दिन तक खुली धूप में सुखाएं।