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प्रवासी पक्षियों के कलरव से गूंज रहा पंचनद
ब्यूरो अमर उजाला, औरैया
Updated Fri, 04 Dec 2015 12:19 AM IST
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बीहड़ी क्षेत्र में पांच नदियों का संगम पंचनद इन दिनों विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के कलरव से गूंज रहा है। पंचनद में प्रवासी पक्षियों की जल क्रीड़ा से क्षेत्र का वातावरण सुहावना होने से सैलानियों के लिए आकर्षक का केंद्र हो गया है।
जिले का पवित्र पंचनद अपने आप में ऐतिहासिक व प्राकृतिक मनोरम दृश्य को संजोए हुए है। बीहड़ी क्षेत्र के यमुना, चंबल, सिंधु, पहुज और क्वारी नदियों के संगम स्थल पंचनद पर मौसम का मिजाज बदलते ही प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है।
साइबेरिया, कजाकिस्तान, तुर्किस्तातन, नवाया, जेम्लाया, कोलादीप समेत यूरोप के अन्य भागों से आए पक्षियों ने पंचनद को गुलजार कर दिया है।
यमुना और उसकी सहायक नदियों के बीच धारा में बने बालू के टापू पर प्रवासी पक्षियों में सोवलर, रेडकिड कोर्डर, स्पोविल्डर्स, गार्गोेनी, मर्गेनियर, एनोसिट, कामनक्रीम, डेमे सिलक्रीन, वेल्डग्रीन टेंट फ्लोवर, स्नाइफ, बेरहसी, हवाशील, फ्लोवर, लिटिल वारहेडिड, स्पूलविल मनोरम छटा बिखेर रही हैं।
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जब ठंडे देशों में झील पोखर नदियां जमने लगतीं हैं तब प्रवासी पक्षी अपने ठिकानों व भोजन के लिये खतरा महसूस करने लगते हैं। इस कारण प्रवासी पक्षी नवंबर से मार्च तक पंचनद में डेरा जमाए रहते हैं। - डा. राजीव चौहान (सोसाइटी फार कंजरवेशन आफ नेचर)
भारत का प्रकृति से गहरा नाता है। प्राचीन ग्रंथों में प्रकृति को शांति और आनंद का योग केंद्र है। पंचनद पर्यावरण की दृष्टि से विश्व में अद्भुत है। - भगवत स्वरूप विश्नोई (पर्यावरणविद्)
पंचनद को पर्यटन स्थल व प्रवासी पक्षियों के ठहराव व ठिकानों के संबंध में बताया कि प्रदेश सरकार पंचनद को पर्यटन स्थल व पक्षी विहार बनाने के लिए प्रयासरत है। -डा. उमेश दीक्षित (चेयरमैन, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान)
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जिले का पवित्र पंचनद अपने आप में ऐतिहासिक व प्राकृतिक मनोरम दृश्य को संजोए हुए है। बीहड़ी क्षेत्र के यमुना, चंबल, सिंधु, पहुज और क्वारी नदियों के संगम स्थल पंचनद पर मौसम का मिजाज बदलते ही प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है।
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साइबेरिया, कजाकिस्तान, तुर्किस्तातन, नवाया, जेम्लाया, कोलादीप समेत यूरोप के अन्य भागों से आए पक्षियों ने पंचनद को गुलजार कर दिया है।
यमुना और उसकी सहायक नदियों के बीच धारा में बने बालू के टापू पर प्रवासी पक्षियों में सोवलर, रेडकिड कोर्डर, स्पोविल्डर्स, गार्गोेनी, मर्गेनियर, एनोसिट, कामनक्रीम, डेमे सिलक्रीन, वेल्डग्रीन टेंट फ्लोवर, स्नाइफ, बेरहसी, हवाशील, फ्लोवर, लिटिल वारहेडिड, स्पूलविल मनोरम छटा बिखेर रही हैं।
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जब ठंडे देशों में झील पोखर नदियां जमने लगतीं हैं तब प्रवासी पक्षी अपने ठिकानों व भोजन के लिये खतरा महसूस करने लगते हैं। इस कारण प्रवासी पक्षी नवंबर से मार्च तक पंचनद में डेरा जमाए रहते हैं। - डा. राजीव चौहान (सोसाइटी फार कंजरवेशन आफ नेचर)
भारत का प्रकृति से गहरा नाता है। प्राचीन ग्रंथों में प्रकृति को शांति और आनंद का योग केंद्र है। पंचनद पर्यावरण की दृष्टि से विश्व में अद्भुत है। - भगवत स्वरूप विश्नोई (पर्यावरणविद्)
पंचनद को पर्यटन स्थल व प्रवासी पक्षियों के ठहराव व ठिकानों के संबंध में बताया कि प्रदेश सरकार पंचनद को पर्यटन स्थल व पक्षी विहार बनाने के लिए प्रयासरत है। -डा. उमेश दीक्षित (चेयरमैन, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान)