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चंबल के बीहड़ों से विलुप्त हो रहे वन्य जीव
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Sun, 22 May 2016 11:28 PM IST
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wildlife photographer
- फोटो : daily mail
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चंबल के बीहड़ों में पाए जाने वाले वन्य जीव विलुप्त हो रहे हैं। बारहसिंघा, तेंदुआ और काले हिरन समेत कई वन्य जीव अब इस इलाके में दिखाई नहीं पड़ते। वन विभाग के पास इसका अधिकृत आंकड़े तो नहीं हैं, लेकिन अधिकारी इन जानवरों की विलुप्तता की बात स्वीकार करते हैं।
पंचनद स्थित चंबल के बीहड़ में कई दुर्लभ वन्य जीव पाए जाते थे। इनको बचाने के लिए केंद्र सरकार ने 1979 में चंबल सेंचुरी की स्थापना की योजना बनाई। लेकिन डकैतों की रिहाइश के कारण चंबल सेंचुरी और वन विभाग इस इलाके में कुछ नहीं कर पाया। विभाग की 1980 में की गई गणना में चंबल के बीहड़ों में बारहसिंघों, तेंदुओं और काले हिरनों की मौजूदगी पता चली। पिछले तीन दशकों में इनके लगातार शिकार का नतीजा है कि ये खत्म हो गए।
डकैतों के सफाए के बाद बीहड़ों में लकड़ी के अवैध कटान ने जोर पकड़ा। इससे भी वन्य जीवों ने इलाका छोड़ा। चंबल सेंचुरी और सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की संयुक्त रिपोर्ट में माना गया कि नौ प्रजातियों के बाद अब लकड़बग्घा, लोमड़ी, काला नेवला समेत अन्य जीवों पर खतरा है। चंबल सेंचुरी के डीएफओ अनिल कुमार पटेल कहते हैं कि वह जगह-जगह निगरानी करा रहे हैं।
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ये जीव हो चुके हैं विलुप्त
सफेद गिद्ध, तेंदुआ, बारहसिंघा, चीतल, काला हिरन, लोमड़ी, काली बिल्ली, सांभर, पेंगोलिन।
इन पर है संकट
लकड़बग्घा, सेही (पोरक्यूपाइन), लोमड़ी, लाल हिरन और काला नेवला अब यहां कम हो रहे हैं।
‘बीहड़ में शिकार के कारण यह जीव विलुप्त हो रहे हैं। वहीं जंगलों के कटान से कई जीव बाहर आ रहे हैं। इन्हें गांव वाले सुरक्षा के लिहाज से मार देते हैं।’
- डॉ. राजीव चौहान (सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर)
‘चंबल के वन्य जीवों पर संकट है। सरकार के पास इसकी रिपोर्ट है। जंगलों के कटान और जंगली जानवरों के शिकार पर सरकार कठोर कानून लागू करने जा रही है।’
- रवीन्द्र सिंह भदौरिया (विशेषज्ञ, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण)
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पंचनद स्थित चंबल के बीहड़ में कई दुर्लभ वन्य जीव पाए जाते थे। इनको बचाने के लिए केंद्र सरकार ने 1979 में चंबल सेंचुरी की स्थापना की योजना बनाई। लेकिन डकैतों की रिहाइश के कारण चंबल सेंचुरी और वन विभाग इस इलाके में कुछ नहीं कर पाया। विभाग की 1980 में की गई गणना में चंबल के बीहड़ों में बारहसिंघों, तेंदुओं और काले हिरनों की मौजूदगी पता चली। पिछले तीन दशकों में इनके लगातार शिकार का नतीजा है कि ये खत्म हो गए।
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डकैतों के सफाए के बाद बीहड़ों में लकड़ी के अवैध कटान ने जोर पकड़ा। इससे भी वन्य जीवों ने इलाका छोड़ा। चंबल सेंचुरी और सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की संयुक्त रिपोर्ट में माना गया कि नौ प्रजातियों के बाद अब लकड़बग्घा, लोमड़ी, काला नेवला समेत अन्य जीवों पर खतरा है। चंबल सेंचुरी के डीएफओ अनिल कुमार पटेल कहते हैं कि वह जगह-जगह निगरानी करा रहे हैं।
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ये जीव हो चुके हैं विलुप्त
सफेद गिद्ध, तेंदुआ, बारहसिंघा, चीतल, काला हिरन, लोमड़ी, काली बिल्ली, सांभर, पेंगोलिन।
इन पर है संकट
लकड़बग्घा, सेही (पोरक्यूपाइन), लोमड़ी, लाल हिरन और काला नेवला अब यहां कम हो रहे हैं।
‘बीहड़ में शिकार के कारण यह जीव विलुप्त हो रहे हैं। वहीं जंगलों के कटान से कई जीव बाहर आ रहे हैं। इन्हें गांव वाले सुरक्षा के लिहाज से मार देते हैं।’
- डॉ. राजीव चौहान (सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर)
‘चंबल के वन्य जीवों पर संकट है। सरकार के पास इसकी रिपोर्ट है। जंगलों के कटान और जंगली जानवरों के शिकार पर सरकार कठोर कानून लागू करने जा रही है।’
- रवीन्द्र सिंह भदौरिया (विशेषज्ञ, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण)