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Auraiya News: महिला के उत्पीड़न का केस पुनर्विचार को सीजेएम कोर्ट भेजा
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औरैया। पति की मौत के बाद ससुराल वालों के उत्पीड़न और एक दरोगा पर अश्लील हरकत करने का आरोप लगाने वाली पीड़िता को जिला एवं सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान की अदालत ने सीजेएम के 28 जुलाई 2025 के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें महिला का प्रार्थना पत्र खारिज किया गया था। सत्र अदालत ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस सीजेएम कोर्ट भेज दिया है।
एरवाकटरा थाना क्षेत्र की एक विधवा ने अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। उसने बताया कि पति की मौत के बाद ससुर नजर सिंह, जेठ जितेंद्र सिंह, रागिनी, रेखा व सविता उसे प्रताड़ित कर घर छोड़ने का दबाव बना रहे थे। पीड़िता का आरोप है कि 10 दिसंबर 2024 को आरोपियों ने उसे नशीला समोसा खिलाकर बेहोश किया और दुष्कर्म कर अश्लील वीडियो बना लिया। शिकायत करने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई। पीड़िता ने पुलिस और जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाने में तैनात उपनिरीक्षक अब्दुल सत्तार खां ने उसे चार जनवरी 2025 को फोन कर थाने बुलाया। छह जनवरी को थाने पहुंचने पर दरोगा उसे परिसर के एक कमरे में ले गया। आरोप है कि दरोगा ने पीड़िता का हाथ पकड़कर अश्लील हरकतें कीं और एफआईआर दर्ज करने के लिए उसकी बात मानने को कहा। विरोध करने पर उसे थप्पड़ मारकर थाने से भगा दिया गया और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
रिवीजन याचिका में पीड़िता ने दरोगा के मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप चैट/फोटो के सबूत पेश किए। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान ने पत्रावली का अवलोकन किया। उन्होंने पाया कि निचली अदालत ने बिना गहराई से विचार किए आवेदन को यांत्रिक तरीके से निरस्त कर दिया था। अदालत ने सीजेएम औरैया के 28 जुलाई 2025 के आदेश को रद कर दिया। न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दोबारा कानून सम्मत आदेश पारित किया जाए।
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एरवाकटरा थाना क्षेत्र की एक विधवा ने अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। उसने बताया कि पति की मौत के बाद ससुर नजर सिंह, जेठ जितेंद्र सिंह, रागिनी, रेखा व सविता उसे प्रताड़ित कर घर छोड़ने का दबाव बना रहे थे। पीड़िता का आरोप है कि 10 दिसंबर 2024 को आरोपियों ने उसे नशीला समोसा खिलाकर बेहोश किया और दुष्कर्म कर अश्लील वीडियो बना लिया। शिकायत करने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई। पीड़िता ने पुलिस और जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाने में तैनात उपनिरीक्षक अब्दुल सत्तार खां ने उसे चार जनवरी 2025 को फोन कर थाने बुलाया। छह जनवरी को थाने पहुंचने पर दरोगा उसे परिसर के एक कमरे में ले गया। आरोप है कि दरोगा ने पीड़िता का हाथ पकड़कर अश्लील हरकतें कीं और एफआईआर दर्ज करने के लिए उसकी बात मानने को कहा। विरोध करने पर उसे थप्पड़ मारकर थाने से भगा दिया गया और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
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रिवीजन याचिका में पीड़िता ने दरोगा के मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप चैट/फोटो के सबूत पेश किए। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान ने पत्रावली का अवलोकन किया। उन्होंने पाया कि निचली अदालत ने बिना गहराई से विचार किए आवेदन को यांत्रिक तरीके से निरस्त कर दिया था। अदालत ने सीजेएम औरैया के 28 जुलाई 2025 के आदेश को रद कर दिया। न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दोबारा कानून सम्मत आदेश पारित किया जाए।
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