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सरकार के फरमान से मरीज परेशान
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Mon, 21 Mar 2016 11:40 PM IST
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जांच में पता चला है कि दवाई को खासतौर पर नशे के लिए ही बनाया गया था।
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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 344 मिश्रित दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध से मेडिकल स्टोर संचालकों के साथ मरीज भी परेशान हो रहे हैं। कई दवाओं पर प्रतिबंध से पहले से दवा ले रहे मरीजों का बजट बिगड़ जाएगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 10 मार्च को 344 दवाइयों के मिश्रण को मरीजों के लिए खतरनाक मानते हुए प्रतिबंधित किया गया था।
दवाइयों की सूची में शामिल कर बिक्री पर रोक लगाने का गजट भी जारी कर दिया गया है। इस गजट ने मरीजों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। अभी तक जीवन को बचाने के लिए किसी प्रकार एक-दो गोलियां खरीद कर काम चला लेते थे। लेकिन अब एक ही बीमारी की तीन से चार दवा खरीदनी पड़ेगीं। इससे गोलियों की संख्या बढ़ने के साथ जेब पर भी भार बढ़ेगा। वहीं मेडिकल स्टोर संचालक भी इस आदेश से खासे प्रभावित हैं।
पेयजल में कमी के चलते किडनी की बीमारी से ग्रसित ओम नारायण चतुर्वेदी दवाइयों पर लगाए गए प्रतिबंध से खासे परेशान दिखे। उन्होंने बताया कि अभी तक मिश्रित गोली खरीदने से पांच रुपये की गोली से ही काम चल जाता था। लेकिन अलग-अलग गोली खरीदने पर दस से बारह रुपये एक डोज पर खर्च करना पड़ेगा।
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डायबिटीज से ग्रसित 72 वर्षीय हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए अभी तक वह ग्लिमीस्टार-एम 2 टेबलेट का उपयोग करते थे। इसमें ग्लेमीप्राइड और मेटफार्मिन हाइड्रोक्लोराइड का मिश्रण है। यह गोली 3.90 पैसे की मिलती है। लेकिन प्रतिबंध के बाद अलग-अलग टेबलेट खरीदने पर मेटफार्मिन दो रुपये और ग्लेमीप्राइड टेबलेट एक एमजी 4.60 पैसे की है। ऐसे में अब एक डोज पर 6.60 रुपये खर्च करने पडे़ंगे।
ब्लड प्रेशर से ग्रसित सुनील शर्मा ने बताया कि ब्लड प्रेशर को व्यवस्थित रखने के लिए अमलोप्रेस-एटी टेबलेट लेते हैं। जिसमें अम्लोडेलपिन और एटेनोलोल का मिश्रण है। यह एक गोली पांच रुपये की पड़ती है। प्रतिबंध लग जाने से अलग-अलग खरीदने पर अम्लोडेलपिन 3.50 पैसे और एटेनोलोल 2.50 पैसे की मिलेगी। ऐसे में बेवजह एक रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
यह है मेडिकल स्टोर संचालकों की परेशानी
इस संबंध में मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि मिश्रित दवाइयों को तुरंत स्टॉकिस्ट को वापस करने के आदेश तो जारी कर दिए गए। ऐसे में अभी तक अधिकांश मिश्रित दवाइयों का उपयोग करने वाले मरीजों के सामने संकट खड़ा हो जाएगा। वहीं मिश्रित दवाइयों की बिक्री होने से उनके अलग-अलग फामूर्ले की दवाइयाें की बिक्री ही नहीं होती थी। अब तुरंत दवाइयों को वापस किए जाने के फरमान से बड़ी समस्या हो रही है।
वहीं मरीजों के ऊपर भी अधिक भार बढ़ेगा। इसमें सबसे ज्यादा टीबी के मरीजों पर बोझ पड़ेगा। फोरकाक्स टेबलेट में चार दवाइयों का मिश्रण है। इसकी मिश्रित एक गोली की कीमत सात रुपये है। जबकि अलग-अलग गोली खरीदने पर यही एक खुराक 19 रुपये की पड़ती है। वहीं एंटीबॉयटिक दवाइयों लिवोमॅक एझेड जो मिश्रित एक गोली 29 रुपये की मिलती है। जबकि इसकी अलग-अलग गोली खरीदने पर 33.50 पैसे की एक खुराक बनती है।
अधिकांश दवाइयां अस्पताल में न मिलने और मरीज के जीवन को बचाने के लिए बाहर की दवाइयां लिखनी पड़ती है। इनमें मिश्रित दवाइयां भी शामिल होती हैं। हालांकि अभी तक विभाग में 344 प्रतिबंधित दवाइयों को न लिखे जाने संबंधी कोई आदेश नहीं आया है। फिर भी शासन को जो आदेश होगा उसके तहत मरीजों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा।
डा.अरुण तिवारी
चिकित्साधिकारी, जिला अस्पताल, औरैया
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दवाइयों की सूची में शामिल कर बिक्री पर रोक लगाने का गजट भी जारी कर दिया गया है। इस गजट ने मरीजों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। अभी तक जीवन को बचाने के लिए किसी प्रकार एक-दो गोलियां खरीद कर काम चला लेते थे। लेकिन अब एक ही बीमारी की तीन से चार दवा खरीदनी पड़ेगीं। इससे गोलियों की संख्या बढ़ने के साथ जेब पर भी भार बढ़ेगा। वहीं मेडिकल स्टोर संचालक भी इस आदेश से खासे प्रभावित हैं।
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पेयजल में कमी के चलते किडनी की बीमारी से ग्रसित ओम नारायण चतुर्वेदी दवाइयों पर लगाए गए प्रतिबंध से खासे परेशान दिखे। उन्होंने बताया कि अभी तक मिश्रित गोली खरीदने से पांच रुपये की गोली से ही काम चल जाता था। लेकिन अलग-अलग गोली खरीदने पर दस से बारह रुपये एक डोज पर खर्च करना पड़ेगा।
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डायबिटीज से ग्रसित 72 वर्षीय हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए अभी तक वह ग्लिमीस्टार-एम 2 टेबलेट का उपयोग करते थे। इसमें ग्लेमीप्राइड और मेटफार्मिन हाइड्रोक्लोराइड का मिश्रण है। यह गोली 3.90 पैसे की मिलती है। लेकिन प्रतिबंध के बाद अलग-अलग टेबलेट खरीदने पर मेटफार्मिन दो रुपये और ग्लेमीप्राइड टेबलेट एक एमजी 4.60 पैसे की है। ऐसे में अब एक डोज पर 6.60 रुपये खर्च करने पडे़ंगे।
ब्लड प्रेशर से ग्रसित सुनील शर्मा ने बताया कि ब्लड प्रेशर को व्यवस्थित रखने के लिए अमलोप्रेस-एटी टेबलेट लेते हैं। जिसमें अम्लोडेलपिन और एटेनोलोल का मिश्रण है। यह एक गोली पांच रुपये की पड़ती है। प्रतिबंध लग जाने से अलग-अलग खरीदने पर अम्लोडेलपिन 3.50 पैसे और एटेनोलोल 2.50 पैसे की मिलेगी। ऐसे में बेवजह एक रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
यह है मेडिकल स्टोर संचालकों की परेशानी
इस संबंध में मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि मिश्रित दवाइयों को तुरंत स्टॉकिस्ट को वापस करने के आदेश तो जारी कर दिए गए। ऐसे में अभी तक अधिकांश मिश्रित दवाइयों का उपयोग करने वाले मरीजों के सामने संकट खड़ा हो जाएगा। वहीं मिश्रित दवाइयों की बिक्री होने से उनके अलग-अलग फामूर्ले की दवाइयाें की बिक्री ही नहीं होती थी। अब तुरंत दवाइयों को वापस किए जाने के फरमान से बड़ी समस्या हो रही है।
वहीं मरीजों के ऊपर भी अधिक भार बढ़ेगा। इसमें सबसे ज्यादा टीबी के मरीजों पर बोझ पड़ेगा। फोरकाक्स टेबलेट में चार दवाइयों का मिश्रण है। इसकी मिश्रित एक गोली की कीमत सात रुपये है। जबकि अलग-अलग गोली खरीदने पर यही एक खुराक 19 रुपये की पड़ती है। वहीं एंटीबॉयटिक दवाइयों लिवोमॅक एझेड जो मिश्रित एक गोली 29 रुपये की मिलती है। जबकि इसकी अलग-अलग गोली खरीदने पर 33.50 पैसे की एक खुराक बनती है।
अधिकांश दवाइयां अस्पताल में न मिलने और मरीज के जीवन को बचाने के लिए बाहर की दवाइयां लिखनी पड़ती है। इनमें मिश्रित दवाइयां भी शामिल होती हैं। हालांकि अभी तक विभाग में 344 प्रतिबंधित दवाइयों को न लिखे जाने संबंधी कोई आदेश नहीं आया है। फिर भी शासन को जो आदेश होगा उसके तहत मरीजों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा।
डा.अरुण तिवारी
चिकित्साधिकारी, जिला अस्पताल, औरैया