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..फिर से गुलजार सराफा बाजार
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Tue, 12 Apr 2016 12:04 AM IST
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सराफा बाजार में आभूषण दिखाता दुकानदार।
- फोटो : amar ujala beuro
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करीब डेढ़ माह से एक्साइज ड्यूटी के विरोध में लगातार बंदी के बाद सोमवार को सराफा बाजार खुल गया। इस दौरान दुकानों पर खरीददारों की भीड़ उमड़ पड़ी। सहालग होने के कारण बाजारों में कुछ ज्यादा ही रौनक दिखाई दी। वहीं दूसरी ओर अभी भी सराफा बाजार बंदी की अटकलों पर विराम नहीं लगा है।
दो मार्च से एक्साइज ड्यूटी के विरोध में सराफा एसोसिएशन की बाजार बंदी सोमवार को खत्म हो गई। उत्पादक शुल्क के मसले पर केंद्र सरकार तो नहीं झुकी, लेकिन सराफा कारोबारियों ने अपने कदम पीछे खींचने पड़े। जिसका एक कारण सराफा कारोबार से जुड़े कारीगरों को हो रहा नुकसान भी बताया जा रहा है। सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी संजीव वर्मा ने बताया कि सराफा बाजार की बंदी से स्वर्ण कारीगरों को परिवारों में खाने के भी लाले पड़े थे। इस हालात में ज्यादा दिनों तक बंदी रखने से कारीगरों को जिले से पलायन करना पड़ता। स्वर्ण कारीगरों को ध्यान में रख कर बाजार खोला गया है।
सराफा बाजार खुलने से दूसरी तरफ ग्राहकों ने भी चैन की सांस ली। बेटी की शादी के लिए जेवरातों की खरीददारी करने आई मां माया देवी ने बताया कि सराफा दुकानें खुलने से उनकी जान में जान आई है। उन्होंने बताया कि पिछले साल उनकी बेटी की शादी तय हुई थी। आगामी 16 मार्च को बेटी की शादी है। लगातार जारी हड़ताल से आभूषणों की खरीददारी न होने से शादी सांसत में नजर आ रही थी।
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सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष सर्वेश वर्मा ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देश 41 दिनों की बंदी के बाद बाजार खुल तो गया है, लेकिन सरकार के मांग न मानने के कारण ज्यादा दिन तक बाजार खुलने में संशय है। उन्होंने कहा कि सोमवार को आगरा मंडल के पदाधिकारी किन्हीं कारणों के कारण जनपद में नहीं आ सके। मंगलवार को उनके आने की उम्मीद है। उनके साथ विचार विमर्श के साथ ही बंदी के बारे में बताया जा सकेगा। एसोसिएशन के पदाधिकारी विपिन मित्तल ने बताया कि जनपद में सराफा बाजार तो खुल गया है, लेकिन बड़े मंडलाें में बंदी जारी है। उन्होंने कहा कि यदि सराफा बाजार की थोक मंडी नहीं खुली तो छोटे व्यापारी माल कहां से लाएंगे।
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दो मार्च से एक्साइज ड्यूटी के विरोध में सराफा एसोसिएशन की बाजार बंदी सोमवार को खत्म हो गई। उत्पादक शुल्क के मसले पर केंद्र सरकार तो नहीं झुकी, लेकिन सराफा कारोबारियों ने अपने कदम पीछे खींचने पड़े। जिसका एक कारण सराफा कारोबार से जुड़े कारीगरों को हो रहा नुकसान भी बताया जा रहा है। सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी संजीव वर्मा ने बताया कि सराफा बाजार की बंदी से स्वर्ण कारीगरों को परिवारों में खाने के भी लाले पड़े थे। इस हालात में ज्यादा दिनों तक बंदी रखने से कारीगरों को जिले से पलायन करना पड़ता। स्वर्ण कारीगरों को ध्यान में रख कर बाजार खोला गया है।
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सराफा बाजार खुलने से दूसरी तरफ ग्राहकों ने भी चैन की सांस ली। बेटी की शादी के लिए जेवरातों की खरीददारी करने आई मां माया देवी ने बताया कि सराफा दुकानें खुलने से उनकी जान में जान आई है। उन्होंने बताया कि पिछले साल उनकी बेटी की शादी तय हुई थी। आगामी 16 मार्च को बेटी की शादी है। लगातार जारी हड़ताल से आभूषणों की खरीददारी न होने से शादी सांसत में नजर आ रही थी।
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सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष सर्वेश वर्मा ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देश 41 दिनों की बंदी के बाद बाजार खुल तो गया है, लेकिन सरकार के मांग न मानने के कारण ज्यादा दिन तक बाजार खुलने में संशय है। उन्होंने कहा कि सोमवार को आगरा मंडल के पदाधिकारी किन्हीं कारणों के कारण जनपद में नहीं आ सके। मंगलवार को उनके आने की उम्मीद है। उनके साथ विचार विमर्श के साथ ही बंदी के बारे में बताया जा सकेगा। एसोसिएशन के पदाधिकारी विपिन मित्तल ने बताया कि जनपद में सराफा बाजार तो खुल गया है, लेकिन बड़े मंडलाें में बंदी जारी है। उन्होंने कहा कि यदि सराफा बाजार की थोक मंडी नहीं खुली तो छोटे व्यापारी माल कहां से लाएंगे।