{"_id":"577ff3e74f1c1be6567fb943","slug":"books-are-taking-pause-at-the-age-of-junk","type":"story","status":"publish","title_hn":"किताबें थामने की उम्र में उठा रहे कबाड़ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किताबें थामने की उम्र में उठा रहे कबाड़
अमर उजाला ब्यूरो /औरैया
Updated Sat, 09 Jul 2016 12:11 AM IST
विज्ञापन
कबाड़ी की दुकान में कबाड़ बीनते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिधूना(औरैया)। सर्व शिक्षा अभियान और स्कूल चलो अभियान शायद कागजों में ही चलकर रहे हैं। हकीकत में इसका कोई पालन नहीं हो रहा है। नया सत्र शुरू हो गया है। इसके बावजूद कई बच्चे स्कूल की चौखट से दूर हैं। कॉपी-किताबें थामने की उम्र में कई जगह मासूम चाय की दुकान में गिलास धो रहें हैं तो कई जगह कबाड़ा उठा रहे हैं। आखिर इन बच्चों को कब स्कूल नसीब होगा और कब इनके हाथों में कॉपी-किताब होगी? यह सवाल आज भी पहले की तरह बना हुआ है।
विज्ञापन
समय-समय पर अभियान चलाकर बाल श्रम रोकने के भी प्रयास किए गए। यह प्रयास नाकाफी ही साबित हुए। इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा चलाया जा रहा स्कूल चलो अभियान भी सफल नहीं हो पा रहा है। जिसका नतीजा ये है कि आज भी बच्चे स्कूल की जगह बालश्रम में लगे हुए हैं। हालात ये है कि छोटे-छोटे बच्चे कबाड़ की दुकानों पर काम करते देखे जा सकते हैं। नगर में कहीं भी बाल श्रम को खुलेआम देखा जा सकता है। जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए वे कबाड़ की बोरियां लेकर तो कोई होटलों तथा ऑटो पार्ट्स की दुकान पर काम कर रहे हैं। श्रम प्रवर्तन अधिकारी शिव कुमार मिशरा ने बताया कि बाल श्रम के खिलाफ अभियान चलाया गया था। काफी बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। जल्द ही दोबारा अभियान चलाकर बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया जाएगा।
विज्ञापन