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हाय, अब कैइसन पलिहैं लरिका

Sat, 14 May 2016 12:07 AM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
Auraiya, Uttar pradesh, India Updated Sat, 14 May 2016 12:07 AM IST
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Azadpur electrical accident in auraiya
पति की मौत के बाद बच्चों को गोद में लिए बिलखती पत्नी पप्पी देवी। - फोटो : amar ujala beuro
आजादपुर में हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आकर मरे युवक के परिवार की हालत दयनीय है। शुक्रवार को दो बेटों को तो पड़ोसियों ने खाना खिला दिया। मगर मृतक की पत्नी ने कुछ नही खाया। सबसे बुरा हाल तो चार माह के मासूम था जो मां की सूखी छाती में दूध तलाशने को छटपटा रहा था और मां बेसुध थी। उसके मुंह से तो यहीं निकल रहा था, हाय अब कैइसन पलिहैं लरिका।
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आजादपुर गांव में हुए बिजली हादसे में मृतक राजेंद्र अपने परिवार में दूसरे नंबर का बेटा था। उसके तीन भाई हरमोहन, लक्ष्मण व चंद्रशेखर अलग-अलग झोपड़ियों मेें रहते हैं। पिता भगवान सिंह छोटे बेटे लक्ष्मण के साथ रहता है। मृतक के तीन पुत्र सूरज (8), सोनू (5) और प्रशांत चार माह का है। पति की मौत के बाद तीनों बच्चों को गोद में बिठाए बेवा पप्पी का कलेजा मुंह को आ रहा है।
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रो-रोकर निढाल हो रही पप्पी के मुंह से बार-बार यही निकल रहा है कि हाय अब कैइसन पलिहैं लरका...। क्योंकि इस परिवार में कमाने वाला केवल राजेंद्र ही था। उसके मरने के बाद अब खाने और कमाने के लाले पड़ गए हैं। वहीं राजेंद्र के नाम सिर्फ मनरेगा कार्ड ही है। जबकि पिता भगवान सिंह के नाम दर्ज राशन कार्ड में उसका नाम लिखा है। ऐसे में पिता के भी छोटे भाई के साथ रहने से परिवार के लिए रही सही राशन की उपलब्धता भी खत्म हो गई है।
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हालांकि घटना के दिन से लेकर आज तक गांव वाले संवेदना के तौर पर छोटे-छोटे बच्चों को खाना और दूध दे रहे हैं। लेकिन यह संवेदनाएं भी समय के साथ खत्म हो जाएंगी। ऐसे में मृतक की पत्नी पप्पी के पास परिवार को पालने को दूसरा कोई सहारा नहीं दिख रहा है। घटना के दिन मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय विधायक प्रदीप यादव ने मृतक के परिवार को कई योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया था। लेकिन सरकारी कार्य कितनी जल्दी पूरे होते हैं, यह तो जग जाहिर है।


मदद को नहीं दिख रहे समाजसेवी
औरैया। अपनी संस्था के नाम का परचम बुलंद करने को बात-बात में हजारों रुपये फूंकने वाले सामाजिक संगठन भी मौके से नदारत दिखाई दे रहे हैं। आजादपुर गांव में हादसा हुए 48 घंटे से भी अधिक बीत जाने के बाद भी परिवार को आर्थिक और खाद्यान्न मुहैया कराए जाने को अब तक किसी भी सामाजिक संगठन ने सांस नहीं ली है। ऐसे में गरीब परिवार के सामने दाने-दाने को मोहताज रहने के दिन दिखाई दे रहे हैं।
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