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औरैया : 34 अस्पतालों में सिर्फ एक के पास अग्निशमन की एनओसी
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फोटो03एयूआरपी 13- श्री गुलाब सिंह अस्पताल। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। जिले में प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिंगहोमों के संचालन में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसकी गवाही खुद सरकारी आंकड़े दे रहे हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को मिलाकर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में जिले में 34 अस्पताल चल रहे हैं। इनमें से सिर्फ एक के पास ही अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) है। बाकी 33 अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की सांठगांठ कर संचालित हो रहे हैं। इनके पास आग से निपटने के संसाधन नहीं हैं। मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक निजी अस्पताल में आग लगने से आठ लोगों की मौत और कई लोगों के झुलसने की घटना ने जिले के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
जिले में 100 से अधिक प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंगहोम संचालित हो रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में 34 ही चल रहे हैं। इन अस्पतालों को लाइसेंस जारी करते वक्त न तो इनके भवन का नक्शा देखा जाता और न ही आग बुझाने के इंतजाम परखे जाते हैं। विभाग से सांठगांठ ठीक से हुई तो झोलाछाप भी अस्पताल चलाने लगते हैं।
ऐसे कई मामले विभाग के सामने आ चुके हैं, लेकिन इस पर चुप्पी साध ली गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की बात करें तो जिले में अस्पताल और नर्सिंगहोम मिलाकर 34 का पंजीकरण है। इनमें से गुलाब सिंह अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो किसी भी नर्सिंगहोम या अस्पताल के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं है।
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ज्यादातर अस्पताल किराये के भवन में चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बिना अग्निशमन विभाग की एनओसी देखे ही इनका पंजीकरण कर अस्पताल संचालन का ठेका दे दिया। ये सब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कृपा पर चल रहे हैं।
कोर्ट के आदेश पर 15 मीटर से ऊंची इमारत में संचालित हो रहे अस्पतालों का लाइसेंस लेने के लिए फायर ब्रिगेड की एनओसी जरूरी है। जिले में इस समय सिर्फ गुलाब सिंह अस्पताल के पास एनओसी है। इसके अलावा अन्य किसी के पास एनओसी नहीं है। -प्रतीक श्रीवास्तव, सीएफओ, औरैया।
जिले में ज्यादातर अस्पताल 15 से 20 बेड के संचालित हो रहे हैं। उनके लिए सिर्फ ट्रेनिंग प्रमाणपत्र और आग बुझाने के सिलिंडर लगाने की ही जरूरत है। लाइसेंस जारी करने के दौरान दस्तावेजों में इस प्रमाणपत्र की जांच करने के उपरांत ही नर्सिंगहोमों का पंजीकरण किया जाता है। यदि कोई नर्सिंगहोम बिना मानक पूरा किए और बिना फायर की एनओसी के संचालित हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में सही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ, औरैया।
निरीक्षण में अधिकांश मिलतीं हैं ये कमियां
अग्निशमन विभाग औरैया के द्वितीय अधिकारी अतुल त्रिपाठी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान अधिकांश अस्पतालों में मानक के अनुरूप व्यवस्था नहीं मिलती है। मानकों के तहत मरीज जहां भर्ती होते हैं वहां फायर अलार्म सिस्टम, टैंक, हौजरील, पंप व स्टिंग्विशर होना जरूरी होता है। बेसमेंट होगा तो स्प्रिंक्लर (फव्वारा) होना जरूरी होता है।
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जिले में 100 से अधिक प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंगहोम संचालित हो रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में 34 ही चल रहे हैं। इन अस्पतालों को लाइसेंस जारी करते वक्त न तो इनके भवन का नक्शा देखा जाता और न ही आग बुझाने के इंतजाम परखे जाते हैं। विभाग से सांठगांठ ठीक से हुई तो झोलाछाप भी अस्पताल चलाने लगते हैं।
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ऐसे कई मामले विभाग के सामने आ चुके हैं, लेकिन इस पर चुप्पी साध ली गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की बात करें तो जिले में अस्पताल और नर्सिंगहोम मिलाकर 34 का पंजीकरण है। इनमें से गुलाब सिंह अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो किसी भी नर्सिंगहोम या अस्पताल के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं है।
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ज्यादातर अस्पताल किराये के भवन में चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बिना अग्निशमन विभाग की एनओसी देखे ही इनका पंजीकरण कर अस्पताल संचालन का ठेका दे दिया। ये सब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कृपा पर चल रहे हैं।
कोर्ट के आदेश पर 15 मीटर से ऊंची इमारत में संचालित हो रहे अस्पतालों का लाइसेंस लेने के लिए फायर ब्रिगेड की एनओसी जरूरी है। जिले में इस समय सिर्फ गुलाब सिंह अस्पताल के पास एनओसी है। इसके अलावा अन्य किसी के पास एनओसी नहीं है। -प्रतीक श्रीवास्तव, सीएफओ, औरैया।
जिले में ज्यादातर अस्पताल 15 से 20 बेड के संचालित हो रहे हैं। उनके लिए सिर्फ ट्रेनिंग प्रमाणपत्र और आग बुझाने के सिलिंडर लगाने की ही जरूरत है। लाइसेंस जारी करने के दौरान दस्तावेजों में इस प्रमाणपत्र की जांच करने के उपरांत ही नर्सिंगहोमों का पंजीकरण किया जाता है। यदि कोई नर्सिंगहोम बिना मानक पूरा किए और बिना फायर की एनओसी के संचालित हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में सही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ, औरैया।
निरीक्षण में अधिकांश मिलतीं हैं ये कमियां
अग्निशमन विभाग औरैया के द्वितीय अधिकारी अतुल त्रिपाठी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान अधिकांश अस्पतालों में मानक के अनुरूप व्यवस्था नहीं मिलती है। मानकों के तहत मरीज जहां भर्ती होते हैं वहां फायर अलार्म सिस्टम, टैंक, हौजरील, पंप व स्टिंग्विशर होना जरूरी होता है। बेसमेंट होगा तो स्प्रिंक्लर (फव्वारा) होना जरूरी होता है।

फोटो-03एयूआरपी-15- अछल्दा के एक अस्पताल के बाहर बैठे तीमारदार। संवाद- फोटो : AURAIYA