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माननीयों की बेरुखी से गोद लिए अस्पताल बदहाल
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फोटो-16एयूआरपी-9-बेला स्वास्थ्य केंद्र पर पर्चा बनवाने के लिए खड़े मरीज। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। माननीयों की बेरुखी से गोद लिए अस्पताल बदहाल नजर आ रहे हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों का टोटा है। एक्सरे, ईसीजी, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी के साथ ही ऑपरेशन से प्रसव जैसी सुविधाएं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की देखभाल नहीं हो रही है। कुछ स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। गोद लिए पांच माह का समय बीत जाने के बाद भी जनप्रतिनिधि व्यवस्था सुधार में अहम पहल नहीं कर सके। बात बड़े ओहदे की होने के कारण स्वास्थ्य अधिकारी भी कुछ कहने की जहमत नहीं उठा रहे।
कोरोना संक्रमण काल में सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को अस्पताल गोद लेने के निर्देश दिए। हालत यह है कि जिन अस्पतालों को गोद लिया गया वह माननीयों की बेरुखी से बदहाल हैं। डॉक्टरों व स्टाफ की कमी के साथ ही मूलभूत सुविधाएं तक मरीजों को मुहैया नहीं हो पा रही हैं। सरकार के निर्देश थे कि वह अपनी विकास निधि से अस्पतालों में सुविधाओं का विकास कराएंगे। जिससे इलाज से संबंधित सभी कमियां दूर हो सकेंगे। इसके अलावा शासन की योजनाओं को धरातल पर लागू करवाने पर भी जोर था। लेकिन गोद लेने के बाद अस्पतालों की ओर ध्यान नहीं दिया गया। जिससे आज भी ये अस्पताल रेफर सेंटर बने हुए हैं। गंभीर रूप से घायल पहुंचने वाले मरीज भी सर्जन और विशेषज्ञों के न होने पर रेफर किए जा रहे हैं।
एक्सरे, जांच के लिए भटकते लोग
बेला स्वास्थ्य केंद्र बुरी तरह बदहाल है। यहां पर दो डॉक्टरों की तैनाती है, इसमें एक एमबीबीएस व एक बीएमएस डॉक्टर है। इन्हीं के सहारे अस्पताल चल रहा है। कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इसके साथ ही अस्पताल में एक्सरे, जांच, अल्ट्रासाउंड आदि की सुविधा नहीं है। अस्पताल आने वाले मरीज परेशान होकर वापस लौटते हैं।
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बिजली पानी की सुविधा बदहाल
स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलना तो दूर यहां के स्टाफ को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रह है। अजीतमल स्वास्थ्य केंद्र में जेनरेटर खराब रहने से एक्सरे का काम प्रभावित है। वहीं, मरीजों की नाराजगी भी स्वास्थ्य कर्मियों को झेलनी पड़ रही है। बिधूना अस्पताल में लगे हैंडपंप गंदा पानी दे रहे हैं। जिससे मरीज और स्टाफ के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
बोले जिम्मेदार...
बिधूना अस्पताल को गोद लेने के बाद रिक्त पड़े सर्जन के पद भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। एक वाशिंग मशीन, थर्मल स्कैनर दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लगातार प्रयास जारी है।
-देवेश शाक्य, विधायक प्रतिनिधि
ऑक्सीजन प्लांट के लिए 11 लाख रुपये दिए हैं। एनटीपीसी की ओर से मरीजों व तीमारदारों के लिए रैन बसेरा चालू कराया गया है। जो खामियां हैं उन्हें सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।
-लाखन सिंह राजपूत- कृषि मंत्री
दो वर्ष से निधि नहीं आई है, इसलिए कोई भी धनराशि नहीं दी गई है। गोद लेने का मतलब है कि अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से चले। इसको लेकर समय-समय पर निरीक्षण कर व्यवस्था देखी जाती है। डॉक्टरों की कमी को जल्द पूरा कराया जाएगा।
-गीता शाक्य, राज्यसभा सांसद
-----------
अस्पताल को गोद लिया है, अभी तक कोई निधि से काम नहीं कराया है। जल्द ही स्ट्रीट लाइट, ओपेन जिम खुलवाया जाएगा। इसके साथ ही डॉक्टरों द्वारा बताई गई कमियों को दूर किया जाएगा।
-कमल दोहरे, जिला पंचायत अध्यक्ष
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कोरोना संक्रमण काल में सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को अस्पताल गोद लेने के निर्देश दिए। हालत यह है कि जिन अस्पतालों को गोद लिया गया वह माननीयों की बेरुखी से बदहाल हैं। डॉक्टरों व स्टाफ की कमी के साथ ही मूलभूत सुविधाएं तक मरीजों को मुहैया नहीं हो पा रही हैं। सरकार के निर्देश थे कि वह अपनी विकास निधि से अस्पतालों में सुविधाओं का विकास कराएंगे। जिससे इलाज से संबंधित सभी कमियां दूर हो सकेंगे। इसके अलावा शासन की योजनाओं को धरातल पर लागू करवाने पर भी जोर था। लेकिन गोद लेने के बाद अस्पतालों की ओर ध्यान नहीं दिया गया। जिससे आज भी ये अस्पताल रेफर सेंटर बने हुए हैं। गंभीर रूप से घायल पहुंचने वाले मरीज भी सर्जन और विशेषज्ञों के न होने पर रेफर किए जा रहे हैं।
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एक्सरे, जांच के लिए भटकते लोग
बेला स्वास्थ्य केंद्र बुरी तरह बदहाल है। यहां पर दो डॉक्टरों की तैनाती है, इसमें एक एमबीबीएस व एक बीएमएस डॉक्टर है। इन्हीं के सहारे अस्पताल चल रहा है। कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इसके साथ ही अस्पताल में एक्सरे, जांच, अल्ट्रासाउंड आदि की सुविधा नहीं है। अस्पताल आने वाले मरीज परेशान होकर वापस लौटते हैं।
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बिजली पानी की सुविधा बदहाल
स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलना तो दूर यहां के स्टाफ को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रह है। अजीतमल स्वास्थ्य केंद्र में जेनरेटर खराब रहने से एक्सरे का काम प्रभावित है। वहीं, मरीजों की नाराजगी भी स्वास्थ्य कर्मियों को झेलनी पड़ रही है। बिधूना अस्पताल में लगे हैंडपंप गंदा पानी दे रहे हैं। जिससे मरीज और स्टाफ के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
बोले जिम्मेदार...
बिधूना अस्पताल को गोद लेने के बाद रिक्त पड़े सर्जन के पद भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। एक वाशिंग मशीन, थर्मल स्कैनर दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लगातार प्रयास जारी है।
-देवेश शाक्य, विधायक प्रतिनिधि
ऑक्सीजन प्लांट के लिए 11 लाख रुपये दिए हैं। एनटीपीसी की ओर से मरीजों व तीमारदारों के लिए रैन बसेरा चालू कराया गया है। जो खामियां हैं उन्हें सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।
-लाखन सिंह राजपूत- कृषि मंत्री
दो वर्ष से निधि नहीं आई है, इसलिए कोई भी धनराशि नहीं दी गई है। गोद लेने का मतलब है कि अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से चले। इसको लेकर समय-समय पर निरीक्षण कर व्यवस्था देखी जाती है। डॉक्टरों की कमी को जल्द पूरा कराया जाएगा।
-गीता शाक्य, राज्यसभा सांसद
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अस्पताल को गोद लिया है, अभी तक कोई निधि से काम नहीं कराया है। जल्द ही स्ट्रीट लाइट, ओपेन जिम खुलवाया जाएगा। इसके साथ ही डॉक्टरों द्वारा बताई गई कमियों को दूर किया जाएगा।
-कमल दोहरे, जिला पंचायत अध्यक्ष