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बारिश न होने से सूख रही धान की नर्सरी
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औरैया। इस मर्तबा अभी तक पर्याप्त बारिश न होने से धान उत्पादक किसानों में बेचैनी है। अब तक मात्र 48 फीसदी हिस्से में ही धान की रोपाई हो सकी है। बारिश के अभाव में बाकी की धान नर्सरी सूख कर पीली पड़ने से किसान परेशान हैं।
किसान विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार सिंह का कहना है कि इस बार जिले में धान की फसल के लिए मौसम मुफीद नहीं है। जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर के बीच 90 फीसदी बारिश यानि 680 मिली बारिश होनी चाहिए थी। जबकि अभी महज 81 मिमी ही बारिश हुई है। इस सीधा असर धान की रोपाई पर पड़ा है।
नर्सरी सूखने से किसान परेशान हो रहा है। जिले में इस बार 47 हजार 896 हेक्टेयर में धान रोपाई का लक्ष्य तय किया गया है। खराब मानसून के चलते अभी तक महज 23 हजार 221 हेक्टेयर में ही धान रोपाई का पूरा हो सका है। यदि यही हाल रहा है, तो इस बार धान के रोपाई के लक्ष्य के पूरा होने की संभावना कम होती प्रतीत हो रही है।
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इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार का कहना है कि अपेक्षित बारिश न होने से धान की रोपाई का काम प्रभावित जरूर हुआ है, लेकिन विलंब से ही सही, शत-प्रतिशत पूरा कराने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
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किसान विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार सिंह का कहना है कि इस बार जिले में धान की फसल के लिए मौसम मुफीद नहीं है। जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर के बीच 90 फीसदी बारिश यानि 680 मिली बारिश होनी चाहिए थी। जबकि अभी महज 81 मिमी ही बारिश हुई है। इस सीधा असर धान की रोपाई पर पड़ा है।
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नर्सरी सूखने से किसान परेशान हो रहा है। जिले में इस बार 47 हजार 896 हेक्टेयर में धान रोपाई का लक्ष्य तय किया गया है। खराब मानसून के चलते अभी तक महज 23 हजार 221 हेक्टेयर में ही धान रोपाई का पूरा हो सका है। यदि यही हाल रहा है, तो इस बार धान के रोपाई के लक्ष्य के पूरा होने की संभावना कम होती प्रतीत हो रही है।
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इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार का कहना है कि अपेक्षित बारिश न होने से धान की रोपाई का काम प्रभावित जरूर हुआ है, लेकिन विलंब से ही सही, शत-प्रतिशत पूरा कराने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।