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आरएपीडीआरपी: बजट पूरा, काम अधूरा
Auraiya
Updated Thu, 27 Nov 2014 05:30 AM IST
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औरैया। शहर को विद्युतीकरण की समस्या से निजात दिलाने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार की संयुक्त आरएपीडीआरपी योजना फ्लॉप साबित हो रही है। योजना के लिए प्रस्तावित 19 करोड़ के बजट में 25 प्रतिशत की कटौती किए जाने से शहर के पूर्ण संतृप्तिकरण पर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे आधा दर्जन मोहल्लों में अभी भी लाइन तक नहीं खींची जा सकी है।
बता दें कि शहर को विद्युत समस्या से निजात दिलाने के लिए वर्ष 2012 में 19 करोड़ रुपये की लागत से शुरु की गई आरएपीडीआरपी योजना शहर को विद्युतीकरण से संतृप्त करने में नाकायाब साबित हुई है। योजना के तहत पूरे शहर के जर्जर तारों को बदलना, ओवरलोड ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जाना, विद्युतीकरण से रहित मोहल्लों में ओबीसी बंच तार खींचना, ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगाया जाना, घरों में पुराने मीटर के स्थान पर नए मीटर लगाना, सब स्टेशनों की मशीनों का पुरसाहाल करना आदि शामिल था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अगले पांच वर्षों तक शहर को विद्युत की समस्या से मुक्त कराना था। खास बात यह है कि योजना के तहत निर्धारित कार्य के लिए पहले 19 करोड़ के बजट स्वीकृत किया गया था। जिसके बाद शासन स्तर पर बजट से 25 प्रतिशत की कटौती कर दी गई। कटौती के बाद बचे 17 करोड़ 3 लाख रूपये के बजट से शहर को विद्युतीकरण से संतृप्त करने पर पूरा खर्च कर दिया गया। इसके चलते आधा दर्जन से अधिक मोहल्लों में रत्तीभर भी काम शुरु नहीं कराया जा सका। विद्युतीकरण से छूटे मोहल्लों में फूलमती मंदिर के पास सदर बाजार, डीएम आवास के पास की गलियां, ओमनगर, सैनिक कालोनी, दयालपुर आंशिक, कानपुर रोड, जेसीज चौराहे से सत्ती तालाब तक शामिल हैं। वहीं पछैंया टोला, पढ़ीन दरवाजा व मदार दरबाजा में अभी भी कई खंभों पर तार खिंचने बाकी है। ऐसे में विद्युतीकरण से अछूते रह गए मोहल्ले के उपभोक्ता विभाग की इस कार्यशैली से खासे नाराज हैं।
कोट
बजट खत्म काम खत्म
आरएपीडीआरपी योजना के लिए केंद्र से प्रस्तावित बजट में 25 प्रतिशत की कटौती किए जाने से कुछ मोहल्ले विद्युतीकरण से अछूते रह गए हैं। ऐसे में जब बजट खत्म हो गया है तो काम भी खत्म हो गया है। आगे बजट मिलेगा तो काम कराया जाएगा।
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पंकज शर्मा
एक्सईएन, विद्युत
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बता दें कि शहर को विद्युत समस्या से निजात दिलाने के लिए वर्ष 2012 में 19 करोड़ रुपये की लागत से शुरु की गई आरएपीडीआरपी योजना शहर को विद्युतीकरण से संतृप्त करने में नाकायाब साबित हुई है। योजना के तहत पूरे शहर के जर्जर तारों को बदलना, ओवरलोड ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जाना, विद्युतीकरण से रहित मोहल्लों में ओबीसी बंच तार खींचना, ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगाया जाना, घरों में पुराने मीटर के स्थान पर नए मीटर लगाना, सब स्टेशनों की मशीनों का पुरसाहाल करना आदि शामिल था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अगले पांच वर्षों तक शहर को विद्युत की समस्या से मुक्त कराना था। खास बात यह है कि योजना के तहत निर्धारित कार्य के लिए पहले 19 करोड़ के बजट स्वीकृत किया गया था। जिसके बाद शासन स्तर पर बजट से 25 प्रतिशत की कटौती कर दी गई। कटौती के बाद बचे 17 करोड़ 3 लाख रूपये के बजट से शहर को विद्युतीकरण से संतृप्त करने पर पूरा खर्च कर दिया गया। इसके चलते आधा दर्जन से अधिक मोहल्लों में रत्तीभर भी काम शुरु नहीं कराया जा सका। विद्युतीकरण से छूटे मोहल्लों में फूलमती मंदिर के पास सदर बाजार, डीएम आवास के पास की गलियां, ओमनगर, सैनिक कालोनी, दयालपुर आंशिक, कानपुर रोड, जेसीज चौराहे से सत्ती तालाब तक शामिल हैं। वहीं पछैंया टोला, पढ़ीन दरवाजा व मदार दरबाजा में अभी भी कई खंभों पर तार खिंचने बाकी है। ऐसे में विद्युतीकरण से अछूते रह गए मोहल्ले के उपभोक्ता विभाग की इस कार्यशैली से खासे नाराज हैं।
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बजट खत्म काम खत्म
आरएपीडीआरपी योजना के लिए केंद्र से प्रस्तावित बजट में 25 प्रतिशत की कटौती किए जाने से कुछ मोहल्ले विद्युतीकरण से अछूते रह गए हैं। ऐसे में जब बजट खत्म हो गया है तो काम भी खत्म हो गया है। आगे बजट मिलेगा तो काम कराया जाएगा।
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पंकज शर्मा
एक्सईएन, विद्युत