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महंगाई ने थाली से छीना प्याज, बेस्वाद हुआ खाना
Auraiya
Updated Sat, 26 Oct 2013 05:41 AM IST
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औरैया। आम लोगों की थालियों में सजने वाला प्याज अब महंगाई के चलते दूर होता दिख रहा है। खुले बाजार में प्याज की आसमान छूती कीमतें लोगों के खाने के मजे को किरकिरा कर रही है। 80 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहे प्याज को खरीदने वाले भी केवल देखकर ही संतुष्टि कर रहे हैं और सरकार को कोसते नजर आ रहे हैं।
थोक मंडी में 65 से 70 रुपये प्रतिकिलो के भाव से बिक रहा प्याज खुले बाजार में पहुंचते-पहुंचते 80 से 100 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। इससे मंहगाई के इस दौर में आम आदमी प्याज के लिए तरसता दिखाई दे रहा है। प्याज की बढ़ती कीमत को जहां आढ़ती आवक को कारण बता रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इसे बड़े आढ़तियों द्वारा भंडारण किए जाने से हो रही समस्या बता रहे हैं। थोक आढ़ती भूरे खां ने बताया कि पहले उनकी आढ़त पर प्याज की जबरदस्त आवक होती थी। 30-40 रुपये का भाव होने के कारण और कम खपत के चलते प्याज खराब भी हो जाता था। इस बार आवक के हिसाब से प्याज की मांग बढ़ी है लेकिन कीमत में दो गुने से भी ज्यादा बढ़ोत्तरी होने से लोग केवल देखकर ही काम चला रहे हैं। वहीं रशीद खां ने बताया कि नासिक से आने वाले प्याज की बढ़ती कीमत का कारण बड़े आढ़तियों द्वारा गोदामों में भंडारण किया जाना है। जिससे उन लोगों तक प्याज जरुरत के मुताबिक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। माल कम आने और खर्चा अधिक पड़ने से प्याज के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं खुले बाजार में प्याज बेंचने वाले राजू ने बताया कि खरीददार तो आते हैं लेकिन ज्यादातर लोग दाम पूछने के बाद मंहगा बताकर बिना लिए ही लौट जाते हैं। जबकि कुछ लोग जो कभी एक-दो किलो ले जाते थे आज मंहगाई देखते हुए एक पाव से ही काम चला रहे हैं। घरेलू महिला मालती ने बताया कि प्याज के बढ़ते दामों के चलते उनकी रसोई से प्याज गायब हो गया है। ऐसे में बिना प्याज के खाने में भी मजा नहीं आता। रागिनी बताती हैं कि खाने में प्याज न हो तो खाने का पूरा मजा किरकिरा हो जाता है। मंहगाई के चलते अब उनके घर में एक पाव प्याज से ही दो-तीन दिनों तक काम चलाया जाता है। दिनों दिन बढ़ती प्याज की कीमत ने आम लोगों के खाने को बेस्वाद कर दिया है। इससे लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश दिखाई दे रहा है।
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थोक मंडी में 65 से 70 रुपये प्रतिकिलो के भाव से बिक रहा प्याज खुले बाजार में पहुंचते-पहुंचते 80 से 100 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। इससे मंहगाई के इस दौर में आम आदमी प्याज के लिए तरसता दिखाई दे रहा है। प्याज की बढ़ती कीमत को जहां आढ़ती आवक को कारण बता रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इसे बड़े आढ़तियों द्वारा भंडारण किए जाने से हो रही समस्या बता रहे हैं। थोक आढ़ती भूरे खां ने बताया कि पहले उनकी आढ़त पर प्याज की जबरदस्त आवक होती थी। 30-40 रुपये का भाव होने के कारण और कम खपत के चलते प्याज खराब भी हो जाता था। इस बार आवक के हिसाब से प्याज की मांग बढ़ी है लेकिन कीमत में दो गुने से भी ज्यादा बढ़ोत्तरी होने से लोग केवल देखकर ही काम चला रहे हैं। वहीं रशीद खां ने बताया कि नासिक से आने वाले प्याज की बढ़ती कीमत का कारण बड़े आढ़तियों द्वारा गोदामों में भंडारण किया जाना है। जिससे उन लोगों तक प्याज जरुरत के मुताबिक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। माल कम आने और खर्चा अधिक पड़ने से प्याज के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं खुले बाजार में प्याज बेंचने वाले राजू ने बताया कि खरीददार तो आते हैं लेकिन ज्यादातर लोग दाम पूछने के बाद मंहगा बताकर बिना लिए ही लौट जाते हैं। जबकि कुछ लोग जो कभी एक-दो किलो ले जाते थे आज मंहगाई देखते हुए एक पाव से ही काम चला रहे हैं। घरेलू महिला मालती ने बताया कि प्याज के बढ़ते दामों के चलते उनकी रसोई से प्याज गायब हो गया है। ऐसे में बिना प्याज के खाने में भी मजा नहीं आता। रागिनी बताती हैं कि खाने में प्याज न हो तो खाने का पूरा मजा किरकिरा हो जाता है। मंहगाई के चलते अब उनके घर में एक पाव प्याज से ही दो-तीन दिनों तक काम चलाया जाता है। दिनों दिन बढ़ती प्याज की कीमत ने आम लोगों के खाने को बेस्वाद कर दिया है। इससे लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश दिखाई दे रहा है।
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