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आजादी के 69 साल बाद भी बिजली को तरस रहे ग्रामीण
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Tue, 09 Aug 2016 12:32 AM IST
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Power cut leads 21 die in Hyderabad govt hospital as staff blame
- फोटो : demo
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कुछ दिनों बाद ही हम आजादी की 69वीं वर्षगांठ मनाएंगे। लेकिन आजादी के इतने सालों बाद भी जिले के कई गांवों को मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं हो पाई हैं। एक ओर जहां स्मार्ट विलेज बनाने की पहल हो रही है वहीं कुछ गांव ऐसे है जिनके लिए बल्ब की रौशनी आज तक सपना बनी हुई है। हालत यह है कि संचार क्रांति के युग में इन गांव के लोगों के पास मोबाइल तो है, मगर उसकी बैटरी चार्ज करने के लिए कस्बों में जाना पड़ता है।
अजीतमल तहसील क्षेत्र के गांव उम्मेदपुर, खुशालपुर, रसूलपुर, सुजानपुर ऐसे गांव हैं जो तहसील क्षेत्र से महज पांच किलोमीटर के दायरे में हैं। इसके बावजूद विकास की किरण इन गांवों का रास्ता भूल गई। आजादी के बाद से ही इन गांव में बिजली आना एक सपना बना है। गांव के लोग रात के अंधेरे में आस पास बिजली की चकाचौंध देखकर खुद के गांव को कोसते हैं। आजादी के बाद से प्रत्येक चुनाव में इन गांवों में बिजली पहुंचाने का मुद्दा प्रत्याशियों के पास रहा। मगर चुनाव के बाद किसी ने मुढ़कर नही देखा।
कनेक्शन हो गए थे, पोल आज तक नही लगे
साल 2008 में गांव उम्मेदपुर में विभाग ने बिजली कनेक्शन देना शुरू किया था। इससे लोगों को उम्मीद थी कि जल्द गांव में बिजली आ जाएगी। 13 लोगों ने कनेक्शन भी करवा लिए थे। इसके बाद आठ साल बीत गए लेकिन विभाग पोल तक नही लगा सका। उम्मेदपुर निवासी शंकर, विनोद सिंह, राजेंद्र राजपूत, रामकुमार आदि ने बताया कि ऐसी हालत में उन्होंने अपने कनेक्शन कटवा लिए।
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झलका युवाओं का दर्द
उम्मेदपुर के युवा भानु प्रताप ने बताया कि सरकारें विकास की बड़ी-बड़ी बातें कर रही हैं। मगर अभी तक सभी गांवों में बिजली तक नही पहुंचा पा रही है।
उम्मेदपुर के युवा जितेंद्र कुमार ने बताया कि कंप्यूटर युग में बिजली आज भी सपना है। हम लोग संचार क्रांति की बात कर रहे हैं। ऐसे में बिना बिजली की यह सभी बातें कोरी ही है।
खुशलापुर निवासी श्याम सिंह ने बताया कि पड़ोस के गांव में बिजली जलते देख कुंठा होती है। यह कैसा विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि विकास होता तो सभी गांव में बिजली आ जाती।
रसूलपुर निवासी राहुल कुमार ने बताया कि उन लोगो को मोबाइल तक चार्ज करने के लिए पड़ोस के गांवो में या कस्बों में जाना पड़ता है। इसके बावजूद कोई भी अधिकारी उनकी समस्या को देखने वाला नही है।
गांवों में बिजली के लिए रूपरेखा तैयार कर ली गई है। जिन गांव में विद्युतीकरण नही हुआ है। वहां पर चरणबद्ध तरह से काम करके विद्युतीकरण कराया जाएगा।
नीरज गर्ग, एसडीओ
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अजीतमल तहसील क्षेत्र के गांव उम्मेदपुर, खुशालपुर, रसूलपुर, सुजानपुर ऐसे गांव हैं जो तहसील क्षेत्र से महज पांच किलोमीटर के दायरे में हैं। इसके बावजूद विकास की किरण इन गांवों का रास्ता भूल गई। आजादी के बाद से ही इन गांव में बिजली आना एक सपना बना है। गांव के लोग रात के अंधेरे में आस पास बिजली की चकाचौंध देखकर खुद के गांव को कोसते हैं। आजादी के बाद से प्रत्येक चुनाव में इन गांवों में बिजली पहुंचाने का मुद्दा प्रत्याशियों के पास रहा। मगर चुनाव के बाद किसी ने मुढ़कर नही देखा।
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कनेक्शन हो गए थे, पोल आज तक नही लगे
साल 2008 में गांव उम्मेदपुर में विभाग ने बिजली कनेक्शन देना शुरू किया था। इससे लोगों को उम्मीद थी कि जल्द गांव में बिजली आ जाएगी। 13 लोगों ने कनेक्शन भी करवा लिए थे। इसके बाद आठ साल बीत गए लेकिन विभाग पोल तक नही लगा सका। उम्मेदपुर निवासी शंकर, विनोद सिंह, राजेंद्र राजपूत, रामकुमार आदि ने बताया कि ऐसी हालत में उन्होंने अपने कनेक्शन कटवा लिए।
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झलका युवाओं का दर्द
उम्मेदपुर के युवा भानु प्रताप ने बताया कि सरकारें विकास की बड़ी-बड़ी बातें कर रही हैं। मगर अभी तक सभी गांवों में बिजली तक नही पहुंचा पा रही है।
उम्मेदपुर के युवा जितेंद्र कुमार ने बताया कि कंप्यूटर युग में बिजली आज भी सपना है। हम लोग संचार क्रांति की बात कर रहे हैं। ऐसे में बिना बिजली की यह सभी बातें कोरी ही है।
खुशलापुर निवासी श्याम सिंह ने बताया कि पड़ोस के गांव में बिजली जलते देख कुंठा होती है। यह कैसा विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि विकास होता तो सभी गांव में बिजली आ जाती।
रसूलपुर निवासी राहुल कुमार ने बताया कि उन लोगो को मोबाइल तक चार्ज करने के लिए पड़ोस के गांवो में या कस्बों में जाना पड़ता है। इसके बावजूद कोई भी अधिकारी उनकी समस्या को देखने वाला नही है।
गांवों में बिजली के लिए रूपरेखा तैयार कर ली गई है। जिन गांव में विद्युतीकरण नही हुआ है। वहां पर चरणबद्ध तरह से काम करके विद्युतीकरण कराया जाएगा।
नीरज गर्ग, एसडीओ