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औरैयाः बारिश में डूबी 300 एकड़ फसल, किसान हुए चिंतित

Tue, 09 Aug 2022 12:07 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 09 Aug 2022 12:07 AM IST
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300 acres of crop submerged in rain, farmers worried
खेतों में भरा बारिश का पानी। - फोटो : AURAIYA
कंचौसी। क्षेत्र के जमौली, कंचौसी, बिहारीपुर और घसा का पुरवा के किसानों की तीन सौ एकड़ फसल बारिश के पानी में डूब गई। खेतों के आसपास से होकर निकले सिंचाई विभाग का नाले साफ न होने से पानी नहीं निकल सका। फसल बर्बाद होती देख किसान चिंतित हैं।
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खेत में खरीफ की फसल धान, बाजरा, ज्वार, मक्का, लौकी, तरोई तैयार की जा रही है। कंचौसी क्षेत्र के किसानों ने भी काफी क्षेत्रफल में धान, बाजरा, मक्का समेत अन्य फसलें बो रखी हैं। पिछले दो दिन हुई तेज बारिश से करीब तीन सौ एकड़ खेतों में बारिश का पानी भर गया। जिससे सभी फसलें डूब गईं। किसान जलनिकासी को लेकर तमाम कोशिशें करते रहे, लेकिन खेतों के पास से होकर गुजरे नाले चोक पड़े होने से खेत का पानी नहीं निकाला जा सका।
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यदि नाला साफ होता तो रुरवा होते हुए सेंगर नदी में पानी चला जाता। वहीं मंगलपुर माइनर में बहाव अधिक होने के कारण पानी ओवरफ्लो हो रहा है। किसानों ने माइनर को पीछे से बंद कर खेतों का पानी निकाले जाने की मांग की है। किसान राजू प्रताप, रमाकांत, सूरजनाथ, सुमन तिवारी, महबूब अली, इरशाद, मुकीम अली, श्रीकृष्ण, सुदामा प्रसाद आदि ने बताया कि जल्द पानी नहीं निकला तो धान की कुछ फसल छोड़ कर सभी फसलें बर्बाद हो जाएंगी, जिससे किसानों को लाखों का नुकसान होगा।
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जमौली निवासी किसान महेश चंद्र ने बताया कि महंगा डीजल लेकर पंपिंग सेट से खेत में पानी भर कर बाजरा, मक्का व धान की फसल बोई थी। दो दिन से खेतों में पानी भरा हुआ है, जल्द पानी न निकला तो फसल बर्बाद हो जाएगी। सिंचाई विभाग से कई बार मांग करने के बाद भी खेत के पास से निकले नाले को साफ नहीं कराया गया।
ढिकियापुर के किसान अतर सिंह ने बताया कि तीन सौ से पांच सौ रुपये किलो से दर से बीज खरीद कर बाजरा खेतों में बोया है। जुताई कर किसानों ने रुपये खर्च करने के बाद फसलें लगाईं तो बारिश होने की वजह से वह डूब गई। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ता है। पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

सिंचाई विभाग दिबियापुर के जेई मनीष कुमार ने कहा कि खेतों में पानी भरने की जानकारी हुई है। इस पर मंगलपुर माइनर का बहाव पीछे से रोक दिया गया है। 10 से 12 घंटे के बाद यह पानी निकल सकेगा। बजट के अभाव में नालों व माइनरों की सफाई नहीं हो सकी है।

 किसान महेश चंद्र

किसान महेश चंद्र- फोटो : AURAIYA

 किसान अतर सिंह

किसान अतर सिंह- फोटो : AURAIYA

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