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खुले रुपये नहीं मिले तो नहीं मिला इलाज, मौत
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Wed, 16 Nov 2016 11:54 PM IST
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केंद्र सरकार का नोटबंदी का फैसला अब लोगों की जान पर भी बन रहा है। थाना क्षेत्र के एक गांव लोहर्रा में एक ग्रामीण को खून की उल्टी होने पर परिजन खुले नोट न होने की वजह से उसे उपचार के लिए बाहर ना ले जा सके। रात को उसकी मौत हो गई। परिजन अपने प्रिय की मौत के लिए नोटबंदी के फैसले को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
मंडी धनौरा के लोहर्रा गांव निवासी राजपाल सिंह पुत्र तुुलाराम उम्र 55 साल कुछ समय से बीमार चल रहे थे। मंगलवार की शाम अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। परिजन उनको तत्काल धनौरा के एक अस्पताल में लाए। चिकित्सक ने स्थिति देखते ही उनको बाहर ले जाने की सलाह दी। चिकित्सक की सलाह सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उनके पास केंद्र सरकार द्वारा अमान्य किए गए सिर्फ 500 व 1000 के नोट ही थे। पुत्र कुलदीप ने बताया कि पिता के इलाज के लिए वे गांव के कई लोगों के पास गए ताकि 100 व 50 के नोट मिल जाएं। लेकिन सभी ने नोट होने से इंकार कर दिया। निकटवर्ती प्रथमा बैंक की शाखा में पिछले कई दिन से कैश न होने की वजह से किसी को भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। परिजन राजपाल सिंह को उपचार के लिए बाहर नहीं ले जा सके। बुधवार की तड़के उनकी मौत हो गई। कुलदीप व अन्य परिजन नोटबंदी को जमकर कोस रहे थे।
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मंडी धनौरा के लोहर्रा गांव निवासी राजपाल सिंह पुत्र तुुलाराम उम्र 55 साल कुछ समय से बीमार चल रहे थे। मंगलवार की शाम अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। परिजन उनको तत्काल धनौरा के एक अस्पताल में लाए। चिकित्सक ने स्थिति देखते ही उनको बाहर ले जाने की सलाह दी। चिकित्सक की सलाह सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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उनके पास केंद्र सरकार द्वारा अमान्य किए गए सिर्फ 500 व 1000 के नोट ही थे। पुत्र कुलदीप ने बताया कि पिता के इलाज के लिए वे गांव के कई लोगों के पास गए ताकि 100 व 50 के नोट मिल जाएं। लेकिन सभी ने नोट होने से इंकार कर दिया। निकटवर्ती प्रथमा बैंक की शाखा में पिछले कई दिन से कैश न होने की वजह से किसी को भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। परिजन राजपाल सिंह को उपचार के लिए बाहर नहीं ले जा सके। बुधवार की तड़के उनकी मौत हो गई। कुलदीप व अन्य परिजन नोटबंदी को जमकर कोस रहे थे।
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