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बिजनौर बैराज से गंगा में छोड़ा गया पानी मचा रहा तबाही
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गजरौला के दारानगर में घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी।
- फोटो : JPNAGAR
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गजरौला। बिजनौर बैराज से रोजाना गंगा में छोड़ा जा रहा लाखों क्यूसेक पानी तबाही मचा रहा है। खादर के इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया है। गंगा किनारे और टापू में बसे गांव भी जल मग्न हो गए हैं। हजारों एकड़ फसल पानी में डूब गई है। बेमौसम बाढ़ के चलते ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। प्रशासन भी अलर्ट हो गया है।
बाढ़ सीजन 15 अक्तूबर को खत्म होने के बाद 17 अक्तूबर से गंगा में दोबारा पानी बढ़ने लगा। सोमवार को गंगा में 39 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया। साथ ही उसी दिन और एक दिन पहले मूसलाधार बारिश भी हुई थी। जिसके चलते गंगा का जल स्तर 198.75 मीटर से बढ़कर 199.65 मीटर हो गया था। दो दिन में 90 सेंटीमीटर पानी बढ़ जाने से गंगा में उफान आ गया था। इसके बाद मंगलवार को बिजनौर बैराज से एक लाख 20 हजार क्यूसेक और बुधवार को दो लाख 70 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बृहस्पतिवार को बिजनौर बैराज से गंगा में एक लाख 27 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। चार दिन में पांच लाख 56 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाने के कारण गंगा दोबारा उफान पर है। जिससे गंगा के टापू में बसे शीशों वाली, ढाकों वाली, दारानगर जलमग्न हो गए हैं।
गंगा की दूसरी तरफ बसे लठीरा व फरीदपुर में भी बाढ़ का पानी भर गया है। हजारों एकड़ फसल पानी में डूब गई है। बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान धान और उड़द की फसल को हो रहा है। धान पक कर तैयार है। जिन किसानों ने फसल को काट लिया था, लेकिन उठाया नहीं था, उनकी फसल को बाढ़ में बह जाने की आशंका है। उड़द भी पकने के कगार पर है। इसके अलावा गन्ने के लिए भी बाढ़ काफी नुकसान दायक है। दारानगर के सचिन कुमार, मंगत सिंह, लठीरा के प्रधानपति पपेश कुमार का कहना है कि बाढ़ का पानी गांव में भर गया है। इस समय बाढ़ से हर फसल को नुकसान है।
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बिजनौर बैराज से गंगा में एक लाख 27 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। गंगा में छोड़ा पानी खेतों में भर गया है। टापू में बसे गांव जलमग्न हो गए हैं। अभी और भी पानी छोड़े जाने की संभावना है -अनवार बहादुर खान, जेई बाढ़ खंड तिगरी
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बाढ़ सीजन 15 अक्तूबर को खत्म होने के बाद 17 अक्तूबर से गंगा में दोबारा पानी बढ़ने लगा। सोमवार को गंगा में 39 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया। साथ ही उसी दिन और एक दिन पहले मूसलाधार बारिश भी हुई थी। जिसके चलते गंगा का जल स्तर 198.75 मीटर से बढ़कर 199.65 मीटर हो गया था। दो दिन में 90 सेंटीमीटर पानी बढ़ जाने से गंगा में उफान आ गया था। इसके बाद मंगलवार को बिजनौर बैराज से एक लाख 20 हजार क्यूसेक और बुधवार को दो लाख 70 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बृहस्पतिवार को बिजनौर बैराज से गंगा में एक लाख 27 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। चार दिन में पांच लाख 56 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाने के कारण गंगा दोबारा उफान पर है। जिससे गंगा के टापू में बसे शीशों वाली, ढाकों वाली, दारानगर जलमग्न हो गए हैं।
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गंगा की दूसरी तरफ बसे लठीरा व फरीदपुर में भी बाढ़ का पानी भर गया है। हजारों एकड़ फसल पानी में डूब गई है। बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान धान और उड़द की फसल को हो रहा है। धान पक कर तैयार है। जिन किसानों ने फसल को काट लिया था, लेकिन उठाया नहीं था, उनकी फसल को बाढ़ में बह जाने की आशंका है। उड़द भी पकने के कगार पर है। इसके अलावा गन्ने के लिए भी बाढ़ काफी नुकसान दायक है। दारानगर के सचिन कुमार, मंगत सिंह, लठीरा के प्रधानपति पपेश कुमार का कहना है कि बाढ़ का पानी गांव में भर गया है। इस समय बाढ़ से हर फसल को नुकसान है।
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बिजनौर बैराज से गंगा में एक लाख 27 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। गंगा में छोड़ा पानी खेतों में भर गया है। टापू में बसे गांव जलमग्न हो गए हैं। अभी और भी पानी छोड़े जाने की संभावना है -अनवार बहादुर खान, जेई बाढ़ खंड तिगरी

गजरौला क्षेत्र में पानी के बीच से निकलते महिला, पुरुष व बालक।- फोटो : JPNAGAR