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Amroha News: आधी अधूरी तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू
Wed, 06 Nov 2024 02:03 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Wed, 06 Nov 2024 02:03 AM IST
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गजरौला। तिगरीधाम गंगा मेला शुरू होने में पांच दिन बचे हैं और श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। लेकिन मेले की तैयारियां अभी अधूरी हैं। सड़क बनाने का काम पूरा नहीं हो सका। जो सड़क बन गई हैं, उनमें वाहन फंस रहे हैं। शिविर लगाने और स्नान के लिए घाट बनाने का काम पूरा नहीं हुआ है।
11 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर तिगरी गंगा मेले का विधि विधान से पूजन कर शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान गंगा मैया के जल में दुग्धाभिषेक कर अपना आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की जाएगी। मेला पूजन में पांच दिन बचे हैं। इसलिए मेले में दुकानदार अपना सामान लेकर पहुंचने लगे हैं। श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए झूले, हिंडोला व नाव, मौत का कुआं आदि साधन तैयार हो गए, मगर हैरत की बात यह है कि अभी तक श्रद्धालुओं के लिए अति आवश्यक सुविधाएं अधूरी हैं। डीएम के तमाम निर्देशों के बाद भी सड़क बनाने का काम पूरा नहीं हो सका है। ट्रैक्टर रोड इस तरह बनाई गई है कि उस पर वाहन फंस रहे हैं। सड़क के बीच नाली दिखाई दे रही हैं। शिविर बनाने के लिए टेंट भी कम पड़ गए। एडीएम न्यायिक माया शंकर यादव का कहना है कि सोमवार शाम टेंट खत्म हो गए थे। टिन की चादर भी कम पड़ गईं। ठेकेदार को हिदायत दी गई कि पर्याप्त संख्या में टेंट व टिन की चादर मंगाए। जिससे तैयारियां प्रभावित न हों।
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11 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर तिगरी गंगा मेले का विधि विधान से पूजन कर शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान गंगा मैया के जल में दुग्धाभिषेक कर अपना आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की जाएगी। मेला पूजन में पांच दिन बचे हैं। इसलिए मेले में दुकानदार अपना सामान लेकर पहुंचने लगे हैं। श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए झूले, हिंडोला व नाव, मौत का कुआं आदि साधन तैयार हो गए, मगर हैरत की बात यह है कि अभी तक श्रद्धालुओं के लिए अति आवश्यक सुविधाएं अधूरी हैं। डीएम के तमाम निर्देशों के बाद भी सड़क बनाने का काम पूरा नहीं हो सका है। ट्रैक्टर रोड इस तरह बनाई गई है कि उस पर वाहन फंस रहे हैं। सड़क के बीच नाली दिखाई दे रही हैं। शिविर बनाने के लिए टेंट भी कम पड़ गए। एडीएम न्यायिक माया शंकर यादव का कहना है कि सोमवार शाम टेंट खत्म हो गए थे। टिन की चादर भी कम पड़ गईं। ठेकेदार को हिदायत दी गई कि पर्याप्त संख्या में टेंट व टिन की चादर मंगाए। जिससे तैयारियां प्रभावित न हों।
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