{"_id":"68f54798841c70713201a922","slug":"the-accused-in-the-cheque-bounce-case-was-sentenced-to-six-months-imprisonment-and-a-fine-of-rs-10-lakh-jpnagar-news-c-284-1-smbd1013-150051-2025-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: चेक बाउंस के मामले में दोषी को छह महीने की सजा, 10 लाख का जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: चेक बाउंस के मामले में दोषी को छह महीने की सजा, 10 लाख का जुर्माना
विज्ञापन
अमरोहा। चेक बाउंस के मामले में न्यायालय ने दोषी को छह महीने की सजा सुनाई है। साथ ही दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। दोषी ने उधार लिए नौ लाख रुपये के बदले चेक दिया था जो बाउंस हो गया था।
अमरोहा नगर के मोहल्ला गश्तियान में विनय कुमार बाहेती का परिवार रहता है। उनका आरोप है कि मोहल्ला मंडी चौक के रहने वाले मनोज रस्तोगी से पारिवारिक संबंध थे। व्यवसाय की जरूरत के लिए मनोज रस्तोगी ने चेक के माध्यम से नौ लाख रुपये उधार लिए थे। यह धनराशि साल 2017 से 2019 तक दी गई थी। इसके बाद विनय कुमार ने अपने रुपयों का तगाजा किया तो मनोज रस्तोगी टालमटोल करने लगे। बाद में कोरोना का बहाना बनाकर टाल दिया। 26 दिसंबर 2022 को विनय कुमार मनोज रस्तोगी के प्रतिष्ठान पर गए तो उन्होंने एक चेक दे दिया। जिसमें मनोज कुमार रस्तोगी की सहमति से विनय कुमार ने नौ लाख रुपये की धनराशि अपने नाम से भर ली। बाद में चेक को बैंक ऑफ बड़ोदा के खाते में लगा दिया लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण बैंक ने चेक वापस कर दिया। इसके बाद 23 जनवरी 2023 को विनय कुमार ने दोबारा से चेक को खाते में लगाया तो बैंक ने चेक बाउंस करके वापस कर दिया। इसके बाद पीड़ित विनय कुमार ने न्यायालय की शरण ली। इस मुकदमे की सुनवाई प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रही थी। मामले में न्यायालय ने मनोज रस्तोगी को तलब कर लिया। 16 अक्तूबर 2025 को न्यायालय ने मुकदमा में आखिरी सुनवाई की और साक्ष्यों व सबूतों के आधार पर मनोज रस्तोगी को दोषी पाया। साथ ही उन्हें छह महीने की सजा सुनाई और दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि पीड़ित विनय कुमार को 9.90 लाख रुपये देने होंगे। जबकि दस हजार रुपये की धनराशि राज्य निधि में जमा होगी।
विज्ञापन
अमरोहा नगर के मोहल्ला गश्तियान में विनय कुमार बाहेती का परिवार रहता है। उनका आरोप है कि मोहल्ला मंडी चौक के रहने वाले मनोज रस्तोगी से पारिवारिक संबंध थे। व्यवसाय की जरूरत के लिए मनोज रस्तोगी ने चेक के माध्यम से नौ लाख रुपये उधार लिए थे। यह धनराशि साल 2017 से 2019 तक दी गई थी। इसके बाद विनय कुमार ने अपने रुपयों का तगाजा किया तो मनोज रस्तोगी टालमटोल करने लगे। बाद में कोरोना का बहाना बनाकर टाल दिया। 26 दिसंबर 2022 को विनय कुमार मनोज रस्तोगी के प्रतिष्ठान पर गए तो उन्होंने एक चेक दे दिया। जिसमें मनोज कुमार रस्तोगी की सहमति से विनय कुमार ने नौ लाख रुपये की धनराशि अपने नाम से भर ली। बाद में चेक को बैंक ऑफ बड़ोदा के खाते में लगा दिया लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण बैंक ने चेक वापस कर दिया। इसके बाद 23 जनवरी 2023 को विनय कुमार ने दोबारा से चेक को खाते में लगाया तो बैंक ने चेक बाउंस करके वापस कर दिया। इसके बाद पीड़ित विनय कुमार ने न्यायालय की शरण ली। इस मुकदमे की सुनवाई प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रही थी। मामले में न्यायालय ने मनोज रस्तोगी को तलब कर लिया। 16 अक्तूबर 2025 को न्यायालय ने मुकदमा में आखिरी सुनवाई की और साक्ष्यों व सबूतों के आधार पर मनोज रस्तोगी को दोषी पाया। साथ ही उन्हें छह महीने की सजा सुनाई और दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि पीड़ित विनय कुमार को 9.90 लाख रुपये देने होंगे। जबकि दस हजार रुपये की धनराशि राज्य निधि में जमा होगी।
विज्ञापन