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पांच माह में सिर्फ 16 बच्चे ही हुए स्वस्थ
ब्यूरो/अमर उजाला, अमरोहा
Updated Thu, 21 Apr 2016 01:01 AM IST
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प्रदेश सरकार ने कुपोषण से जंग लड़ने के लिए एक नवंबर 2015 में राज्य पोषण मिशन का हथियार लेकर मातहतों को मैदान में उतारा था। इसके तहत 0 से 5 वर्ष तक के नौनिहालों को कुपोषण से बचाने, कुपोषित व गंभीर कुपोषितों को चिह्नित कर उन्हें पोषाहार दिलाने, गंभीर कुपोषितों को पोषण एवं पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराकर कुपोषण मुक्त किया जाना था।
जिलेभर में अभियान चलाकर एक लाख 53 हजार बच्चों का वजन कराया गया। इसमें करीब 21 हजार आंशिक और 9200 बच्चे गंभीर कुपोषित पाए गए। इस दरम्यान जिला अस्पताल में एनआरसी की स्थापना की गई। लेकिन शुरू से मार्च माह तक महज 48 बच्चों को एनआरसी तक लाया जा सका, लेकिन 16 बच्चे की स्वस्थ होकर एनआरसी से बाहर निकले। बाकी बीच में इलाज छोड़कर चलते बने। इधर, बाल कल्याण एवं पुष्टाहार विभाग की लापरवाही के कारण हजारों गंभीर कुपोषितों को एनआरसी तक नहीं लाया जा सका। जबकि, इन बच्चों को एनआरसी तक भेजने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सौंपी गई थी।
550 आंशिक कुपोषितों को ही मिला लाभ
अमरोहा। जिले में करीब 21 हजार आंशिक कुपोषित बच्चे भी मिले। इन्हें पुष्टाहार देकर स्वस्थ किया जा सकता है। लेकिन बाल एवं पुष्टाहार विभाग पांच माह में कुल 550 आंशिक कुपोषण भगाने में कामयाब रहा। हजारों बच्चे अभी भी आंशिक कुपोषण का शिकार है। यह आंकड़ा देखकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की लापरवाही साफ झलक रही है। यदि आंशिक कुपोषण समय से दूर नहीं किया गया तो बच्चे के गंभीर कुपोषण की श्रेणी में शामिल होते देर नहीं लगेगी।
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-गंभीर कुपोषितों के इलाज के लिए एनआरसी में हर सुविधा है। करीब दो सप्ताह तक बच्चे केंद्र में रखा जाता है। बच्चे की माता को पोषित भोजन देने की जानकारी दी जाती है। अब तक 48 बच्चों को ही यहां लाया गया। 16 बच्चे ही पूरे समय अस्पताल में भर्ती रहे और वह स्वस्थ्य होकर यहां से गए हैं। लेकिन, बाकी बच्चों के अभिभावकों को यह नहीं बताया गया कि एनआरसी में बच्चे को कितने समय तक भर्ती कराया जाना है। शेष अभिभावक दो-तीन दिन में ही बच्चे को लेकर चले गए। यह लापरवाही सरासर आंगनबाड़ी, एएनएम और आशा कार्यकत्री की है।
-डा.प्रवीण कुमार बंसल, सीएमएस जिला संयुक्त चिकित्सालय
-
-आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंशिक कुपोषित बच्चों को नियमानुसार और समय से पुष्टाहार दिया जा रहा है। अब तक 550 बच्चों को लाभ हुआ है।-तरुण वर्मा जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिलेभर में अभियान चलाकर एक लाख 53 हजार बच्चों का वजन कराया गया। इसमें करीब 21 हजार आंशिक और 9200 बच्चे गंभीर कुपोषित पाए गए। इस दरम्यान जिला अस्पताल में एनआरसी की स्थापना की गई। लेकिन शुरू से मार्च माह तक महज 48 बच्चों को एनआरसी तक लाया जा सका, लेकिन 16 बच्चे की स्वस्थ होकर एनआरसी से बाहर निकले। बाकी बीच में इलाज छोड़कर चलते बने। इधर, बाल कल्याण एवं पुष्टाहार विभाग की लापरवाही के कारण हजारों गंभीर कुपोषितों को एनआरसी तक नहीं लाया जा सका। जबकि, इन बच्चों को एनआरसी तक भेजने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सौंपी गई थी।
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550 आंशिक कुपोषितों को ही मिला लाभ
अमरोहा। जिले में करीब 21 हजार आंशिक कुपोषित बच्चे भी मिले। इन्हें पुष्टाहार देकर स्वस्थ किया जा सकता है। लेकिन बाल एवं पुष्टाहार विभाग पांच माह में कुल 550 आंशिक कुपोषण भगाने में कामयाब रहा। हजारों बच्चे अभी भी आंशिक कुपोषण का शिकार है। यह आंकड़ा देखकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की लापरवाही साफ झलक रही है। यदि आंशिक कुपोषण समय से दूर नहीं किया गया तो बच्चे के गंभीर कुपोषण की श्रेणी में शामिल होते देर नहीं लगेगी।
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-गंभीर कुपोषितों के इलाज के लिए एनआरसी में हर सुविधा है। करीब दो सप्ताह तक बच्चे केंद्र में रखा जाता है। बच्चे की माता को पोषित भोजन देने की जानकारी दी जाती है। अब तक 48 बच्चों को ही यहां लाया गया। 16 बच्चे ही पूरे समय अस्पताल में भर्ती रहे और वह स्वस्थ्य होकर यहां से गए हैं। लेकिन, बाकी बच्चों के अभिभावकों को यह नहीं बताया गया कि एनआरसी में बच्चे को कितने समय तक भर्ती कराया जाना है। शेष अभिभावक दो-तीन दिन में ही बच्चे को लेकर चले गए। यह लापरवाही सरासर आंगनबाड़ी, एएनएम और आशा कार्यकत्री की है।
-डा.प्रवीण कुमार बंसल, सीएमएस जिला संयुक्त चिकित्सालय
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-आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंशिक कुपोषित बच्चों को नियमानुसार और समय से पुष्टाहार दिया जा रहा है। अब तक 550 बच्चों को लाभ हुआ है।-तरुण वर्मा जिला कार्यक्रम अधिकारी