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धार्मिक गीतों पर नृत्य की प्रतिभा ने मनमोहा
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 24 Jul 2016 01:23 AM IST
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गजरौला के चामुंडा मंदिर में भागवत कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु।
- फोटो : amar ujala
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नगर के चामुंडा देवी मंदिर परिसर में चल रही श्री मद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर शनिवार को देवी-देवताओं की वेशभूषा में सजे कलाकारों ने धार्मिक गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति से समां बांध दिया। कलाकारों की प्रतिभा देख श्रद्धालु प्रभु भक्ति में लीन होकर झूम उठे। इस दौरान जयकारे भी गूंजते रहे। भक्ति का माहौल बन गया।
कथा मर्मज्ञ सत्यकाम कृष्ण गौर जी महाराज ने महाभारत काल में किये गए धर्म अधर्म का जिक्र करते हुए कहा कि सदाचारी व दुराचारी सतयुग में भी थे। आज कलियुग में भी हैं। सदाचारी व दुराचारियों का आकार बदल गया है। आज के दौर में मनुष्य की मनोदशा बदल गई है। महाराज जी ने अशवत्थामा द्वारा द्रोपदी के गर्भ में पल रहे नवजात को मारने के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया।
कथा के दौरान भजनों की छटा भी बिखेरी। राधा-कृष्ण आदि देवी-देवताओं के स्वरुप में सजे कलाकारों ने नृत्य की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को झूमने के लिए विवश कर दिया। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। चंद्रपाल सिंह, संतोष देवी, सौनेश्वरी देवी, जगवीरी, ऊषा माथुर, कमला त्यागी, हरवेंद्र सिंह, संतराज, रवि करन, कमल सिंह, धर्मेंद्र सिंह, वर्षा देवी, साहुल कौशिक, सुमित चौहान समेत तमाम श्रद्धालुओं की भागीदारी रही।
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कथा मर्मज्ञ सत्यकाम कृष्ण गौर जी महाराज ने महाभारत काल में किये गए धर्म अधर्म का जिक्र करते हुए कहा कि सदाचारी व दुराचारी सतयुग में भी थे। आज कलियुग में भी हैं। सदाचारी व दुराचारियों का आकार बदल गया है। आज के दौर में मनुष्य की मनोदशा बदल गई है। महाराज जी ने अशवत्थामा द्वारा द्रोपदी के गर्भ में पल रहे नवजात को मारने के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया।
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कथा के दौरान भजनों की छटा भी बिखेरी। राधा-कृष्ण आदि देवी-देवताओं के स्वरुप में सजे कलाकारों ने नृत्य की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को झूमने के लिए विवश कर दिया। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। चंद्रपाल सिंह, संतोष देवी, सौनेश्वरी देवी, जगवीरी, ऊषा माथुर, कमला त्यागी, हरवेंद्र सिंह, संतराज, रवि करन, कमल सिंह, धर्मेंद्र सिंह, वर्षा देवी, साहुल कौशिक, सुमित चौहान समेत तमाम श्रद्धालुओं की भागीदारी रही।
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