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हत्या को आत्महत्या साबित करना चाहते थे कातिल
अमर उजाला ब्यूरो/ अमरोहा/हसनपुर।
Updated Wed, 19 Oct 2016 12:27 AM IST
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अमरोहा के पोस्टमार्टम हाउस पर बैठे परिजन।
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दयावती व धर्मवती की हत्या को कातिलों ने आत्महत्या साबित करने का पूरा प्रयास किया था, लेकिन जिस पेड़ पर उनकी लाशें थीं, उसकी ऊंचाई को देखकर पुलिस कप्तान का माथा ठनक गया था। परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से लाशें जलाने का झूठ बोला था। उनकी उम्र तक छिपाई थी। इसलिए पुलिस अधिकारियों को दाल में काला नजर आया था और कप्तान ने लाशों को पीएम के लिए भिजवा दिया था।
हसनपुर के झुंडी माफी गांव में सगी बहनों दयावती व धर्मवती की लाशें फांसी पर लटकी मिली थीं। परिजनों ने उनको दफना दिया था, लेकिन जब गांव में सीओ व एसओ मौके पर पहुंचे तो परिजनों ने उनको जला देने की बात बताई थी। अगले दिन मसला सुर्खियों में बनते ही पुलिस अफसर भी हैरानी में पड़ गए। सच्चाई की तह तक पहुंचने के लिए खुद पुलिस कप्तान डा. एसएस चनप्पा गांव में पहुंच गए थे। इसके बाद उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया था। उन पेड़ों पर नजर दौड़ाई जहां पर लाशें लटकी होना बताया गया। पेड़ों की ऊंचाई देख कप्तान हैरत में पड़ गए। मन में सवाल उठा कि इतनी ऊंचाई पर आकर कोई आत्महत्या नहीं करेगा।
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इसके बाद परिजनों से बातचीत की तो लाश जलाने का नहीं बल्कि दफनाने का मसला खुल गया। कप्तान ने कई बिंदुओं पर जांच की और हत्या का मसला समझते हुए शव पीएम के लिए भिजवा दिए। पोस्टमार्टम में जो खुलासा हुआ वह वाकई चौंकाने वाला था। दोनों की हत्या की गई थी। कातिलों ने हत्या का ही आत्महत्या का रूप देने के लिए लाशों को फांसी पर लटकाने की कोशिश की थी।
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