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यौम ए आशूरा: कर्बला के मंजर बयां, तुरबते की मातम के साथ जियारत00
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अमरोहा।यौम ए आशूरा शुक्रवार को अकीदत के साथ मनाया गया। इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत पर रंज ओ गम का लोग डूबे रहे। काले लिबास में बच्चें, युवा और बुजुर्ग देखें गए। कर्बला के मंजर को याद कर लोगों ने जार ओ तार रोया। इमामबाड़ों में मजलिस में लोगों ने हिस्सा लिया। तुरबते की मातम कर जियारत किया। इसके अलावा कर्बला के शहीदों की याद में सीनाजनी की। शाम को अस्र के बाद नजर ओ नियाज में लोगों ने हाजिरी दी।
शुक्रवार को शहर का माहौल कर्बला के शहीदों की गम में डूबा रहा। इमामबाड़ों में सुबह से मजलिस शुरु हुई। कोविड संक्रमण की आशंका के चलते ताजिए का जुलूस नहीं निकाला गया। सबसे बड़ा ताजिया अजाखाना शफातपोता में सजाया गया। इमामबाड़ों में कर्बला की मिट्टी से बनी तस्बीह की जियारत मुसम्मात सुगरन में हुई। इससे पहले मजलिस में कर्बला की दास्तां बयां की गई। जिसमें कहा कि इंसानियत और सच बोलने वाले कभी नहीं भूलाए जाते। इमाम हुसैन का किरदार दुनिया के लिए मिसाल है। यजीद और उसकी फौज की जुल्म के आगे इमाम हुसैन और उनके साथी नहीं झुके। पानी के लिए नहरे फरात पर पहरा बिठा दिया गया। इससे मासूम बच्चे प्यास से बेहाल हो गए। हजरत अब्बास अपने जमाने के नामी योद्घा थे। जब वह पानी भरके चले तो दुश्मन के फौजियों ने उन पर हमला कर दिया। जुल्म की इंतिहा यह रही कि उन्होंने हाथ को काट दिए। शहर में विभिन्न जगहों के कार्यक्रम में मौलाना मुस्तफा वसीम, हसन शुजा, खुर्शीद हैदर जैदी, लियाकत अमरोहवी, जिया ऐजाज, मुजाहिद अब्बास, नदीम नकवी, डॉ. सईदुल हसन, शरफ अली खां, अमजद कमाल, तफजील नकवी , मोहम्मद फर्रूख, सईद परवेज, जर्रार हैदर, कमाल हैदर, कमर सिब्तैन, हसन इमाम, सुहैल मुर्तजा, वसीम जैदी, बशीर हैदर, हसीन हैदर, जॉन तकवी, हकीम सैयद हुसैन, आसिफ अंसार, गुलाम सज्जाद, अख्तर अब्बास, डॉ. चंदन नकवी, वसीम जैदी, मोहम्मद तकी, शाने मुज्तबा, हैदर जिया, डॉ. शारिक, नावेद असगर, शाने मेंहदी, हुसैनी, दायम रजा, शुऐब आदि रहे।
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शुक्रवार को शहर का माहौल कर्बला के शहीदों की गम में डूबा रहा। इमामबाड़ों में सुबह से मजलिस शुरु हुई। कोविड संक्रमण की आशंका के चलते ताजिए का जुलूस नहीं निकाला गया। सबसे बड़ा ताजिया अजाखाना शफातपोता में सजाया गया। इमामबाड़ों में कर्बला की मिट्टी से बनी तस्बीह की जियारत मुसम्मात सुगरन में हुई। इससे पहले मजलिस में कर्बला की दास्तां बयां की गई। जिसमें कहा कि इंसानियत और सच बोलने वाले कभी नहीं भूलाए जाते। इमाम हुसैन का किरदार दुनिया के लिए मिसाल है। यजीद और उसकी फौज की जुल्म के आगे इमाम हुसैन और उनके साथी नहीं झुके। पानी के लिए नहरे फरात पर पहरा बिठा दिया गया। इससे मासूम बच्चे प्यास से बेहाल हो गए। हजरत अब्बास अपने जमाने के नामी योद्घा थे। जब वह पानी भरके चले तो दुश्मन के फौजियों ने उन पर हमला कर दिया। जुल्म की इंतिहा यह रही कि उन्होंने हाथ को काट दिए। शहर में विभिन्न जगहों के कार्यक्रम में मौलाना मुस्तफा वसीम, हसन शुजा, खुर्शीद हैदर जैदी, लियाकत अमरोहवी, जिया ऐजाज, मुजाहिद अब्बास, नदीम नकवी, डॉ. सईदुल हसन, शरफ अली खां, अमजद कमाल, तफजील नकवी , मोहम्मद फर्रूख, सईद परवेज, जर्रार हैदर, कमाल हैदर, कमर सिब्तैन, हसन इमाम, सुहैल मुर्तजा, वसीम जैदी, बशीर हैदर, हसीन हैदर, जॉन तकवी, हकीम सैयद हुसैन, आसिफ अंसार, गुलाम सज्जाद, अख्तर अब्बास, डॉ. चंदन नकवी, वसीम जैदी, मोहम्मद तकी, शाने मुज्तबा, हैदर जिया, डॉ. शारिक, नावेद असगर, शाने मेंहदी, हुसैनी, दायम रजा, शुऐब आदि रहे।
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