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मनरेगा फर्जीवाड़ा : पंचायत सचिवों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
Tue, 20 May 2025 02:04 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 20 May 2025 02:04 AM IST
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अमरोहा। क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना और बहनोई गजनबी व अन्य परिवारों के सदस्यों को मनरेगा मजदूर दर्शाने के मामले में फंसे तत्कालीन पंचायत सचिवों पृथ्वी सिंह, अंजुम, हुमा परवीन की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने और कोर्ट में अगली सुनवाई होने तक गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। इससे पहले आरोपियों में शामिल तत्कालीन लेखाकार बिजेंद्र पाल की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी।
जोया ब्लॉक क्षेत्र के पलौला गांव में क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना की ससुराल है। शबीना की सास गुले आयशा ग्राम प्रधान हैं। गांव में शमी की बहन शबीना, बहनोई गजनबी और अन्य परिवार के सदस्यों समेत 18 लोगों को मनरेगा मजदूरी दिलाने के मामला सामने आया था। जांच के बाद तीन मार्च को जोया ब्लॉक बीडीओ लोकचंद ने तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी पृथ्वी सिंह, अंजुम, हुमा परवीन, तत्कालीन लेखाकार विजेंद्र सिंह, तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर मनरेगा शराफत अली, तकनीकी सहायक अजय निमेश, तत्कालीन एपीओ बृजभान सिंह और सेवा मुक्त ग्राम रोजगार सेवक झम्मन सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। सभी पर विश्वासघात करने का आरोप है। इस मामले में डीएम निधि गुप्ता वत्स तीनों पंचायत सचिव सहित सभी आठ कर्मचारियों के खिलाफ पहले ही निलंबन की कार्रवाई कर चुकी हैं।
इस मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव हुमा परवीन, अंजुम और पृथ्वी सिंह ने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। साथ ही गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए भी प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। जिसमें कहा कि पंचायत सचिव सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं, क्योंकि वह ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर हैं और वित्तीय सहायता प्राप्त श्रमिकों को वर्ष 2021-2022 के लिए जॉब कार्ड जारी करने के आरोप पूरी तरह से झूठे हैं।
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उन्होंने 18 जॉब कार्ड धारकों को 8,68,344 रुपये के भुगतान के आरोप से भी इन्कार किया। बताया कि पंचायत सचिवों ने न तो जॉब कार्ड तैयार किए और न जॉब कार्डधारकों को भुगतान के लिए रुपये स्वीकृत किए हैं। उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। तर्क दिया कि ब्लॉक में संबंधित मजदूरों को जॉब कार्ड जारी करने का काम रोजगार सेवक करता है, जिसे फिर ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित किया जाता है और फिर उच्चाधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जाता है।
अधिवक्ता इफ्तेखार सैफी ने बताया कि तीनों पंचायत सचिवों की रिट पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अगली तारीख तक या पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कहा है कि आरोपी पंचायत सचिवों को पुलिस की जांच में सहयोग करना होगा।
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जोया ब्लॉक क्षेत्र के पलौला गांव में क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना की ससुराल है। शबीना की सास गुले आयशा ग्राम प्रधान हैं। गांव में शमी की बहन शबीना, बहनोई गजनबी और अन्य परिवार के सदस्यों समेत 18 लोगों को मनरेगा मजदूरी दिलाने के मामला सामने आया था। जांच के बाद तीन मार्च को जोया ब्लॉक बीडीओ लोकचंद ने तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी पृथ्वी सिंह, अंजुम, हुमा परवीन, तत्कालीन लेखाकार विजेंद्र सिंह, तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर मनरेगा शराफत अली, तकनीकी सहायक अजय निमेश, तत्कालीन एपीओ बृजभान सिंह और सेवा मुक्त ग्राम रोजगार सेवक झम्मन सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। सभी पर विश्वासघात करने का आरोप है। इस मामले में डीएम निधि गुप्ता वत्स तीनों पंचायत सचिव सहित सभी आठ कर्मचारियों के खिलाफ पहले ही निलंबन की कार्रवाई कर चुकी हैं।
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इस मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव हुमा परवीन, अंजुम और पृथ्वी सिंह ने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। साथ ही गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए भी प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। जिसमें कहा कि पंचायत सचिव सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं, क्योंकि वह ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर हैं और वित्तीय सहायता प्राप्त श्रमिकों को वर्ष 2021-2022 के लिए जॉब कार्ड जारी करने के आरोप पूरी तरह से झूठे हैं।
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उन्होंने 18 जॉब कार्ड धारकों को 8,68,344 रुपये के भुगतान के आरोप से भी इन्कार किया। बताया कि पंचायत सचिवों ने न तो जॉब कार्ड तैयार किए और न जॉब कार्डधारकों को भुगतान के लिए रुपये स्वीकृत किए हैं। उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। तर्क दिया कि ब्लॉक में संबंधित मजदूरों को जॉब कार्ड जारी करने का काम रोजगार सेवक करता है, जिसे फिर ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित किया जाता है और फिर उच्चाधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जाता है।
अधिवक्ता इफ्तेखार सैफी ने बताया कि तीनों पंचायत सचिवों की रिट पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अगली तारीख तक या पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कहा है कि आरोपी पंचायत सचिवों को पुलिस की जांच में सहयोग करना होगा।