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एमडीए ने गजरौला में तीन साल से नहीं की फूटी कौड़ी भी खर्च
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गजरौला। एमडीए ने गजरौला में विकास कार्यों पर बीते तीन साल से एक भी रुपया खर्च नहीं किया, जबकि उसे तीन साल में 7362 भूखंड और भवनों के रजिस्ट्रेशन से विकास शुल्क के रूप में 13.53 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। औद्योगिक नगरी के लोगों का कहना है यहां की रकम से एमडीए दूसरे शहरों में विकास करा रहा है। लोग इसे औद्योगिक नगरी के नागरिकों के साथ एमडीए का अन्याय मान रहे हैं।
गजरौला औद्योगिक नगरी और उसके आस पास के कई गांवों का रकबा मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अधीन आता है। नगर और संबंधित गांवों के रकबे में कोई भी नया निर्माण कराने के लिए एमडीए से अनुमति लेना और उसका नक्शा पास कराना अनिवार्य है। जिससे एमडीए को अच्छी खासी आमदनी होती है। इसके अलावा कोई भूखंड खरीदने व बेचने, रजिस्ट्रेशन कराने से भी हर साल करोड़ों रुपये की आमदनी होती है। इस रकम की एक प्रतिशत धनराशि औद्योगिक नगरी में विकास कार्यों पर खर्च कराई जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वर्ष-2019 में गजरौला नगर पालिका क्षेत्र में 2353 रजिस्ट्री हुईं। जिनसे एमडीए को 3.69 करोड़ रुपये विकास शुल्क के रूप में मिला। वर्ष 2020 में 2257 का बैनामा होने पर 3.32 करोड़ रुपये विकास शुल्क और 2021 में 2752 रजिस्ट्री से 6.52 करोड़ रुपये विकास शुल्क के रूप में प्राप्त हुए। बीते तीन साल में 7362 की रजिस्ट्री से मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को 13.53 करोड़ रुपये की आमदनी विकास शुल्क के रूप में हुई, लेकिन इसके बावजूद एक भी रुपया गजरौला में विकास के नाम पर खर्च नहीं किया गया। इससे औद्योगिक नगरी के लोगों में खासा आक्रोश है। व्यापारी नेता सुबोध सिंघल, अधिवक्ता डा.रविंद्र शुक्ला, नवीन गर्ग, विजय शर्मा, संजय सिंह नागर, डॉ. नरेंद्र सिंह आदि नागरिकों का कहना है कि एमडीए हर साल गजरौला से करोड़ों रुपये की आय प्राप्त करने के बावजूद यहां पर विकास के नाम पर फूटी कौड़ी खर्च नहीं कर रहा है, यह गजरौला का दुर्भाग्य है। न तो कोई सड़क बनवाई और न ही किसी नाली या नाले का निर्माण कराया। यहां की कमाई दूसरे शहरों में खर्च की जा रही है।
कोट-
गजरौला में प्राधिकरण ने तीन साल से कोई विकास कार्य नहीं कराए। मास्टर प्लान लागू हो जाने के बाद गजरौला में विकास कार्य कराए जाएंगे। सड़क निर्माण से लेकर अन्य कार्य कराए जाएंगे।
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मनोज कुमार सिंह, अवर अभियंता मुरादाबाद विकास प्राधिकरण जोन-4
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गजरौला औद्योगिक नगरी और उसके आस पास के कई गांवों का रकबा मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अधीन आता है। नगर और संबंधित गांवों के रकबे में कोई भी नया निर्माण कराने के लिए एमडीए से अनुमति लेना और उसका नक्शा पास कराना अनिवार्य है। जिससे एमडीए को अच्छी खासी आमदनी होती है। इसके अलावा कोई भूखंड खरीदने व बेचने, रजिस्ट्रेशन कराने से भी हर साल करोड़ों रुपये की आमदनी होती है। इस रकम की एक प्रतिशत धनराशि औद्योगिक नगरी में विकास कार्यों पर खर्च कराई जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वर्ष-2019 में गजरौला नगर पालिका क्षेत्र में 2353 रजिस्ट्री हुईं। जिनसे एमडीए को 3.69 करोड़ रुपये विकास शुल्क के रूप में मिला। वर्ष 2020 में 2257 का बैनामा होने पर 3.32 करोड़ रुपये विकास शुल्क और 2021 में 2752 रजिस्ट्री से 6.52 करोड़ रुपये विकास शुल्क के रूप में प्राप्त हुए। बीते तीन साल में 7362 की रजिस्ट्री से मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को 13.53 करोड़ रुपये की आमदनी विकास शुल्क के रूप में हुई, लेकिन इसके बावजूद एक भी रुपया गजरौला में विकास के नाम पर खर्च नहीं किया गया। इससे औद्योगिक नगरी के लोगों में खासा आक्रोश है। व्यापारी नेता सुबोध सिंघल, अधिवक्ता डा.रविंद्र शुक्ला, नवीन गर्ग, विजय शर्मा, संजय सिंह नागर, डॉ. नरेंद्र सिंह आदि नागरिकों का कहना है कि एमडीए हर साल गजरौला से करोड़ों रुपये की आय प्राप्त करने के बावजूद यहां पर विकास के नाम पर फूटी कौड़ी खर्च नहीं कर रहा है, यह गजरौला का दुर्भाग्य है। न तो कोई सड़क बनवाई और न ही किसी नाली या नाले का निर्माण कराया। यहां की कमाई दूसरे शहरों में खर्च की जा रही है।
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कोट-
गजरौला में प्राधिकरण ने तीन साल से कोई विकास कार्य नहीं कराए। मास्टर प्लान लागू हो जाने के बाद गजरौला में विकास कार्य कराए जाएंगे। सड़क निर्माण से लेकर अन्य कार्य कराए जाएंगे।
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मनोज कुमार सिंह, अवर अभियंता मुरादाबाद विकास प्राधिकरण जोन-4