{"_id":"6249f2ed48a9454a8c528849","slug":"kavi-samelan-and-mushayara-jpnagar-news-mbd423559160","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘‘मैं दिल की सरजमीन सजाने में लगा हूं, मंदिर तेरा हुसैन बनाने में लगा हूं’’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘‘मैं दिल की सरजमीन सजाने में लगा हूं, मंदिर तेरा हुसैन बनाने में लगा हूं’’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमरोहा। दुरवेश फाउंडेशन के तत्वावधान में कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन इमाम हुसैन साहब के जन्मदिन के मौके पर किया गया। जिसमें कवियों, शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश कर खूब वाह-वाही लूटी।
शनिवार रात्रि शहर के मोहल्ला खत्री धर्मशाला में आयोजित कवि सम्मेलन, मुशायरे का आगाज तिलावते कलामे पाक से इरफान बाकरी ने की। मंच पर भाजपा जिला महामंत्री राकेश वर्मा, अस्करी रजा, सतेंद्र धारीवाल, महेंद्र कुमार, मुकेश दर्पन, नाशिर नकवी, महबूब हुसैन रहे। डॉ मुकेश दर्पन ने कहा...मैं दिल की सरजमीन सजाने में लगा हूं, मंदिर तेरा हुसैन बनाने में लगा हूं। करबो बला से जाता है जन्नत को रास्ता, ये बात हिंदूओं को बताने में लगा हूं।। भुवनेश शर्मा ने यू कहां...नम आया था जबां पर सरजमीने हिंद का, जन हिंदू क्यों न दें इब्ने अली पर शान से। सोचता हूं ऐ भुवन इससे अयां ये राज है, उनको खुशबू ए वफा आई थी हिंदुस्तान से।। हुमांयू हैदरी ने ऐसे कहा...मातमे हजरते शब्बीर से ये फैज मिला, हम भी गाजी के वफादार कहे जाने लगे। ताजदार नाजिम ने कुछ यू कहा...आओ संसार में यूं स्वर्ग का सामान करें, हम हुसैनी है सभी लोगों का सम्मान करें। इनके अलावा नौशा अमरोहवी, हसन मुजतबा वाहिद, सतेंद्र धारीवाल, हैदर किरतपुरी, डॉ शमशुल हसन, सामी नकवी, जिया काजमी, सिकंदर अमरोहवी, डॉ आसिम, सरफराज, वसीम, अफसर, शाहनवाज तकी, नाजिम हुसैन आदि ने भी अपने कलाम पेश किए। कनवीनर भुवनेश शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
शनिवार रात्रि शहर के मोहल्ला खत्री धर्मशाला में आयोजित कवि सम्मेलन, मुशायरे का आगाज तिलावते कलामे पाक से इरफान बाकरी ने की। मंच पर भाजपा जिला महामंत्री राकेश वर्मा, अस्करी रजा, सतेंद्र धारीवाल, महेंद्र कुमार, मुकेश दर्पन, नाशिर नकवी, महबूब हुसैन रहे। डॉ मुकेश दर्पन ने कहा...मैं दिल की सरजमीन सजाने में लगा हूं, मंदिर तेरा हुसैन बनाने में लगा हूं। करबो बला से जाता है जन्नत को रास्ता, ये बात हिंदूओं को बताने में लगा हूं।। भुवनेश शर्मा ने यू कहां...नम आया था जबां पर सरजमीने हिंद का, जन हिंदू क्यों न दें इब्ने अली पर शान से। सोचता हूं ऐ भुवन इससे अयां ये राज है, उनको खुशबू ए वफा आई थी हिंदुस्तान से।। हुमांयू हैदरी ने ऐसे कहा...मातमे हजरते शब्बीर से ये फैज मिला, हम भी गाजी के वफादार कहे जाने लगे। ताजदार नाजिम ने कुछ यू कहा...आओ संसार में यूं स्वर्ग का सामान करें, हम हुसैनी है सभी लोगों का सम्मान करें। इनके अलावा नौशा अमरोहवी, हसन मुजतबा वाहिद, सतेंद्र धारीवाल, हैदर किरतपुरी, डॉ शमशुल हसन, सामी नकवी, जिया काजमी, सिकंदर अमरोहवी, डॉ आसिम, सरफराज, वसीम, अफसर, शाहनवाज तकी, नाजिम हुसैन आदि ने भी अपने कलाम पेश किए। कनवीनर भुवनेश शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन