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Amroha News: भड़की चिंगारी तो अस्पतालों में मरीजों की जान बचाना मुश्किल

Sun, 17 Nov 2024 03:13 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Sun, 17 Nov 2024 03:13 AM IST
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If a spark erupts, it will be difficult to save the lives of patients in hospitals
अमरोहा।
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जिला अस्पताल समेत जिलेभर के निजी अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजाम नाकाफी हैं। अग्निशमन व्यवस्था बदहाल है। उपकरण बेकार हैं। जनरल वार्ड से लेकर सर्जिकल वार्ड तक यही स्थिति है। ढूंढने पर यहां पानी तक नहीं मिलेगा। ऐसे में एक छोटी सी चिंगारी तबाही मचा सकती है। जिला अस्पताल की ओपीडी में भी हर दिन करीब डेढ़ हजार मरीजों का इलाज किया जाता है।
झांसी हादसे ने अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। जिला अस्पताल समेत अन्य जगह आग से बचाव और राहत की व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है। कभी अस्पताल में आग लगने जैसी घटना हुई, तो झांसी मेडिकल कॉलेज जैसी घटना की पुनरावृत्ति होने से इन्कार नहीं किया जा सकता। अगर चिंगारी भड़की तो अस्पतालों में मरीजों की जान बचाना मुश्किल होगा। मालूम रहे जिले में जिला चिकित्सालय और महिला जिला चिकित्सालय समेत 500 से अधिक निजी नर्सिंग होम और अस्पताल हैं। जिला अस्पताल में ही रोजाना एक हजार से 15 सौ मरीज और उनके तीमारदार आते हैं।
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महिला चिकित्सालय में भी तीन हजार से 15 सौ मरीज प्रतिदिन आते हैं। जिला अस्पताल में आग बुझाने के लिए पानी टैंक, फायर सिलेंडर, एलार्म जैसी सुविधाएं हैं। लेकिन, पुरानी बिल्डिंग में कहीं पाइप नहीं है, तो कहीं फायर सिलिंडर को पकड़ने का जुगाड़। अस्पताल की तीन मंजिला बिल्डिंग में भी आग लगी जैसी घटना से निपटने का कोई खास इंतजाम नहीं है। अमरोहा शहर में भी कई बड़े नर्सिंग होम व अस्पताल हैं, जहां आसानी से अग्निशमन की गाड़ियां भी नहीं पहुंच सकती।
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सिर्फ 119 पर फायर ब्रिगेड की एनओसी
जिले में 119 नर्सिंग होम और अस्पतालों को छोड़कर किसी के पास फायर ब्रिगेड की एनओसी नहीं है। ऐसे कई नर्सिंग होम और अस्पताल में जिन पर दमकल की अग्निशमन विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) तक नहीं हैं। पानी की व्यवस्था तो दूर कई अस्पताल ऐसे हैं जहां अग्निशमन की गाड़ी भी नहीं पहुंच सकती है।
एक ही निकास द्वार, बेसमेंट भी वार्ड
अस्पताल समेत किसी भी बड़े भवन के लिए नियम यह है कि वहां कम से कम दो निकास द्वार हों ताकि आपात स्थिति में एक द्वार से लोग बाहर निकलते रहें और दूसरे से राहत कार्य जारी रहे। इस नियम का भी यहां कई अस्पतालों में पालन नहीं हो रहा है। कुछ अस्पतालों में दो रास्ते ही नही हैं। वाहनों की पार्किंग के लिए बनाए गए बेसमेंट भी वार्ड बनाकर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।

ये हैं अस्पतालों के लिए अग्नि सुरक्षा के मानक
- न्यूनतम डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़े दो दरवाजे होने चाहिए।
- ऊपरी मंजिल पर ओवरहेड टैंक हो, जिसमें हमेशा पानी भरा रहे।
- प्रत्येक मंजिल पर होज रील का इंतजाम हो।
- जगह-जगह अग्निशमन यंत्र लगे हों।
- आपातकालीन संकेतक और फायर अलार्म हो।
- बेसमेंट में अस्पताल का संचालन न हो।
- अग्निशमन विभाग की एनओसी ली हो।
- अग्निशमन विभाग, पुलिस और आपातकालीन नंबरों का डिस्प्ले हो।
- अस्पतालों में अग्निसुरक्षा के मानक तय हैं, जिससे समय-समय पर संचालकों को अवगत कराया जाता है। जिले में 119 अस्पतालों पर एनओसी है। जो अस्पताल या नर्सिंग होम बिना एनओसी के संचालित हो रहे हैं, उन्हें नोटिस भी भेजी जाती है। उन पर कार्रवाई का अधिकार स्वास्थ्य विभाग को है। जल्द ही फिर से अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। मानक पूरा न करने वालों को नोटिस देकर कार्रवाई की संस्तुति करेंगे। - अनिल कुमार सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।
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