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Amroha News: जैविक खेती कर हितेश ने बनाई पहचान, मिला सम्मान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 31 Jan 2024 03:44 AM IST
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Hitesh identified, got respect by doing organic farming
अमरोहा। कहते हैं देश की खुशहाली का रास्ता खेत किसानी से होकर गुजरता है। किसान जितना खुशहाल और समृद्ध होगा देश उतनी की तरक्की करेगा। अमरोहा की महिला किसान हितेश ने भी खेती से जुड़कर न केवल खुद को खुशहाल बनाया बल्कि क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी समृद्धि के रास्ते खोल दिए। जैविक और मोटे अनाज की खेती के लिए हितेश एक सशक्त उदाहरण बनीं हैं। मास्टर ट्रेनर के रूप में भी वह दूसरे किसानों को जैविक खेती के फायदे ओर गुर भी सिखा रहीं हैं।
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अमरोहा के उमरी रोड स्थित गांव चक छावी की किसान हितेश महिला स्वावलंबन की मिसाल बनी गई हैं। योग करते-करते जैविक खेती की तरफ रुझान हुआ तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। शुरुआत में छोटे स्तर पर जैविक खेती में हाथ आजमाया। इरादा और मजबूत हुआ तो, परिवार और कृषि विभाग के सहयोग से किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की शुरुआत की। धीरे-धीरे कर आज हितेश के एफपीओ में करीब चार सौ किसान जुड़े हुए हैं। जिनमें किसानों को वह करीब 40 एकड़ जमीन में ताइवान पिंक अमरूद की खेती करा रहीं हैं। जैविक खेती के रूप में वह गन्ना, सरसों, टमाटर, मसालों में हल्दी की खेती करती हैं, तो मिलेट्स के रूप में वह रागी, ज्वार, कुटकी और साबा की पैदावार ले रही हैं।
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सह फसली खेती से बढ़ा रहीं आय

हितेश जैविक गन्ने की पैदावार के लिए किसानों को जागरूक कर रहीं है। साथ ही श्री अन्न और हल्दी की जैविक खेती भी करती हैं। दूसरे किसानों को भी वह सहफसली खेती से जोड़ रहीं हैं। इसके अलावा श्री अन्न और लैमन ग्रास से भी उत्पाद तैयार कर रही हैं।
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कई गांवों में खोली निशुल्क पोषण वाटिकाएं



जैविक खेती के तहत हितेश ने आस पास के करीब तीन सौ किसानों के यहां पोषण वाटिकाएं खोली हैं। इसके लिए वह किसानों को निशुल्क सब्जियों के बीज और जैविक खाद उपलब्ध कराती हैं। जिले के भैंसरोली, लठीरा, चौबारा, सुदनपुर, ख्यालीपुर, जगुवा, पिपतौली, जयतौली, पौरारा आदि गांवों में वाटिकाएं तैयार की हैं।



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स्वयं सहायता समूह के जरिए तैयार कर रहीं गन्ने की नर्सरी

खेती किसानी की कोई विधा और तकनीक हितेश से अछूती नहीं है। खेती की नई तकनीक को सीखने ओर सिखाने में विश्वास रखने वाली हितेश स्वयं सहायता समूह के जरिए गन्ने की नर्सरी भी तैयार करती हैं। उनके समूह में करीब 12 महिलाएं जुड़ी हैं। जोकि सिंगल बड तकनीक से गन्ने की नर्सरी तैयार कर रही हैं। उनकी नर्सरी में गन्ने की वैरायटी 13235, 17231 और 14201 उपलब्ध है।

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करनाल और लखनऊ से ट्रेनिंग लेकर बनी मास्टर ट्रेनर



हितेश ने साल 2018 में करनाल के कृषि विज्ञान केंद्र से आठ दिन का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद लखनऊ से खेती की नई जानकारी हासिल कर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत जैविक ट्रेनर के रूप में किसानों को प्रशिक्षित कर रहीं हैं। जैविक रसायन और खाद के रूप में वह पंचगव्य, नीमास्त्र, दशपंडी अर्क, घनजीवामृत आदि करती हैं।




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यूपी स्थापना दिवस मिला सम्मान

जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हितेश को कलक्ट्रेट में आयोजित हुए उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के मौके पर जिले के प्रभारी मंत्री संजय गंगवार द्वारा सम्मानित भी किया गया। जैविक खेती के लिए सम्मानित हुए किसानों में वह अकेली महिला किसान थीं।
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