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हाईवे पर उत्पात मचाती रही भीड़, मूकदर्शक रही पुलिस
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:48 PM IST
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अमरोहा के संभल चौराहा हाईवे पर जाम लगाकर आगजनी करते लोग। अमरोहा के संभल चौराहा हाईवे पर जाम में फंसे वाहनों में तोड़फोड़ करते लोगों पर लाठी भांजती पुलिस । मो. फहीम
- फोटो : amar ujala
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शौकत की लाश आने के बाद लोगों का आक्रोश जमकर फूटा। हाईवे पर अराजकता फैल गई। तोड़फोड़ के अलावा जबरदस्त हंगामा पब्लिक करती रही, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनकर खड़ी रही। उत्तेजित भीड़ के बीच में किसी भी कर्मचारी व अफसर ने जाना मुनासिब नहीं समझा। हैरानी की बात ये है कि पुलिस को बवाल की आशंका थी, मगर उसके द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम क्यों नहीं किए गए, ये वाकई चौंकाने वाली बात है। लोग कैबिनेट मंत्री, उनके भाई, बेटे और पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग कर रहे थे।
बीते दिन जिसने भी शौकत पाशा की मौत की खबर सुनी बस दंग रह गया। अपराध की दुनिया छोड़कर जमीनों के कारोबार में लगे शौकत का बिरादरी में अलग ही रुतबा था। कई लोगों का वह रहनुमा बन चुका था। बिरादरी को साथ लेकर और उसके छोटे बड़े विवादों को निपटाना, बस मकसद बन गया था। धीरे धीरे उसकी लोकप्रियता लोगों के बीच बढ़ती जा रही थी। पुलिस की नजरों में भले ही बदमाश था, मगर बिरादरी के लोग उसको पसंद करते थे। अलग ही लगाव रखते थे।
रविवार शाम जब उसकी लाश गांव पहुंची तो मानों जनसैलाब उमड़ पड़ा। हरेक ने घटना को हत्या बताया। इसके बाद एक साथ हुंकार भरी और सड़क पर उतर गए। कैबिनेट मंत्री का होर्डिंग हो या कराए गए काम, सब में तोड़फोड़ की। हाईवे पर देर रात तक अराजकता फैली रही, लेकिन पुलिस अफसर भीड़ से दूर खामोश खड़े होकर नजारा देखते रहे। किसी में पब्लिक का सामना करने की हिम्मत छोड़िए पास में जाने तक का साहस नहीं दिख रहा था।
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अब ये भी नहीं कि पुलिस अफसरों को ऐसा होने का आभास न हो, उनको पूरा मालूम था कि गुस्सा पब्लिक का भड़केगा, मगर उनके द्वारा लोगों को समझाने व अराजकता को रोकने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया। एलआईयू की रिपोर्ट पर भी अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
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बीते दिन जिसने भी शौकत पाशा की मौत की खबर सुनी बस दंग रह गया। अपराध की दुनिया छोड़कर जमीनों के कारोबार में लगे शौकत का बिरादरी में अलग ही रुतबा था। कई लोगों का वह रहनुमा बन चुका था। बिरादरी को साथ लेकर और उसके छोटे बड़े विवादों को निपटाना, बस मकसद बन गया था। धीरे धीरे उसकी लोकप्रियता लोगों के बीच बढ़ती जा रही थी। पुलिस की नजरों में भले ही बदमाश था, मगर बिरादरी के लोग उसको पसंद करते थे। अलग ही लगाव रखते थे।
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रविवार शाम जब उसकी लाश गांव पहुंची तो मानों जनसैलाब उमड़ पड़ा। हरेक ने घटना को हत्या बताया। इसके बाद एक साथ हुंकार भरी और सड़क पर उतर गए। कैबिनेट मंत्री का होर्डिंग हो या कराए गए काम, सब में तोड़फोड़ की। हाईवे पर देर रात तक अराजकता फैली रही, लेकिन पुलिस अफसर भीड़ से दूर खामोश खड़े होकर नजारा देखते रहे। किसी में पब्लिक का सामना करने की हिम्मत छोड़िए पास में जाने तक का साहस नहीं दिख रहा था।
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अब ये भी नहीं कि पुलिस अफसरों को ऐसा होने का आभास न हो, उनको पूरा मालूम था कि गुस्सा पब्लिक का भड़केगा, मगर उनके द्वारा लोगों को समझाने व अराजकता को रोकने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया। एलआईयू की रिपोर्ट पर भी अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया।