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कौन करेगा वन विभाग के करोड़ों के नुकसान की भरपाई
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Mon, 26 Dec 2016 11:54 PM IST
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मंडावर क्षेत्र के ग्राम राजारामपुर के जंगल में खेतों में भरा गंगा का पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में वन विभाग की लगभग सात हजार बीघे से अधिक जमीन पर माफिया की फसल लहलहा रही हैं। माफिया अफसरों और कर्मचारियों से साठगांठ कर वन संपदा को उजाड़ कर दशक से खेतीबाड़ी कर रहे हैैं। मामला आला अफसरों तक पहुंचने के बाद वन विभाग की जमीन को माफिया के कब्जे से मुक्त कराया जा रहा है, लेेकिन पेड़ पौधे नष्ट हो जाने से विभाग को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई कौन करेगा?
जनपद में वन विभाग की भूमि पर माफिया के कब्जे के रोजाना नए मामले सामने आ रहे हैं। अभी तक हसनपुर तहसील के बिहारीपुर-पथरा और जेबड़ा ही माफिया के अतिक्रमण के लिए चर्चित थे। इसी रेंज के दौलतपुर कलां, ढकिया, फत्तेहपुर, कंडौआ में भी वन विभाग की जमीन पर माफिया के कब्जे की शिकायत सामने आई है। और भी कई गांव हैं, जहां पर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से माफिया फसल उगा रहे हैं।
उधर माफिया के अवैध कब्जे के मामले को लेकर धनौरा क्षेत्र का हाल और भी बुरा है। यहां पर इब्राहिमपुर, शेरपुर ढ्यौटी, रंपुरा खादर, मुकारमपुर, बस्तौरा खादर, शीशोवाली, ढाकों वाली तथा नाबाला नर्सरी के पास भी करीब पांच हजार बीघे जमीन पर खेतीबाड़ी की जा रही है।
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अभी तक अधिकारी और कर्मचारी खामोशी की चादर ओढ़े हुए थे, लेकिन मामला प्रधान मुख्य वन संरक्षक रूपक डे तक पहुंचने के बाद जिले में वन विभाग के अफसरों ने अतिक्रमण हटवाने की सुध ली। हसनपुर क्षेत्र में माफियाओं का कब्जा हटवाया जा रहा है।
धनौरा में भी माफिया से जमीन खाली कराने की तैयारी की जा रही है। माफिया से वन विभाग की जमीन तो खाली हो जाएगी पर विभाग को हुुए करोड़ों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा। दोबारा पौधारोपण से लेकर पालन-पोषण में विभाग को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ेंगे। आखिर कहां से आएगी करोड़ों की रकम।
अमरोहा जिले में वन विभाग को करोड़ों की चपत लगाने के लिए जो भी जिम्मेदार है, उसे बख्शा नहीं जाएगा। विभाग को हुए करोड़ों के नुकसान की भरपाई करना भी अफसरों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। वह कैसे करते हैं, यह उनको देखना है।-रूपक डे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक।
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जनपद में वन विभाग की भूमि पर माफिया के कब्जे के रोजाना नए मामले सामने आ रहे हैं। अभी तक हसनपुर तहसील के बिहारीपुर-पथरा और जेबड़ा ही माफिया के अतिक्रमण के लिए चर्चित थे। इसी रेंज के दौलतपुर कलां, ढकिया, फत्तेहपुर, कंडौआ में भी वन विभाग की जमीन पर माफिया के कब्जे की शिकायत सामने आई है। और भी कई गांव हैं, जहां पर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से माफिया फसल उगा रहे हैं।
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उधर माफिया के अवैध कब्जे के मामले को लेकर धनौरा क्षेत्र का हाल और भी बुरा है। यहां पर इब्राहिमपुर, शेरपुर ढ्यौटी, रंपुरा खादर, मुकारमपुर, बस्तौरा खादर, शीशोवाली, ढाकों वाली तथा नाबाला नर्सरी के पास भी करीब पांच हजार बीघे जमीन पर खेतीबाड़ी की जा रही है।
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अभी तक अधिकारी और कर्मचारी खामोशी की चादर ओढ़े हुए थे, लेकिन मामला प्रधान मुख्य वन संरक्षक रूपक डे तक पहुंचने के बाद जिले में वन विभाग के अफसरों ने अतिक्रमण हटवाने की सुध ली। हसनपुर क्षेत्र में माफियाओं का कब्जा हटवाया जा रहा है।
धनौरा में भी माफिया से जमीन खाली कराने की तैयारी की जा रही है। माफिया से वन विभाग की जमीन तो खाली हो जाएगी पर विभाग को हुुए करोड़ों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा। दोबारा पौधारोपण से लेकर पालन-पोषण में विभाग को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ेंगे। आखिर कहां से आएगी करोड़ों की रकम।
अमरोहा जिले में वन विभाग को करोड़ों की चपत लगाने के लिए जो भी जिम्मेदार है, उसे बख्शा नहीं जाएगा। विभाग को हुए करोड़ों के नुकसान की भरपाई करना भी अफसरों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। वह कैसे करते हैं, यह उनको देखना है।-रूपक डे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक।