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Amroha News: पौने पांच करोड़ के गबन में बर्खास्त एससीडीआई प्रीतम सिंह गिरफ्तार
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गजरौला(अमरोहा)। पौने पांच करोड़ रुपये के गबन के आरोप में बीते साल मार्च में जेल गए डीसीओ कार्यालय के बाबू आशीष सैनी पर नियंत्रण रखने में नाकाम रहने व लापरवाही बरतने पर बर्खास्त चल रहे गजरौला के पूर्व ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक प्रीतम सिंह (एससीडीआई) को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया। उनको एंटी करप्शन कोर्ट बरेली में पेश किया गया।
जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के बाबू आशीष सैनी के खिलाफ जुलाई-16 में थाना गजरौला में पौने पांच करोड़ रुपये के गबन का केस दर्ज हुआ था। उसके उप गन्ना आयुक्त मुरादाबाद ने तत्कालीन मुरादाबाद डीसीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई। जांच टीम ने वर्ष-2018-19 से 2022-23 तक के अभिलेखों की जांच कर पौने पांच करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि की। गबन का मामला सामने आने पर तत्कालीन जिला गन्ना अधिकारी अमरोहा हेमेंद्र प्रताप सिंह व गजरौला के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (एससीडीआई) प्रीतम सिंह नप गए। जहां हेमेंद्र प्रताप सिंह को हटाकर लखनऊ संबद्ध कर दिया गया, वहीं प्रीतम सिंह कासगंज से संबद्ध कर दिया गया था।
इधर हेमेंद्र प्रताप सिंह, प्रीतम सिंह और आरोपी बाबू आशीष व प्रीतम सिंह से पूर्व तैनात गजरौला के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक महेश यादव के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर विभागीय जांच शुरू की गई। विभाग के अलावा क्राइम ब्रांच भी जांच कर रही थी। गन्ना विभाग की जांच में सामने आया कि पौने पांच करोड़ रुपये के गबन के आरोपी बाबू आशीष सैनी पर तत्कालीन ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक प्रीतम सिंह का कोई नियंत्रण नहीं था। उनकी लापरवाही के कारण ही उसने गबन किया। जिसके बाद कासगंज संबद्ध चल रहे गजरौला के पूर्व ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक को प्रदेश के अपर मुख्य सचिव चीनी उद्योग ने निलंबित कर दिया। उनको कासगंज से हटाकर बरेली उप गन्ना आयुक्त कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया। दस मई-24 को प्रीतम सिंह नौकरी से बर्खास्त कर दिए।
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उधर क्राइम ब्रांच को उनके खिलाफ पौने पांच करोड़ रुपये के गबन के सभी सबूत मिल गए। जिनके आधार पर उनको गिरफ्तार कर लिया गया। सीओ अभिषेक यादव ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रीतम सिंह गिरफ्तार कर एंटी करप्शन कोर्ट बरेली में पेश किया गया है।
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आरोपी बाबू आशीष सैनी हो चुका है गिरफ्तार
जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक आशीष सैनी के खिलाफ थाना गजरौला में 16 जुलाई-22 को ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक गजरौला प्रीतम सिंह ने पौने पांच करोड़ के गबन का मुकदमा दर्ज कराया। आशीष सैनी पर जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक के साथ ही ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक गजरौला व गन्ना विकास परिषद चंदनपुर कार्यालय की भी जिम्मेदारी थी। उस पर आरोप था कि उसने अलग-अलग बैंक से रकम की निकासी की। इसके अलावा आशीष सैनी ने अपनी पत्नी प्रीति सैनी के गन्ना विकास परिषद गजरौला व गन्ना विकास परिषद चंदनपुर के यूनियन बैंक अमरोहा, केनरा बैंक अमरोहा, एचडीएफसी अमरोहा, पंजाब नेशनल बैंक अमरोहा, कैनरा बैंक गजरौला, एक्सिस बैंक गजरौला एवं जिला सहकारी बैंक के खाते में से रकम ट्रांसफर की। उसने यूनियन बैंक अमरोहा से 2,31,92,102, एचडीएफसी बैंक अमरोहा से 51,26,836 व एचडीएफसी जोया से 510773 रकम ट्रांसफर की। उस पर गबन की पुष्टि उप गन्ना आयुक्त मुरादाबाद की गठित टीम ने वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक के अभिलेखों की जांच के बाद की थी। जिसकी जांच गजरौला थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर क्राइम धर्मेंद्र सिंह कर रहे थे। 17 मार्च-23 को इंस्पेक्टर क्राइम ने आशीष सैनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में वह जमानत पर छूट गया।
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जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के बाबू आशीष सैनी के खिलाफ जुलाई-16 में थाना गजरौला में पौने पांच करोड़ रुपये के गबन का केस दर्ज हुआ था। उसके उप गन्ना आयुक्त मुरादाबाद ने तत्कालीन मुरादाबाद डीसीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई। जांच टीम ने वर्ष-2018-19 से 2022-23 तक के अभिलेखों की जांच कर पौने पांच करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि की। गबन का मामला सामने आने पर तत्कालीन जिला गन्ना अधिकारी अमरोहा हेमेंद्र प्रताप सिंह व गजरौला के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (एससीडीआई) प्रीतम सिंह नप गए। जहां हेमेंद्र प्रताप सिंह को हटाकर लखनऊ संबद्ध कर दिया गया, वहीं प्रीतम सिंह कासगंज से संबद्ध कर दिया गया था।
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इधर हेमेंद्र प्रताप सिंह, प्रीतम सिंह और आरोपी बाबू आशीष व प्रीतम सिंह से पूर्व तैनात गजरौला के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक महेश यादव के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर विभागीय जांच शुरू की गई। विभाग के अलावा क्राइम ब्रांच भी जांच कर रही थी। गन्ना विभाग की जांच में सामने आया कि पौने पांच करोड़ रुपये के गबन के आरोपी बाबू आशीष सैनी पर तत्कालीन ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक प्रीतम सिंह का कोई नियंत्रण नहीं था। उनकी लापरवाही के कारण ही उसने गबन किया। जिसके बाद कासगंज संबद्ध चल रहे गजरौला के पूर्व ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक को प्रदेश के अपर मुख्य सचिव चीनी उद्योग ने निलंबित कर दिया। उनको कासगंज से हटाकर बरेली उप गन्ना आयुक्त कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया। दस मई-24 को प्रीतम सिंह नौकरी से बर्खास्त कर दिए।
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उधर क्राइम ब्रांच को उनके खिलाफ पौने पांच करोड़ रुपये के गबन के सभी सबूत मिल गए। जिनके आधार पर उनको गिरफ्तार कर लिया गया। सीओ अभिषेक यादव ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रीतम सिंह गिरफ्तार कर एंटी करप्शन कोर्ट बरेली में पेश किया गया है।
आरोपी बाबू आशीष सैनी हो चुका है गिरफ्तार
जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक आशीष सैनी के खिलाफ थाना गजरौला में 16 जुलाई-22 को ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक गजरौला प्रीतम सिंह ने पौने पांच करोड़ के गबन का मुकदमा दर्ज कराया। आशीष सैनी पर जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक के साथ ही ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक गजरौला व गन्ना विकास परिषद चंदनपुर कार्यालय की भी जिम्मेदारी थी। उस पर आरोप था कि उसने अलग-अलग बैंक से रकम की निकासी की। इसके अलावा आशीष सैनी ने अपनी पत्नी प्रीति सैनी के गन्ना विकास परिषद गजरौला व गन्ना विकास परिषद चंदनपुर के यूनियन बैंक अमरोहा, केनरा बैंक अमरोहा, एचडीएफसी अमरोहा, पंजाब नेशनल बैंक अमरोहा, कैनरा बैंक गजरौला, एक्सिस बैंक गजरौला एवं जिला सहकारी बैंक के खाते में से रकम ट्रांसफर की। उसने यूनियन बैंक अमरोहा से 2,31,92,102, एचडीएफसी बैंक अमरोहा से 51,26,836 व एचडीएफसी जोया से 510773 रकम ट्रांसफर की। उस पर गबन की पुष्टि उप गन्ना आयुक्त मुरादाबाद की गठित टीम ने वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक के अभिलेखों की जांच के बाद की थी। जिसकी जांच गजरौला थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर क्राइम धर्मेंद्र सिंह कर रहे थे। 17 मार्च-23 को इंस्पेक्टर क्राइम ने आशीष सैनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में वह जमानत पर छूट गया।