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Amroha News: दशकों पुराने जर्जर भवन और गिरता प्लास्टर... खतरे के साए में विद्यार्थी
Thu, 31 Jul 2025 02:08 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 31 Jul 2025 02:08 AM IST
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अमरोहा।
संविलियन विद्यालय डिडौली। करीब 13 साल पुराना भवन जर्जर हाल है। छत टपक रही है। दीवारों में सीलन साफ दिखाई दे रही है। साफ-सफाई की व्यवस्था भी बदला है। कुछ कक्षाओं में फर्नीचर भी नहीं। पानी के लिए टंकी है लेकिन पानी नहीं। शौचालय भी टूटे पड़े है। यह स्थिति जिले के एक स्कूल की नहीं बल्कि कई स्कूलों की है। इस स्कूलों के दशकों पुराने जर्जर भवन और गिरते प्लास्टर के बीच हादसे का डर रहता है।
डिडौली के संविलियन विद्यालय में 291 बच्चों का पंजीकरण है। इन्हें पढ़ाने के लिए 10 शिक्षक व एक शिक्षामित्र की तैनाती भी है लेकिन करीब 13 साल पुराना स्कूल का भवन जर्जर हो चुका है। जिसकी छत टपकती है और दीवारों में सीलन है। बुधवार को विद्यालय में कुल 163 बच्चे उपस्थित थे। बच्चों के मिडडे-मील खाने के लिए भी कोई सुविधा नहीं है। विद्यार्थी खुले में नीचे बैठकर मिडडे-मील खा रहे थे। वहीं, कुछ कक्षाओं में फर्नीचर न होने से बच्चे नीचे बैठे थे। शौचालय की सफाई की स्थिति भी ठीक नहीं है।
उधर, अमरोहा के प्राथमिक घंसूरपुर बमनिया के स्कूल का भवन जर्जर हाल है। करीब चार साल पहले इसे निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इस स्कूल के कक्षा पांच तक के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाया जा रहा है। कुछ साल पहले तक छात्र संख्या कम थी, लिहाजा शिक्षकों को भी परेशानी नहीं थी लेकिन अब छात्र संख्या 40 हो गई है। स्कूल में दो शिक्षकों और एक शिक्षामित्र की तैनाती है सभी बच्चों को एक साथ पढ़ाने में दिक्कत होती है। नन्हेड़ा अलियारपुर स्कूल में जलभराव की समस्या है। यहां बनी नक्षत्रशाला पर भी ताला लगा है।
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इसके अलावा जिले के करीब 11 स्कूल ऐसे हैं जहां भवनों के ऊपर से एचटी लाइन गुजर रही हैं। कई स्कूलों में बाउंड्रीवाल भी नहीं है। जिले में कुल 1266 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जाता था लेकिन अपर्याप्त छात्र संख्या वाले 228 स्कूलों का विलय दूसरे स्कूलों में कर दिया गया है। अब इन स्कूलों के बच्चे दूसरे स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। लिहाजा स्कूलों की संख्या भी अब 1038 रह गई है।
एक ही कमरे में बैठते हैं कक्षा चार तक के बच्चे, फर्नीचर की व्यवस्था भी नहीं
अमरोहा-पाकबड़ा रोड पर तेलीपुरा के प्राथमिक विद्यालय के स्कूल में 59 बच्चाें का नामांकन है। यहां मुख्य अध्यापक समेत कुल चार शिक्षकों का स्टाफ है। स्कूल में दो कमरे बने हैं। इसमें एक से चार तक के बच्चे एक कमरे और बिना फर्नीचर के नीचे बैठ के पढ़ते हैं और दूसरे कमरे में कक्षा पांच के बच्चे पढ़ते हैं। यह कमरा थोड़ा गहरा हो जाने के कारण बरसात के दिनों में यहां पानी भर जाता है। सड़क के किनारे होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से भी बच्चों के लिए खतरा बना रहता है।
स्कूल पहुंचने को कीचड़ भरे रास्ते से गुजरते हैं बच्चे
हसनपुर के गांव चकूनी स्थित प्राथमिक विद्यालय जाने वाले रास्ते पर कीचड़ पसरा है। रास्ते से विद्यार्थियों व शिक्षिकों का निकलना भी दुश्वार हो रहा है। बच्चे कीचड़ में सनकर स्कूल पहुंचते हैं, तो शिक्षकों को वाहन दूर खड़े कर स्कूल पैदल जाना पड़ता है। प्राथमिक विद्यालय के भवन का निर्माण 2002 में कराया गया, जो अब जर्जर होने लगा है। दीवारों का प्लास्टर धीरे-धीरे अपनी जगह छोड़ रहा है। विद्यालय में साफ-सफाई की स्थिति ठीक नहीं है। मुख्य द्वार पर गेट नहीं है। मुख्य द्वार के दोनों ओर ग्रामीणों ने अपना गोबर व कूड़े आदि की जगह बना ली है। विद्यालय की बिल्डिंग के पीछे की बाउंड्री भी नहीं हुई है। विद्यालय में 45 बच्चों का नामांकन है। बुधवार को 35 बच्चों की उपस्थिति थी। विद्यालय एकल है, यानी बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल एक ही शिक्षक राजीव कुमार चौहान की तैनाती है जबकि एक शिक्षामित्र की तैनाती भी है।
प्रधान के घर होती है पढ़ाई, केवल प्रार्थना और मिडडे मील के लिए स्कूल पहुंचते हैं बच्चे
गजरौला क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गढ़ावली में चार कमरे क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण तीन कक्षाओं के 163 बच्चे दो कमरों में बैठकर पढ़ाने को मजबूर हैं। कक्षा चार व पांचवीं के विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए प्रधान के घर भेजा जाता है जिससे वह सुरक्षित बैठकर पढ़ाई कर सकें।
गढ़ावली में प्राथमिक विद्यालय में 305 बच्चों का नामांकन है। बुधवार को 256 बच्चे उपस्थित हुए। प्रधानाध्यापिका कुमारी चूनम समेत सात महिला शिक्षक, तीन पुरुष शिक्षक और एक महिला शिक्षामित्र है। रेलवे लाइन किनारे स्थित स्कूल भवन में छह कमरे हैं। इनमें चार कमरे जर्जर हो गए। बारिश में छत से पानी टपकता है। दीवारों में सीलन है। पीछे से चारों कमरों की दीवार खोखली हो गई। जगह-जगह से सीमेंट छूटकर गिर रहा है। स्कूल के दो कमरे ही बैठने लायक हैं। इनमें एक से कक्षा तीन तक के बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं। बुधवार को एक कमरे में 75 विद्यार्थी और दूसरे कमरे में 70 विद्यार्थी बैठकर पढ़ाई कर रहे थे।
कक्षा चार और पांचवीं के बच्चों को बैठने के लिए बने कमरों की छत, दीवार जर्जर होने के कारण हादसे की आशंका रहती है। इसलिए दोनों कक्षा के बच्चों को स्कूल से दो सौ मीटर दूर ग्राम प्रधान अर्चना देवी के घेर में बैठकर पढ़ाई करने भेजा जाता है। वह स्कूल परिसर में प्रार्थना के समय और मध्यान्ह भोजन करने ही आते हैं। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि स्कूल में परिसर भी बहुत कम है। इसलिए यहां पर न तो खेलने का मैदान है और न ही रसोईघर। पुराने एक कार्यालय में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन बनाया जाता है। इसके अलावा बराबर में रेलवे लाइन है। 60 बच्चे रेलवे लाइन पार कर आते-जाते हैं। स्कूल खुलने और छुट्टी के समय बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। बच्चे निकल जाने तक स्टाफ रेलवे लाइन किनारे खड़ा रहता है।
देर से पहुंचती हैं शिक्षिका, स्कूल परिसर में भरा पानी
धनौरा क्षेत्र के गांव हिरनाखेड़ी के प्राइमरी स्कूल में प्रधानाध्यापिका स्वाति स्कूल में मौजूद नहीं थी। बच्चों ने बताया कि मैडम सुबह देरी से आती हैं और छुट्टी से पहले ही चली जाती है। स्कूल आठ बच्चे पंजीकृत हैं। हालांकि बुधवार को छह बच्चे ही आए थे। स्कूल में केवल शिक्षामित्र सुमन ही मौजूद थी। वहीं, बच्चे कक्षा में खुद ही पढ़ाई कर रहे थे।
मोहद्दीनपुर गांव के प्राइमरी स्कूल का एक भवन जर्जर है। हालांकि बच्चे नए भवन में पढ़ रहे हैं लेकिन जर्जर भवन के पास बच्चे खेलने जाते हैं। दुर्घटना की आशंका रहती है। शिक्षिका मनीषा पंवार प्रशिक्षण में गई थीं।
गांव धनौरी खुर्द के कंपोजिट विद्यालय के प्राइमरी स्कूल में 79 बच्चे पंजीकृत हैं। बुधवार को 55 बच्चे ही आए थे। जूनियर विद्यालय में 47 बच्चे पंजीकृत हैं। बुधवार को 34 बच्चे उपस्थित थे। यहां दो शिक्षिका को अवकाश पर बताया गया, जबकि दो शिक्षामित्र ट्रेनिंग के लिए गई थी। प्राइमरी सेक्शन में चार शिक्षामित्र व चार शिक्षिका हैं। मौके पर दो शिक्षिका व एक शिक्षामित्र थी। विद्यालय परिसर में पानी भरने की वजह से एक कक्ष खाली था। प्रधानाध्यापक भूपेंद्र सैनी ने बताया कि वहां बच्चों के गिरने की आशंका की वजह से कक्ष को खाली कराया गया था।
-- कक्षा चार व पांच के बच्चों के साथ हादसा न हो जाए, इसी आशंका के चलते उनको ग्राम प्रधान के यहां पर बैठने का इंतजाम किया गया है। नया भवन बनाने के लिए लिखा गया है।- आरती गुप्ता, बीईओ गजरौला
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संविलियन विद्यालय डिडौली। करीब 13 साल पुराना भवन जर्जर हाल है। छत टपक रही है। दीवारों में सीलन साफ दिखाई दे रही है। साफ-सफाई की व्यवस्था भी बदला है। कुछ कक्षाओं में फर्नीचर भी नहीं। पानी के लिए टंकी है लेकिन पानी नहीं। शौचालय भी टूटे पड़े है। यह स्थिति जिले के एक स्कूल की नहीं बल्कि कई स्कूलों की है। इस स्कूलों के दशकों पुराने जर्जर भवन और गिरते प्लास्टर के बीच हादसे का डर रहता है।
डिडौली के संविलियन विद्यालय में 291 बच्चों का पंजीकरण है। इन्हें पढ़ाने के लिए 10 शिक्षक व एक शिक्षामित्र की तैनाती भी है लेकिन करीब 13 साल पुराना स्कूल का भवन जर्जर हो चुका है। जिसकी छत टपकती है और दीवारों में सीलन है। बुधवार को विद्यालय में कुल 163 बच्चे उपस्थित थे। बच्चों के मिडडे-मील खाने के लिए भी कोई सुविधा नहीं है। विद्यार्थी खुले में नीचे बैठकर मिडडे-मील खा रहे थे। वहीं, कुछ कक्षाओं में फर्नीचर न होने से बच्चे नीचे बैठे थे। शौचालय की सफाई की स्थिति भी ठीक नहीं है।
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उधर, अमरोहा के प्राथमिक घंसूरपुर बमनिया के स्कूल का भवन जर्जर हाल है। करीब चार साल पहले इसे निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इस स्कूल के कक्षा पांच तक के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाया जा रहा है। कुछ साल पहले तक छात्र संख्या कम थी, लिहाजा शिक्षकों को भी परेशानी नहीं थी लेकिन अब छात्र संख्या 40 हो गई है। स्कूल में दो शिक्षकों और एक शिक्षामित्र की तैनाती है सभी बच्चों को एक साथ पढ़ाने में दिक्कत होती है। नन्हेड़ा अलियारपुर स्कूल में जलभराव की समस्या है। यहां बनी नक्षत्रशाला पर भी ताला लगा है।
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इसके अलावा जिले के करीब 11 स्कूल ऐसे हैं जहां भवनों के ऊपर से एचटी लाइन गुजर रही हैं। कई स्कूलों में बाउंड्रीवाल भी नहीं है। जिले में कुल 1266 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जाता था लेकिन अपर्याप्त छात्र संख्या वाले 228 स्कूलों का विलय दूसरे स्कूलों में कर दिया गया है। अब इन स्कूलों के बच्चे दूसरे स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। लिहाजा स्कूलों की संख्या भी अब 1038 रह गई है।
एक ही कमरे में बैठते हैं कक्षा चार तक के बच्चे, फर्नीचर की व्यवस्था भी नहीं
अमरोहा-पाकबड़ा रोड पर तेलीपुरा के प्राथमिक विद्यालय के स्कूल में 59 बच्चाें का नामांकन है। यहां मुख्य अध्यापक समेत कुल चार शिक्षकों का स्टाफ है। स्कूल में दो कमरे बने हैं। इसमें एक से चार तक के बच्चे एक कमरे और बिना फर्नीचर के नीचे बैठ के पढ़ते हैं और दूसरे कमरे में कक्षा पांच के बच्चे पढ़ते हैं। यह कमरा थोड़ा गहरा हो जाने के कारण बरसात के दिनों में यहां पानी भर जाता है। सड़क के किनारे होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से भी बच्चों के लिए खतरा बना रहता है।
स्कूल पहुंचने को कीचड़ भरे रास्ते से गुजरते हैं बच्चे
हसनपुर के गांव चकूनी स्थित प्राथमिक विद्यालय जाने वाले रास्ते पर कीचड़ पसरा है। रास्ते से विद्यार्थियों व शिक्षिकों का निकलना भी दुश्वार हो रहा है। बच्चे कीचड़ में सनकर स्कूल पहुंचते हैं, तो शिक्षकों को वाहन दूर खड़े कर स्कूल पैदल जाना पड़ता है। प्राथमिक विद्यालय के भवन का निर्माण 2002 में कराया गया, जो अब जर्जर होने लगा है। दीवारों का प्लास्टर धीरे-धीरे अपनी जगह छोड़ रहा है। विद्यालय में साफ-सफाई की स्थिति ठीक नहीं है। मुख्य द्वार पर गेट नहीं है। मुख्य द्वार के दोनों ओर ग्रामीणों ने अपना गोबर व कूड़े आदि की जगह बना ली है। विद्यालय की बिल्डिंग के पीछे की बाउंड्री भी नहीं हुई है। विद्यालय में 45 बच्चों का नामांकन है। बुधवार को 35 बच्चों की उपस्थिति थी। विद्यालय एकल है, यानी बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल एक ही शिक्षक राजीव कुमार चौहान की तैनाती है जबकि एक शिक्षामित्र की तैनाती भी है।
प्रधान के घर होती है पढ़ाई, केवल प्रार्थना और मिडडे मील के लिए स्कूल पहुंचते हैं बच्चे
गजरौला क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गढ़ावली में चार कमरे क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण तीन कक्षाओं के 163 बच्चे दो कमरों में बैठकर पढ़ाने को मजबूर हैं। कक्षा चार व पांचवीं के विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए प्रधान के घर भेजा जाता है जिससे वह सुरक्षित बैठकर पढ़ाई कर सकें।
गढ़ावली में प्राथमिक विद्यालय में 305 बच्चों का नामांकन है। बुधवार को 256 बच्चे उपस्थित हुए। प्रधानाध्यापिका कुमारी चूनम समेत सात महिला शिक्षक, तीन पुरुष शिक्षक और एक महिला शिक्षामित्र है। रेलवे लाइन किनारे स्थित स्कूल भवन में छह कमरे हैं। इनमें चार कमरे जर्जर हो गए। बारिश में छत से पानी टपकता है। दीवारों में सीलन है। पीछे से चारों कमरों की दीवार खोखली हो गई। जगह-जगह से सीमेंट छूटकर गिर रहा है। स्कूल के दो कमरे ही बैठने लायक हैं। इनमें एक से कक्षा तीन तक के बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं। बुधवार को एक कमरे में 75 विद्यार्थी और दूसरे कमरे में 70 विद्यार्थी बैठकर पढ़ाई कर रहे थे।
कक्षा चार और पांचवीं के बच्चों को बैठने के लिए बने कमरों की छत, दीवार जर्जर होने के कारण हादसे की आशंका रहती है। इसलिए दोनों कक्षा के बच्चों को स्कूल से दो सौ मीटर दूर ग्राम प्रधान अर्चना देवी के घेर में बैठकर पढ़ाई करने भेजा जाता है। वह स्कूल परिसर में प्रार्थना के समय और मध्यान्ह भोजन करने ही आते हैं। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि स्कूल में परिसर भी बहुत कम है। इसलिए यहां पर न तो खेलने का मैदान है और न ही रसोईघर। पुराने एक कार्यालय में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन बनाया जाता है। इसके अलावा बराबर में रेलवे लाइन है। 60 बच्चे रेलवे लाइन पार कर आते-जाते हैं। स्कूल खुलने और छुट्टी के समय बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। बच्चे निकल जाने तक स्टाफ रेलवे लाइन किनारे खड़ा रहता है।
देर से पहुंचती हैं शिक्षिका, स्कूल परिसर में भरा पानी
धनौरा क्षेत्र के गांव हिरनाखेड़ी के प्राइमरी स्कूल में प्रधानाध्यापिका स्वाति स्कूल में मौजूद नहीं थी। बच्चों ने बताया कि मैडम सुबह देरी से आती हैं और छुट्टी से पहले ही चली जाती है। स्कूल आठ बच्चे पंजीकृत हैं। हालांकि बुधवार को छह बच्चे ही आए थे। स्कूल में केवल शिक्षामित्र सुमन ही मौजूद थी। वहीं, बच्चे कक्षा में खुद ही पढ़ाई कर रहे थे।
मोहद्दीनपुर गांव के प्राइमरी स्कूल का एक भवन जर्जर है। हालांकि बच्चे नए भवन में पढ़ रहे हैं लेकिन जर्जर भवन के पास बच्चे खेलने जाते हैं। दुर्घटना की आशंका रहती है। शिक्षिका मनीषा पंवार प्रशिक्षण में गई थीं।
गांव धनौरी खुर्द के कंपोजिट विद्यालय के प्राइमरी स्कूल में 79 बच्चे पंजीकृत हैं। बुधवार को 55 बच्चे ही आए थे। जूनियर विद्यालय में 47 बच्चे पंजीकृत हैं। बुधवार को 34 बच्चे उपस्थित थे। यहां दो शिक्षिका को अवकाश पर बताया गया, जबकि दो शिक्षामित्र ट्रेनिंग के लिए गई थी। प्राइमरी सेक्शन में चार शिक्षामित्र व चार शिक्षिका हैं। मौके पर दो शिक्षिका व एक शिक्षामित्र थी। विद्यालय परिसर में पानी भरने की वजह से एक कक्ष खाली था। प्रधानाध्यापक भूपेंद्र सैनी ने बताया कि वहां बच्चों के गिरने की आशंका की वजह से कक्ष को खाली कराया गया था।