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पांच साल तक पालने वाली मां से अभद्रता
ब्यूरो/अमर उजाला, अमरोहा
Updated Thu, 31 Mar 2016 12:59 AM IST
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नगर के फाजलपुर मोहल्ला निवासी दयावती के पति किरन पाल की मौत हो चुकी है। दयावती ब्लॉक में सफाई कर्मी के पद पर कार्यरत हैं। इधर, बरेली जनपद की तहसील मीरपुर क्षेत्र के गांव खमारिया साहनी निवासी धर्मपाल पुत्र द्वारिका का पंद्रह वर्षीय बेटा पांच साल पहले लापता हो गया था, जो 22 अप्रैल 2011 को गजरौला के अहरौला तेजवन गांव के जंगल में बेहोशी की हालत में मिला था।
उस समय सूरज ने अपना नाम तो बता दिया लेकिन परिवार के सदस्यों के बारे में नहीं बता सका। जिससे तत्कालीन एडीओ पंचायत मांगो सिंह ने सूरज को दयावती के सुपुर्द कर दिया। एक साल पहले सूरज ने अपने पास रखे मोबाइल सिम से अपने माता-पिता से संपर्क किया। राजी खुशी के बारे में पूछा और अपना भी हाल बताया। लेकिन दयावती का मां जैसा दुलार देख सूरज ने अपने माता-पिता को दयावती का पता नहीं बताया।
छह माह पूर्व दयावती को सूरज का मोबाइल मिला तो उसने कॉल डिटेल चेक की और सूरज के माता-पिता से संपर्क साधा। उन्हें अपने घर बुलाया लेकिन सूरज ने साथ जाने से इनकार कर दिया। सूरज के माता पिता इस पर भी सहमत हो गए। दोनों परिवारों का एक-दूसरे के यहां आना जाना हो गया। सूरज अपने घर नहीं गया। इधर, पंद्रह दिन से सूरज अपनी यशोदा मां दयावती से दुर्व्यवहार करने लगा। दयावती ने बताया कि सूरज घर का सामान तोड़ने लगा।
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वह सहती रही। दो दिन पहले सूरज ने उस पर ही हाथ उठाने की कोशिश की। इस पर उसने बुधवार को उसके माता-पिता को बुला लिया। सूरज के पिता धर्मपाल और मां शांति देवी बुधवार को दयावती के घर पहुंचे। धर्मपाल का कहना है कि उसने अपने बेटे को साथ ले जाने की पहले भी कोशिश की लेकिन बेटे ने ही साथ चलने से इनकार कर दिया।
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उस समय सूरज ने अपना नाम तो बता दिया लेकिन परिवार के सदस्यों के बारे में नहीं बता सका। जिससे तत्कालीन एडीओ पंचायत मांगो सिंह ने सूरज को दयावती के सुपुर्द कर दिया। एक साल पहले सूरज ने अपने पास रखे मोबाइल सिम से अपने माता-पिता से संपर्क किया। राजी खुशी के बारे में पूछा और अपना भी हाल बताया। लेकिन दयावती का मां जैसा दुलार देख सूरज ने अपने माता-पिता को दयावती का पता नहीं बताया।
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छह माह पूर्व दयावती को सूरज का मोबाइल मिला तो उसने कॉल डिटेल चेक की और सूरज के माता-पिता से संपर्क साधा। उन्हें अपने घर बुलाया लेकिन सूरज ने साथ जाने से इनकार कर दिया। सूरज के माता पिता इस पर भी सहमत हो गए। दोनों परिवारों का एक-दूसरे के यहां आना जाना हो गया। सूरज अपने घर नहीं गया। इधर, पंद्रह दिन से सूरज अपनी यशोदा मां दयावती से दुर्व्यवहार करने लगा। दयावती ने बताया कि सूरज घर का सामान तोड़ने लगा।
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वह सहती रही। दो दिन पहले सूरज ने उस पर ही हाथ उठाने की कोशिश की। इस पर उसने बुधवार को उसके माता-पिता को बुला लिया। सूरज के पिता धर्मपाल और मां शांति देवी बुधवार को दयावती के घर पहुंचे। धर्मपाल का कहना है कि उसने अपने बेटे को साथ ले जाने की पहले भी कोशिश की लेकिन बेटे ने ही साथ चलने से इनकार कर दिया।