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Amroha News: हर साल अभियान फिर पांच साल में 1100 से ज्यादा ने गंवाई हादसों में जान

Tue, 19 Nov 2024 02:40 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Tue, 19 Nov 2024 02:40 AM IST
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Campaign every year, then in five years more than 1100 people lost their lives in accidents
अमरोहा। ढोलक की थाप के लिए दूर-दूर तक पहचाने जाने वाले अमरोहा की छवि में अब हादसों का दाग भी लग रहा है।मुरादाबाद-दिल्ली हाईवे का बड़ा हिस्सा अमरोहा जिले से गुजरता है। डिवाइडर वाले फोरलेन हाईवे पर भी हादसे थम नहीं रहे हैं। जबकि, जिले के स्थानीय मार्गों और सर्विस रोड पर भी आए दिन हादसे होते रहते हैं। आलम यह है कि पहली नवंबर से शुरू होने वाले सड़क सुरक्षा माह में भी दुर्घटनाओं पर काबू नहीं पाया नहीं जा सका।
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आंकड़ों पर गौर करें तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आती है। जिले की सड़कों पर पांच साल में 1693 सड़क हादसे हुए , जिनमें 1107 लोगों की जान चली गई। इन हादसों में 586 लोग चोटिल हुए। हादसों की ऐसी स्थिति को एएसपी राजीव कुमार ने भी स्वीकार किया। बताया कि जिले में 51 स्थान ऐसे हैं, जहां सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। पुलिस सर्किल (सीओ क्षेत्र) के हिसाब से बात करें तो अमरोहा नगर और हसनपुर सर्किल में 15-15, मंडी धनौरा में 13 और नौगांवा में आठ स्थान हादसों के लिहाज से संवेदनशील चिह्नित किए गए हैं। बढ़ते हादसों पर जांच पड़ताल भी कराई गई।
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पांच या इससे अधिक बार गंभीर सड़क हादसे होने वाले स्थान की मैपिंग कराई गई। इस कवायद में तेज रफ्तार, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था में कमी हादसों का बड़ा कारण मानी गई। साथ ही संकेतक, रिफ्लेक्टर, स्पीड ब्रेकर, वार्निंग साइन बोर्ड नहीं होना भी दुर्घटनाओं की वजह बनी है। इसके अलावा डिवाइडर पर अवैध कट, ओवर स्पीड, गहरे मोड़ भी हादसे कारण रहे हैं। हालांकि इस कवायद के बाद भी न तो न इन कमियों को दूर किया गया। इनको ब्लैक स्पॉट का दर्जा देकर अतिरिक्त सतर्कता के प्रयास भी देखने को नहीं मिले।
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पांच साल में सबसे ज्यादा हादसे गजरौला में

गजरौला औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण जितना महत्वपूर्ण है, इस कस्बे की उतनी ही अहमियत दिल्ली हाईवे का मुख्य रास्ता होने के कारण है। इसके बाद भी गजरौला और हाईवे पर हादसों की रोकथाम के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास देखने को नहीं मिलते। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक पांच साल में गजरौला में सबसे ज्यादा 347 हादसे हुए हैं। डिडौली में 293, हसनपुर में 191, रजबपुर में 159, नौगांवा सादात में 153, मंडी धनौरा में 115 सैदगली में 101, बछरायूं में 88, अमरोहा देहात में 80, आदमपुर में 71, रहरा में 75, अमरोहा नगर में 20 हादसे हुए हैं।
बाइक सवारों ने उड़ाई नियमों की धज्जियां
सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य अनिल कुमार जग्गा बताते हैं नियमों की अनदेखी ही हादसों का कारण है। नशा और रफ्तार, ओवरलोडेड वाहन, ट्रैक्टर ट्राली और जुगाड़ के साथ सड़क में खामी, सड़कों पर आधे-अधूरे निर्माण कार्य, खराब ट्रैफिक सिग्नल, सड़क पर गलत पार्किंग, सड़क पर खड़े खराब वाहन तमाम ऐसे बिंदु हैं। जिन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। यदि इन खामियों को दूर किया जाए तो हादसे नहीं होंगे। सोमवार को भी शहर में बाइक सवार नियमों की छज्जियां उड़ाते दिखे। किसी बाइक पर चार तो किसी पर तीन सवार लोग सवार थे, किसी ने हेलमेट भी नहीं लगा रखा था।


बिना हेलमेट और मोबाइल फोन का प्रयोग भी है कारण



आज के समय में मोबाइल फोन हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न अंग है। कभी-कभी तो हम मोबाइल के बिना अपने जीवन के बारे में कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। लेकिन, यही मोबाइल सड़क हादसों का मुख्य कारण बनता जा रहा है। आए दिन सड़क पर वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग करने के कारण कई लोग हादसों का शिकार होते हैं। जबकि, बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाना भी खतरे से खाली नहीं है। उधर, तेज गति से वाहन चलाना भी एक फैशन बनता नजर आ रहा है। जिस प्रकार एक से बढ़कर एक हाई स्पीड वाहन बाजार में आए हैं, ठीक वैसे ही इनके प्रयोग से ओवर स्पीडिंग के चलते हादसों की संख्या भी बढ़ी है। तेज गति के चलते ही कई बड़े हादसे हुए हैं। वहीं, ड्रंक एंड ड्राइव यानि शराब पीकर गाड़ी चलाना। अधिकांश होने वाले सड़क हादसों का मुख्य कारण शराब पीकर गाड़ी चलाना भी है।

जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ठोस जमीनी प्रयास भी करने होंगे



जिले के लोग मानते हैं कि बड़ा हादसा होने पर सरकारी मशीनरी तेजी पकड़ती है। कुछ दिनों के लिए कोशिशें दिखती हैं, वरना हादसे रोकने के प्रयास जागरूकता कार्यक्रम या हेलमेट चेकिंग तक सीमित रह जाते हैं। सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य अनिल कुमार जग्गा नियमों की अनदेखी को बड़ा कारण मानते हैं। इनके लिहाज से चेकिंग, जागरूकता के प्रयास होने चाहिए लेकिन ज्यादातर लोग मानते हैं कि सड़कों पर मौजूद कमजोरियों को दूर करने के ठोस प्रयास होने चाहिए। ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग के साथ रोड सेफ्टी से जुड़े अन्य विभागों की सामूहिक कोशिशें होनी चाहिए।
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