{"_id":"6ada44928c88f6c9490db78b","slug":"bawankhedi-murder-case-salim-returns-home-on-parole-for-his-sister-wedding-heavy-police-presence-crowds-gather-2026-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"बावनखेड़ी हत्याकांड: बहन की डोली उठाने पैरोल पर घर आया सलीम, पुलिस का सख्त पहरा, देखने वालों की उमड़ी भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बावनखेड़ी हत्याकांड: बहन की डोली उठाने पैरोल पर घर आया सलीम, पुलिस का सख्त पहरा, देखने वालों की उमड़ी भीड़
Thu, 22 Oct 2026 10:50 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क,अमरोहा
अमर उजाला नेटवर्क,अमरोहा
Published by: Digvijay Singh
Updated Thu, 22 Oct 2026 10:50 PM IST
सार
बावनखेड़ी के चर्चित हत्याकांड में फांसी की सजा पा चुके शबनम के प्रेमी सलीम को बहन की विदाई के लिए सात दिन की कस्टडी पैरोल मिली है। बुधवार रात नैनी जेल से उसे प्रयागराज पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच उसके घर लगाया गया।
विज्ञापन
घर के बाहर लोगों की भीड़ और पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बावनखेड़ी के चर्चित हत्याकांड में फांसी की सजा पा चुके शबनम के प्रेमी सलीम को बहन की विदाई के लिए सात दिन की कस्टडी पैरोल मिली है। बुधवार रात नैनी जेल से उसे प्रयागराज पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच उसके घर लगाया गया। इस दौरान सलीम को देखने के लिए बावनखेड़ी गांव में लोगों की भीड़ जमा रही। हालांकि पुलिस की सख्ती के कारण परिवार के सदस्य के अलावा उससे कोई मिल नहीं सका।
विज्ञापन
14-15 अप्रैल 2008 की रात को प्रेमिका के परिवार के सात लोगों का कत्ल हुआ था। इस दिल दहला देने वाले जुर्म में शबनम और सलीम को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। सलीम नैनी जेल में बंद है। बुधवार की रात जब वह पुलिस सुरक्षा के कड़े घेरे में हसनपुर कोतवाली पहुंचा, तो शांत दिख रहा था। सफेद शर्ट-सफेद पैंट और जेब में पेन लगाए सलीम की शक्ल से लेकर उसके बोलने के अंदाज तक में एक अजीब सी गंभीरता दिखी। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र सरोहा और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ बातचीत के दौरान उसने जिस समझदारी का परिचय दिया, उससे वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
विज्ञापन
उसके पिता अब्दुल रऊफ और माता चमन जहां बताते हैं कि बचपन में अपनी गोद में खेली छोटी बहन आयशा से सलीम को सबसे ज्यादा स्नेह था। आज वही भाई अपनी बहन आयशा की डोली को अपनी नजरों के सामने और अपने हाथों से रुखसत करने के लिए सात दिन के कस्टडी पैरोल पर घर आया है।
विज्ञापन
हालांकि, इस पारिवारिक मिलन के रास्ते में भी कानून का कड़ा पहरा है। सात दिन के इस विशेष पैरोल की शर्तें बेहद सख्त हैं। प्रयागराज से आए दारोगा और पुलिसकर्मियों के साथ-साथ हसनपुर कोतवाली के बावनखेड़ी हल्का प्रभारी श्रीपाल यादव व महिला कांस्टेबल नीता समेत कुल नौ पुलिसकर्मियों का सुरक्षा पहरा उस पर तैनात किया गया है। घर के अंदर भी किसी को सीधे मिलने की अनुमति नहीं है, बल्कि एक कमरे में नियम के तहत केवल चार-चार लोगों को ही उससे मिलवाया जा रहा है।
ये था बावनखेड़ी हत्याकांड का पूरा मामला
बावनखेड़ी गांव के रहने वाले मास्टर शौकत अली की बेटी शबनम के अपने ही गांव के मजदूर सलीम से प्रेम संबंध थे। शबनम के परिवार वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे, क्योंकि दोनों की सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि मेल नहीं खाती थी। इसी रंजिश और साथ रहने की जिद में शबनम और सलीम ने मिलकर एक खौफनाक साजिश रची। 14 अप्रैल 2008 की रात को शबनम ने अपने घर के सभी सदस्यों माता-पिता, दो भाइयों, भाभी, फुफेरी बहन और 10 महीने के मासूम भतीजे समेत कुल सात लोगों को खाने या चाय में नशीली दवा देकर बेहोश कर दिया।
इसके बाद सलीम घर के अंदर दाखिल हुआ और दोनों ने मिलकर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर एक-एक करके परिवार के सात लोगों की निर्मम हत्या कर दी। इस जघन्य हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। पुलिस ने कुछ ही दिनों में मामले का खुलासा कर शबनम और सलीम दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। 15 जुलाई 2010 को निचली अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तक गया, जहां अदालतों ने उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा।
देश के राष्ट्रपति और राज्यपाल के यहां से भी उनकी दया याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। इस समय मुख्य दोषी शबनम जेल में और उसका प्रेमी सलीम प्रयागराज की नैनी जेल में बंद है, जो अब सात दिन की पैरोल पर घर आया है।