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बछिया ही हाेगी, गारंटी साै परसेंट
अमर उजाला/ब्यूराे, अमराेहा
Updated Wed, 29 Jun 2016 01:31 AM IST
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देशी गाय ही बचाएगी
- फोटो : Getty
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बछड़ा नहीं अब गो माता सिर्फ बछिया जनेंगी। जी हां, ऐसा सीमेन बाजार में आ गया है, जिसका प्रयोग भी किसानों ने शुरू कर दिया है। सलोन व करनाल से जनपद में सीमेन मंगाया जा रहा है, जिसे कृत्रिम गर्भाधान के जरिए गायों के अंदर डाला जा रहा है।
एक सफल प्रयोग के बाद तेजी से पशु पालकों का रुझान बछिया के सीमेन की तरफ बढ़ा है। फिलहाल ये सीमेन अभी केवल दो नस्ल की गायों पर ही कारगर साबित होना बताया जा रहा है। एक दौर था जब गो माता से बछड़े के जन्म की चाहत किसान लगाए रहता था।
अगर बछड़ा दिया तो वह उसकी पुरजोर खातिरदारी करता था, क्योंकि लालच था कि ये बड़ा होकर खेतीबाड़ी के काम आएगा, लेकिन मशीनों का खेती में प्रयोग के बाद बछड़े की मांग घटने लगी। धीरे-धीरे किसानों का मन समय के साथ बदलता गया।
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बछड़ों से ज्यादा प्यारी बछिया लगने लगीं। उनसे कुनबा बढ़ाने की नई तरकीब किसानों का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींच रही है। आजकल बाजार में बछिया का सीमेन आ गया है। इंपेटेंड सीमेन से गाय का गर्भाधान किया जाएगा। इसे लिंग निर्धारण डीएफएस या डीप फ्रोजन सीमेन कहा जाता है।
सीमेन में सिर्फ एक्स क्रोमोसोम हैं। कृत्रिम गर्भाधान के बाद गाय केवल बछिया को ही जन्म देगी। रायबरेली जनपद के सलोन स्थित उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद द्वारा भी ये सीमेन किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
यहां से आ रहा सीमेन
जनपद में ये सीमेन सलोन के अलावा हरियाणा के करनाल, रोहतक, पंजाब के पटियाला, उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित एलडीबी से बाजार में आ रहा है। मेडिकल संचालक ही उसको प्राइवेट तौर पर मंगा रहे हैं। सरकार की ओर से गोपालों को अभी ये सुविधा उपलब्ध नहीं हो रही है, लेकिन बाजार से 500 रुपए तक में सीमेन प्राप्त है।
प्रयोग हुआ सफल
अधिकारियों की बात पर यकीन करें तो जिले में बछिया के सीमेन का प्रयोग सफल हुआ है। चकमजदीपुर गांव निवासी सुरेश ने अपनी गाय के कृत्रिम गर्भाधान के जरिए बछिया का सीमेन डलवाया था। इससे बछिया ही पैदा हुई है।
1 लाख 96 हजार पशुओं का होगा कृत्रिम गर्भाधान
जिले में पशु पालन विभाग को 1 लाख 96 हजार पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य मिला है। वर्ष 2012 की गणना के अनुसार जनपद में कुल 1 लाख 49 हजार 502 गौवंशीय व 6 लाख 97 हजार 945 महिषवंशीय पशुओं की संख्या है।
बछिया का सीमेन बाजार में मिल रहा है। 400 से 500 रुपए तक में ये सीमेन किसानों को मुहैया कराया जा रहा है, जिसके नतीजे भी सामने आ रहे हैं। गाय केवल बछिया को ही जन्म दे रही हैं। अभी ये सीमेन जर्सी व होरेस्टिक फ्रीजियन नस्ल की गायों पर ही सफलता हुआ है। अन्य का रिजल्ट स्पष्ट नहीं है।
वंशाराम यादव, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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एक सफल प्रयोग के बाद तेजी से पशु पालकों का रुझान बछिया के सीमेन की तरफ बढ़ा है। फिलहाल ये सीमेन अभी केवल दो नस्ल की गायों पर ही कारगर साबित होना बताया जा रहा है। एक दौर था जब गो माता से बछड़े के जन्म की चाहत किसान लगाए रहता था।
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अगर बछड़ा दिया तो वह उसकी पुरजोर खातिरदारी करता था, क्योंकि लालच था कि ये बड़ा होकर खेतीबाड़ी के काम आएगा, लेकिन मशीनों का खेती में प्रयोग के बाद बछड़े की मांग घटने लगी। धीरे-धीरे किसानों का मन समय के साथ बदलता गया।
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बछड़ों से ज्यादा प्यारी बछिया लगने लगीं। उनसे कुनबा बढ़ाने की नई तरकीब किसानों का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींच रही है। आजकल बाजार में बछिया का सीमेन आ गया है। इंपेटेंड सीमेन से गाय का गर्भाधान किया जाएगा। इसे लिंग निर्धारण डीएफएस या डीप फ्रोजन सीमेन कहा जाता है।
सीमेन में सिर्फ एक्स क्रोमोसोम हैं। कृत्रिम गर्भाधान के बाद गाय केवल बछिया को ही जन्म देगी। रायबरेली जनपद के सलोन स्थित उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद द्वारा भी ये सीमेन किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
यहां से आ रहा सीमेन
जनपद में ये सीमेन सलोन के अलावा हरियाणा के करनाल, रोहतक, पंजाब के पटियाला, उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित एलडीबी से बाजार में आ रहा है। मेडिकल संचालक ही उसको प्राइवेट तौर पर मंगा रहे हैं। सरकार की ओर से गोपालों को अभी ये सुविधा उपलब्ध नहीं हो रही है, लेकिन बाजार से 500 रुपए तक में सीमेन प्राप्त है।
प्रयोग हुआ सफल
अधिकारियों की बात पर यकीन करें तो जिले में बछिया के सीमेन का प्रयोग सफल हुआ है। चकमजदीपुर गांव निवासी सुरेश ने अपनी गाय के कृत्रिम गर्भाधान के जरिए बछिया का सीमेन डलवाया था। इससे बछिया ही पैदा हुई है।
1 लाख 96 हजार पशुओं का होगा कृत्रिम गर्भाधान
जिले में पशु पालन विभाग को 1 लाख 96 हजार पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य मिला है। वर्ष 2012 की गणना के अनुसार जनपद में कुल 1 लाख 49 हजार 502 गौवंशीय व 6 लाख 97 हजार 945 महिषवंशीय पशुओं की संख्या है।
बछिया का सीमेन बाजार में मिल रहा है। 400 से 500 रुपए तक में ये सीमेन किसानों को मुहैया कराया जा रहा है, जिसके नतीजे भी सामने आ रहे हैं। गाय केवल बछिया को ही जन्म दे रही हैं। अभी ये सीमेन जर्सी व होरेस्टिक फ्रीजियन नस्ल की गायों पर ही सफलता हुआ है। अन्य का रिजल्ट स्पष्ट नहीं है।
वंशाराम यादव, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी