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फिजूलखर्ची से बचें और गरीबों की मदद करें
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Tue, 24 May 2016 12:58 AM IST
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इस्लाम
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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जलसा-ए-शब-ए-बरात में उलमाओं ने तमाम अहम बिंदुओं पर तकरीर की। मुसलमानों से फिजूलखर्जी से बचने, गरीबों की मदद करने और शादी ब्याह में दहेज के लेनदेन नहीं करने पर जोर दिया गया।
ईदगाह रोड स्थति सिब्ते रसूल की दरगाह पर आयोजित जलसा-ए-शब-ए-बरात को खिताब करते मुस्लिम स्टूडेंटस आर्र्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सै.मोहम्मद कादरी ने फरमाया कि इस्लाम का मकसद लोगों के दिलों में भाईचारा और मोहब्बत कायम करना है।
गरीबों, जरुरतमंदों को सहारा देना, गरीबों की सहायता करना ही इस्लाम का मकसद है। फरमाया कि इस्लाम इंसानियत को जोड़ने के लिए आया है लेकिन हम मुसलमानों ने इसकी सही तस्वीर पेश करनी बंद कर दी है। शब-ए-बरात पर दिल साफ करके तौबा और माफी मांगोगे तभी गुनाह माफ होंगे। इससे पूर्व जलसे का आगाज हाफिज जमालुद्दीन ने तिलावते कुराने पाक से किया।
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हाफिज मोहम्मद नईम कादरी ने नाते पाक का नजराना पेश किया। जलसे में अहमद हसन तुर्क, डा.अनीस आलम, लिकाउल अमीन, मोहम्मद उमर कादरी, फरदीन हसन, यासिर अंसारी, हाफिज मोहम्मद नईम कादरी, हाफिज जमालुद्दीन, याहिया खान, इश्तियाक मलिक, शाह आलम पाशा, जावेद सैफी, अजीम अहमद, नदीम सिद्दीकी आदि मौजूद थे।
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ईदगाह रोड स्थति सिब्ते रसूल की दरगाह पर आयोजित जलसा-ए-शब-ए-बरात को खिताब करते मुस्लिम स्टूडेंटस आर्र्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सै.मोहम्मद कादरी ने फरमाया कि इस्लाम का मकसद लोगों के दिलों में भाईचारा और मोहब्बत कायम करना है।
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गरीबों, जरुरतमंदों को सहारा देना, गरीबों की सहायता करना ही इस्लाम का मकसद है। फरमाया कि इस्लाम इंसानियत को जोड़ने के लिए आया है लेकिन हम मुसलमानों ने इसकी सही तस्वीर पेश करनी बंद कर दी है। शब-ए-बरात पर दिल साफ करके तौबा और माफी मांगोगे तभी गुनाह माफ होंगे। इससे पूर्व जलसे का आगाज हाफिज जमालुद्दीन ने तिलावते कुराने पाक से किया।
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हाफिज मोहम्मद नईम कादरी ने नाते पाक का नजराना पेश किया। जलसे में अहमद हसन तुर्क, डा.अनीस आलम, लिकाउल अमीन, मोहम्मद उमर कादरी, फरदीन हसन, यासिर अंसारी, हाफिज मोहम्मद नईम कादरी, हाफिज जमालुद्दीन, याहिया खान, इश्तियाक मलिक, शाह आलम पाशा, जावेद सैफी, अजीम अहमद, नदीम सिद्दीकी आदि मौजूद थे।