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अल्टीमेटमः बान नदी से पांच दिन में हटा लें कब्जा
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Fri, 27 May 2016 01:54 AM IST
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अमरोहा कलक्ट्रेट सभागार में बाननदी का नक्शा देखते तहसीलदार
- फोटो : amar ujala
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बान की खुदाई के फरमान से नदी की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे रसूखदारों में खलबली मच गई है। हाथ से मुफ्त की जमीन निकलती देख खुदाई रुकवाने की कोशिश शुरू कर दी है। राजस्व कर्मचारियों से संपर्क साधकर जमीन बचाने की जुगत में लग गए हैं।
प्रशासन ने बान नदी की जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए अवैध कब्जेदारों को पांच दिन का अल्टीमेटम दिया है। नदी की जमीन से फसल और पेड़ों को हटाने के आदेश दिए गए हैं। 31 मई से नदी की खुदाई शुरू करने की योजना है।
डीएम ने दो टूक कह दिया है कि समयांतराल में यदि फसलों को नहीं हटाया गया, तो उस पर प्रशासन का कब्जा हो जाएगा। इस फरमान से अवैध कब्जेदारों में जहां खलबली मच गई है, वहीं रसूखदार किसी भी कीमत पर मुफ्त की जमीन को बचाने की जुगत में जुट गए हैं।
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एक राजस्व कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास लगातार अवैध कब्जेदारों के फोन आ रहे हैं और पूछ रहे हैं कि किस तरह से नदी की खुदवाई रुवाई जाए ताकि उनकी जमीन बच सके। ऐसी हालत हरेक हल्के के राजस्व कर्मचारी की है। फिलहाल बान नदी की जमीन पर कब्जा कराने वाले राजस्व कर्मचारी रसूखदारों से बचते नजर आ रहे हैं, क्योंकि अब नदी की खुदाई की उम्मीद जागी है और कई संगठन खुदाई के लिए अपने फावड़े तैयार करने में भी जुटे हुए हैं।
नाप-जोख करने पहुंची बाढ़ खंड की टीम
अमरोहा (ब्यूरो)। बान नदी की आन बचाने के लिए अमर उजाला की ओर से चलाया गया अभियान अब रंग लाने लगा है। खुदाई की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। बृहस्पतिवार को खाढ़ खंड विभाग की टीम ने गांवों में पहुंचकर नदी खुदाई को नापजोख की। वाटर लेविल की माप की।
पुलों के पास नदी की चौड़ाई और धरातल पर चौड़ाई और क्षेत्रफल पर अतिक्रमण को चिंह्ति किया। नापजोख के आधार ही खुदाई को एस्टीमेट तैयार होगा। शुक्रवार तक एस्टीमेट तैयार हो जाएगा। उधर, कलक्ट्रेट में लेखपाल और तकनीकी विशेषज्ञों ने बान नदी के नक्शे खंगाले। पूरी दिन कागजी कार्रवाई पूरी करने में टीम कलक्ट्रेट में जुटी रही।
सूख चुकी बान नदी को पुनर्जीवित कराने के लिए अमर उजाला ने अभियान चलाया है। अब उजाला की मुहिम परवान चढ़ने लगी है। प्रशासन नदी खुदाई को आगे आया है। बुधवार को डीएम वेद प्रकाश ने कलक्ट्रेट में बैठक लेते हुए 31 मई से नदी खुदाई के आदेश जारी किए थे।
दो दिन में एस्टीमेट तैयार करने को कहा था। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बाढ़ खंड विभाग के अधिशासी अभियंता सुंदर सिंह यादव ने टीम के साथ गावों में पहुंचकर बान नदी खुदाई को नामजोख की। वाटर लेबिल की नाप की। साथ ही पुलों के पास नदी की चौड़ाई कितनी है और धरातल पर नदी कितनी चौड़ाई है।
कितने क्षेत्रफल पर अतिक्रमण कर लिया गया है। कई बिंदुओं पर नामजोख की। इसी के आधार पर खुदाई पर आने वाले खर्चे का आंकलन करते हुए एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। सुंदर सिंह यादव ने बताया कि बताया कि शुक्रवार तक एस्टीमेट तैयार कर लिया जाएगा।
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प्रशासन ने बान नदी की जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए अवैध कब्जेदारों को पांच दिन का अल्टीमेटम दिया है। नदी की जमीन से फसल और पेड़ों को हटाने के आदेश दिए गए हैं। 31 मई से नदी की खुदाई शुरू करने की योजना है।
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डीएम ने दो टूक कह दिया है कि समयांतराल में यदि फसलों को नहीं हटाया गया, तो उस पर प्रशासन का कब्जा हो जाएगा। इस फरमान से अवैध कब्जेदारों में जहां खलबली मच गई है, वहीं रसूखदार किसी भी कीमत पर मुफ्त की जमीन को बचाने की जुगत में जुट गए हैं।
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एक राजस्व कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास लगातार अवैध कब्जेदारों के फोन आ रहे हैं और पूछ रहे हैं कि किस तरह से नदी की खुदवाई रुवाई जाए ताकि उनकी जमीन बच सके। ऐसी हालत हरेक हल्के के राजस्व कर्मचारी की है। फिलहाल बान नदी की जमीन पर कब्जा कराने वाले राजस्व कर्मचारी रसूखदारों से बचते नजर आ रहे हैं, क्योंकि अब नदी की खुदाई की उम्मीद जागी है और कई संगठन खुदाई के लिए अपने फावड़े तैयार करने में भी जुटे हुए हैं।
नाप-जोख करने पहुंची बाढ़ खंड की टीम
अमरोहा (ब्यूरो)। बान नदी की आन बचाने के लिए अमर उजाला की ओर से चलाया गया अभियान अब रंग लाने लगा है। खुदाई की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। बृहस्पतिवार को खाढ़ खंड विभाग की टीम ने गांवों में पहुंचकर नदी खुदाई को नापजोख की। वाटर लेविल की माप की।
पुलों के पास नदी की चौड़ाई और धरातल पर चौड़ाई और क्षेत्रफल पर अतिक्रमण को चिंह्ति किया। नापजोख के आधार ही खुदाई को एस्टीमेट तैयार होगा। शुक्रवार तक एस्टीमेट तैयार हो जाएगा। उधर, कलक्ट्रेट में लेखपाल और तकनीकी विशेषज्ञों ने बान नदी के नक्शे खंगाले। पूरी दिन कागजी कार्रवाई पूरी करने में टीम कलक्ट्रेट में जुटी रही।
सूख चुकी बान नदी को पुनर्जीवित कराने के लिए अमर उजाला ने अभियान चलाया है। अब उजाला की मुहिम परवान चढ़ने लगी है। प्रशासन नदी खुदाई को आगे आया है। बुधवार को डीएम वेद प्रकाश ने कलक्ट्रेट में बैठक लेते हुए 31 मई से नदी खुदाई के आदेश जारी किए थे।
दो दिन में एस्टीमेट तैयार करने को कहा था। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बाढ़ खंड विभाग के अधिशासी अभियंता सुंदर सिंह यादव ने टीम के साथ गावों में पहुंचकर बान नदी खुदाई को नामजोख की। वाटर लेबिल की नाप की। साथ ही पुलों के पास नदी की चौड़ाई कितनी है और धरातल पर नदी कितनी चौड़ाई है।
कितने क्षेत्रफल पर अतिक्रमण कर लिया गया है। कई बिंदुओं पर नामजोख की। इसी के आधार पर खुदाई पर आने वाले खर्चे का आंकलन करते हुए एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। सुंदर सिंह यादव ने बताया कि बताया कि शुक्रवार तक एस्टीमेट तैयार कर लिया जाएगा।