Amroha Seat: 20 साल पहले निर्दलीय ने तोड़ा राजनीतिक पार्टियों का तिलिस्म, हरीश ने दी थी दिग्गजों को शिकस्त
अमरोहा लोकसभा सीट पर 2004 में में निर्दलीय उम्मीदवार हरीश नागपाल से सभी को पछाड़ते हुए चुनाव जीत लिया था। उन्होंने इस पर सीट पर पहली बार राजनीतिक दलों को पीछे छोड़कर रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया। इसके बाद हुए चुनाव में अब तक कोई भी निर्दलीय नहीं जीत सका है।
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अमरोहा लोकसभा सीट हर राजनीतिक दल को रास आई है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार को भी यहां की जनता ने एक बार ही देश की सर्वोच्च पंचायत यानी संसद भवन तक पहुंचाया था। 20 साल पहले यानी 2004 में निर्दलीय चुनाव लड़ने वाली हरीश नागपाल ने दिग्गज नेताओं को शिकस्त देकर चौंका दिया था।
हालांकि, उसके बाद लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी कभी जीत हासिल नहीं कर सका है। कहने को हर बार चुनाव में कई निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे, लेकिन मतदाताओं को वह रास नहीं आए। अमरोहा लोकसभा सीट वर्ष 1957 में अस्तित्व में आई। जिसके बाद से यह सीट हर बार चुनाव चर्चाओं में रही।
अभी तक इस सीट पर 17 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। यहां से कांग्रेस, सपा, भाजपा और बसपा दलों के प्रत्याशी सांसद बने। मगर, निर्दलीय ने भी संसद भवन तक रास्ता तय किया। वर्ष 2004 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर हरीश नागपाल मैदान में उतरे। उन्होंने रालोद प्रत्याशी महमूद मदनी को हराकर जीत हासिल की।
हरीश नागपाल को 287522 तो महमूद मदनी को 269638 वोट मिले। उसके बाद 2009, 2014 और 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में कई-कई निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में ठाल ठोकने उतरे, लेकिन किसी को जीत नसीब नहीं हो सकी। या यूं कहें कि कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी अमरोहा की जनता को रास नहीं आया।
1971 में दूसरे नंबर पर रहे चंद्रपाल सिंह
वर्ष 1971 में हुए लोकसभा चुनाव में चंद्रपाल सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे थे। जबकि, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से इशाक संभली भी मैदान थे। इस चुनाव में दोनों के बीच कड़ी टक्कर रही थी। हालांकि, इशाक संभली को जीत मिली और उन्होंने 92580 वोट मिले। जबकि चंद्रपाल सिंह 61538 वोट हासिल करते हुए दूसरे नंबर पर रहे थे।
1996 में सबसे अधिक 24 निर्दलीय प्रत्याशी उतरे मैदान में
1996 के लोकसभा चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव रण में उतरे थे। राजनीतिक पार्टियों समेत 31 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। जबकि, इसमें 24 प्रत्याशी निर्दलीय थे। जोकि, अमरोहा में अब तक के चुनावों में सबसे बड़ी संख्या है।
2004 में चेतन चौहान को मिली थी बड़ी हार
2004 के चुनाव पहले भाजपा नेता चेतन चौहान ने दो बार इस लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया था। 1991 में पहली बार वह सांसद चुने जाने के बाद 1998 में वह दूसरे जीते। हालांकि, 1996 में उन्हें हार मिली और दूसरे नंबर पर रहे। वहीं, 2004 में उन्हें अपने राजनीतिक कॅरिअर की बड़ी हार मिली। 130516 वोटों के साथ वह चौथे नंबर पर रहे। जबकि, हरीश नागपाल निर्दलीय के तौर पर बड़ी जीत मिली।
1962 04
1967 04
1971 04
1977 06
1980 17
1984 13
1989 10
1991 16
1996 24
1998 07
1999 05
2004 07
2009 11
2014 03
2019 05