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गोवंश मारकर सौहार्द बिगाड़ने के षड्यंत्र का दर्ज हुआ था मामला
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सांथलपुर गोशाला में चार अगस्त को 61 गोवंशों की मौत की गूंज शासन तक पहुंचने से प्रशासन तत्काल सख्त एक्शन के मोड में आ गया था। ग्राम पंचायत अधिकारी मोहम्मद अनस के निलंबन के साथ एक-एक कर 11 गिरफ्तारियां की थीं। इस मामले में आपराधिक षड्यंत्र के तहत सौहार्द बिगाड़ने की नीयत से गोवंशों को मारने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस मामले में गंगेश्वरी की बीडीओ रेनू कुमारी की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया था कि ताहिर अपने साथियों के साथ गायों के लिए चारा लेकर आया था। चारा खाने के बाद अचानक गोवंशों की हालत बिगड़ने लगी और देखते-देखते 61 गोवंशों की मौत हो गई थी। सौ से ज्यादा गोवंश बीमार हुए थे। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि ताहिर ने अपने साथियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र के तहत दो वर्गों के बीच सौहार्द बिगाड़ने, लोकशांति भंग करने के उद्देश्य से गोवंशों के चारे में जानबूझकर जहरीला पदार्थ मिलाकर उनकी हत्या की है। पुलिस ने जांच पड़ताल की और ग्राम प्रधान रामौतार की भूमिका भी संदिग्ध पाई थी। इसके बाद पुलिस ने ग्राम प्रधान रामौतार, ग्राम पंचायत अधिकारी मोहम्मद अनस, ताहिर समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एसपी आदित्य लांग्हे ने बताया कि ग्राम प्रधान रामौतार के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की गई है। मुख्य आरोपी ताहिर के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सांथलपुर गोशाला में 61 गोवंशों की मौत के मामले में रासुका में निरुद्ध किए गए ग्राम प्रधान रामौतार के दो बड़े भाई विधायक रह चुके हैं।
रामौतार के बड़े भाई प्रीतम सिंह वर्ष 1991 व 1993 में गंगेश्वरी सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में प्रीतम सिंह सपा में शामिल हो गए हैं। दूसरे बड़े भाई हरपाल सिंह वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में गंगेश्वरी से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। हरपाल सिंह भाजपा को छोड़कर बसपा में शामिल हुए और 2022 के विधानसभा चुनाव में धनौरा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ेे थे। इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली थी।
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पूर्व विधायक प्रीतम सिंह का कहना है कि उनके भाई ग्राम प्रधान रामौतार निर्दोष हैं। राजनीतिक द्वेष के कारण परिवार से बदला लेने के लिए भाई पर एनएसए की कार्रवाई की गई है, जो गलत है। संवाद
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इस मामले में गंगेश्वरी की बीडीओ रेनू कुमारी की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया था कि ताहिर अपने साथियों के साथ गायों के लिए चारा लेकर आया था। चारा खाने के बाद अचानक गोवंशों की हालत बिगड़ने लगी और देखते-देखते 61 गोवंशों की मौत हो गई थी। सौ से ज्यादा गोवंश बीमार हुए थे। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि ताहिर ने अपने साथियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र के तहत दो वर्गों के बीच सौहार्द बिगाड़ने, लोकशांति भंग करने के उद्देश्य से गोवंशों के चारे में जानबूझकर जहरीला पदार्थ मिलाकर उनकी हत्या की है। पुलिस ने जांच पड़ताल की और ग्राम प्रधान रामौतार की भूमिका भी संदिग्ध पाई थी। इसके बाद पुलिस ने ग्राम प्रधान रामौतार, ग्राम पंचायत अधिकारी मोहम्मद अनस, ताहिर समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एसपी आदित्य लांग्हे ने बताया कि ग्राम प्रधान रामौतार के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की गई है। मुख्य आरोपी ताहिर के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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सांथलपुर गोशाला में 61 गोवंशों की मौत के मामले में रासुका में निरुद्ध किए गए ग्राम प्रधान रामौतार के दो बड़े भाई विधायक रह चुके हैं।
रामौतार के बड़े भाई प्रीतम सिंह वर्ष 1991 व 1993 में गंगेश्वरी सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में प्रीतम सिंह सपा में शामिल हो गए हैं। दूसरे बड़े भाई हरपाल सिंह वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में गंगेश्वरी से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। हरपाल सिंह भाजपा को छोड़कर बसपा में शामिल हुए और 2022 के विधानसभा चुनाव में धनौरा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ेे थे। इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली थी।
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पूर्व विधायक प्रीतम सिंह का कहना है कि उनके भाई ग्राम प्रधान रामौतार निर्दोष हैं। राजनीतिक द्वेष के कारण परिवार से बदला लेने के लिए भाई पर एनएसए की कार्रवाई की गई है, जो गलत है। संवाद