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सूबे के 24 गन्ना बहुल जिलों में तिलहन-दलहन की खेती पर जोर
Updated Mon, 28 May 2018 01:47 AM IST
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गजरौला। गन्ने की बढ़ती पैदावार। बंपर चीनी उत्पादन और अटक रहे गन्ना भुगतान लेकर शासन ने खेती करने का रुख दूसरी तरफ मोड़ने की मंशा बनाई है। सूबे के 24 गन्ना बहुल जिलों में तिलहन-दलहन की खेती पर जोर दिया जाएगा। गन्ने के साथ साथ सहफसली खेती के लिए खाका तैयार कर लिया गया है। अमरोहा में 250 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला है। जिसमें किसानों को अनुदान भी दिया जाना है।
गन्ना आयुक्त ने हाल ही में आदेश जारी किए हैं। जिसमें कृषि विभाग की नीतियों बदलाव का संकेत दिया गया। आदेशों में कहा गया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सरकार तिलहन और दलहन के उत्पादन पर जोर दे रही है। गौरतलब है कि दाल और तिलहन के फसलों के दाम आसमान छू रहे हैं। दालों के दामों पर काबू करने के लिए आयात करना मजबूरी बन जाता है। वहीं गन्ना किसान भी इन दिनों परेशान है।
देशभर में चीनी का बंपर उत्पादन हुआ है। इससे चीनी के रेट कम हो गए। जिसके चलते चीनी मिलों को नुकसान हो रहा है। वहीं गन्ना किसानों का भुगतान अटक जाता है। इसके बदले किसान सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हैं। इस साल तो ऐसा हुआ कि गन्ने की पेराई करना मुश्किल हो गया। बढ़ती पैदावार ने चीनी मिलों की क्षमता बढ़ाने के हालात पैदा कर दिए हैं। वहीं शीरा का भयंकर स्टॉक चीनी मिलों के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
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इन हालातों से निपटने के लिए सरकार सहफसली खेती करने पर जोर दे रही है। जिसके लिए गन्ने के साथ तिलहन और दलहन की खेती कराई जाएगी। जल्द ही जागरूकता अभियान चलेगा। वहीं योजना को बढ़ावा देने के लिए प्रति हेक्टेयर नौ हजार रुपये के अनुदान की व्यवस्था की गई। अमरोहा को 250 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला है। 24 जिलों में 6287 हेक्टेयर जमीन में दलहन और तिलहन की सहफसली खेती कराई जाएगी।
छोटी छोटी जरूरतें होंगी पूरी
तिलहन और दलहन की खेती ने जोर पकड़ा तो किसानों की आमदनी बढ़ जाएगी। बेहद कम दिनों में तैयार होने वाली इन फसलों से किसानों को कम समय में पैसा मिल जाएगा। जिससे छोटी छोटी जरुरतें पूरी कर सकेगा। फिलहाल गन्ने की निर्भरता के चलते बुआई के एक से डेढ़ साल किसानों के हाथ में भुगतान आता है। जिस कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। अगर गन्ना भुगतान में देरी हो जाए तो यह काफी मुश्किल खड़ी करता है।
गन्ना आयुक्त ने हाल ही में निर्देश जारी किए है। गन्ने के साथ साथ तिलहन और दलहन की खेती पर जोर रहेगा। इसमें किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा। वहीं गन्ना भुगतान की आस लगाए बैठे रहने वाले किसानों को दूसरी फसल से आमदनी होने लगेगी।-विजय बहादुर सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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गन्ना आयुक्त ने हाल ही में आदेश जारी किए हैं। जिसमें कृषि विभाग की नीतियों बदलाव का संकेत दिया गया। आदेशों में कहा गया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सरकार तिलहन और दलहन के उत्पादन पर जोर दे रही है। गौरतलब है कि दाल और तिलहन के फसलों के दाम आसमान छू रहे हैं। दालों के दामों पर काबू करने के लिए आयात करना मजबूरी बन जाता है। वहीं गन्ना किसान भी इन दिनों परेशान है।
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देशभर में चीनी का बंपर उत्पादन हुआ है। इससे चीनी के रेट कम हो गए। जिसके चलते चीनी मिलों को नुकसान हो रहा है। वहीं गन्ना किसानों का भुगतान अटक जाता है। इसके बदले किसान सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हैं। इस साल तो ऐसा हुआ कि गन्ने की पेराई करना मुश्किल हो गया। बढ़ती पैदावार ने चीनी मिलों की क्षमता बढ़ाने के हालात पैदा कर दिए हैं। वहीं शीरा का भयंकर स्टॉक चीनी मिलों के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
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इन हालातों से निपटने के लिए सरकार सहफसली खेती करने पर जोर दे रही है। जिसके लिए गन्ने के साथ तिलहन और दलहन की खेती कराई जाएगी। जल्द ही जागरूकता अभियान चलेगा। वहीं योजना को बढ़ावा देने के लिए प्रति हेक्टेयर नौ हजार रुपये के अनुदान की व्यवस्था की गई। अमरोहा को 250 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला है। 24 जिलों में 6287 हेक्टेयर जमीन में दलहन और तिलहन की सहफसली खेती कराई जाएगी।
छोटी छोटी जरूरतें होंगी पूरी
तिलहन और दलहन की खेती ने जोर पकड़ा तो किसानों की आमदनी बढ़ जाएगी। बेहद कम दिनों में तैयार होने वाली इन फसलों से किसानों को कम समय में पैसा मिल जाएगा। जिससे छोटी छोटी जरुरतें पूरी कर सकेगा। फिलहाल गन्ने की निर्भरता के चलते बुआई के एक से डेढ़ साल किसानों के हाथ में भुगतान आता है। जिस कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। अगर गन्ना भुगतान में देरी हो जाए तो यह काफी मुश्किल खड़ी करता है।
गन्ना आयुक्त ने हाल ही में निर्देश जारी किए है। गन्ने के साथ साथ तिलहन और दलहन की खेती पर जोर रहेगा। इसमें किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा। वहीं गन्ना भुगतान की आस लगाए बैठे रहने वाले किसानों को दूसरी फसल से आमदनी होने लगेगी।-विजय बहादुर सिंह, जिला गन्ना अधिकारी