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Amethi News: महिलाओं ने 50 रुपये की बचत से शुरु किया कारोबार
Fri, 24 Jan 2025 12:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 24 Jan 2025 12:29 AM IST
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अमेठी सिटी। जिले के सिंहपुर गांव स्थित जय हनुमान महिला स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। समूह में काम करने वाली महिलाओं ने 2.10 लाख रुपये की लागत से केला फाइबर (केले के रेशे से सामान) बनाने का व्यवसाय शुरू किया। इस कारोबार को बढ़ा कर आज महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं।
जय हनुमान महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं ने वर्ष 2021 में समूह की शुरुआत की थी। समूह में कुल 12 महिलाएं हैं। इन महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, एनआरएलएम से जुड़कर 50 रुपये प्रतिमाह जमा करना शुरू किया। महिलाओं ने प्रति माह 50 रुपये जमा कर आज अपनी आमदनी प्रति महिला प्रति माह तीन से चार हजार रुपये तक पहुंचा दी है। समूह की सचिव नारायण देई, पूजा रावत, मिथिलेश, नीलू, किशोरा देवी, रमाकांती, सुषमा, राजदेई, देवकला, इंद्रावती, सुमन पाल और सारिका ने मिलकर फाइबर (केले के रेशे से सामान) बनाने का कारोबार शुरू किया।
महिलाओं ने समूह से ही 10 हजार रुपये तो नाबार्ड से दो लाख रुपये के अनुदान पर मिली मशीनों के माध्यम से व्यवसाय को गति दी। इस धनराशि से महिलाओं ने मशीन, उपकरण व कच्चा सामान खरीदा। सामान बनाने के लिए एक्सटेंशन मशीन, कटर मशीन, हैंडलूम, ट्यूस्टिंग मशीन व सिलाई मशीन है। नारायण देई बताती हैं कि आसपास से केले का तना खरीद कर लाती हैं। मशीन से केले के तने से रेशा निकालने के बाद उसकी धुलाई, सुखाई, रंगाई, बुनाई आदि का कार्य होता है।
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कपड़ा तैयार होने के बाद सिलाई कर अलग-अलग सामान तैयार किया जाता है। इससे बैग, पूजा असनी, डोर मैट, पावदान, टोपी, चप्पल, पर्स आदि सामान तैयार कर स्थानीय बाजार के साथ बाहर भी प्रदर्शनी में बेचती हैं। उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय से प्रति महिला प्रति माह करीब तीन से चार हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इस कार्य को बड़े स्तर पर पहुंचाया जाएगा, इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।
पहले थीं आश्रित, अब चला रहीं परिवार
समूह की सचिव नारायन देई ने बताया कि समूह में जुड़ने से पहले वह व अन्य महिलाएं बेरोजगार थीं। अपने पति व परिजनों पर ही आश्रित थीं। जरूरत पड़ने पर परिजनों से रुपये मांगने पड़ते थे। जब से वह समूह से जुड़ीं और आमदनी शुरू हुई तो अब वह पैरों पर खड़ी हैं। अब वह परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने में मदद कर रही हैं। बताया कि जिले से लेकर कई कृषि विवि की ओर से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
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जय हनुमान महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं ने वर्ष 2021 में समूह की शुरुआत की थी। समूह में कुल 12 महिलाएं हैं। इन महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, एनआरएलएम से जुड़कर 50 रुपये प्रतिमाह जमा करना शुरू किया। महिलाओं ने प्रति माह 50 रुपये जमा कर आज अपनी आमदनी प्रति महिला प्रति माह तीन से चार हजार रुपये तक पहुंचा दी है। समूह की सचिव नारायण देई, पूजा रावत, मिथिलेश, नीलू, किशोरा देवी, रमाकांती, सुषमा, राजदेई, देवकला, इंद्रावती, सुमन पाल और सारिका ने मिलकर फाइबर (केले के रेशे से सामान) बनाने का कारोबार शुरू किया।
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महिलाओं ने समूह से ही 10 हजार रुपये तो नाबार्ड से दो लाख रुपये के अनुदान पर मिली मशीनों के माध्यम से व्यवसाय को गति दी। इस धनराशि से महिलाओं ने मशीन, उपकरण व कच्चा सामान खरीदा। सामान बनाने के लिए एक्सटेंशन मशीन, कटर मशीन, हैंडलूम, ट्यूस्टिंग मशीन व सिलाई मशीन है। नारायण देई बताती हैं कि आसपास से केले का तना खरीद कर लाती हैं। मशीन से केले के तने से रेशा निकालने के बाद उसकी धुलाई, सुखाई, रंगाई, बुनाई आदि का कार्य होता है।
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कपड़ा तैयार होने के बाद सिलाई कर अलग-अलग सामान तैयार किया जाता है। इससे बैग, पूजा असनी, डोर मैट, पावदान, टोपी, चप्पल, पर्स आदि सामान तैयार कर स्थानीय बाजार के साथ बाहर भी प्रदर्शनी में बेचती हैं। उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय से प्रति महिला प्रति माह करीब तीन से चार हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इस कार्य को बड़े स्तर पर पहुंचाया जाएगा, इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।
पहले थीं आश्रित, अब चला रहीं परिवार
समूह की सचिव नारायन देई ने बताया कि समूह में जुड़ने से पहले वह व अन्य महिलाएं बेरोजगार थीं। अपने पति व परिजनों पर ही आश्रित थीं। जरूरत पड़ने पर परिजनों से रुपये मांगने पड़ते थे। जब से वह समूह से जुड़ीं और आमदनी शुरू हुई तो अब वह पैरों पर खड़ी हैं। अब वह परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने में मदद कर रही हैं। बताया कि जिले से लेकर कई कृषि विवि की ओर से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।