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Amethi News: एक गांव से उठीं तीन अर्थियां, हर आंख से छलके आंसू
Thu, 29 Oct 2026 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Thu, 29 Oct 2026 12:39 AM IST
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भेंटुआ के पीपरपुर रामपुर गांव में मृतक रोहित के घर पर बैठे गमगीन परिजन।-संवाद
मुंशीगंज। भेंटुआ के रामापुर गांव में बुधवार सुबह हर तरफ चीख-पुकार और सिसकियां सुनाई दे रही थीं। गलियों में लोगों की भीड़ जुटी थी। तीन घरों से एक के बाद एक अर्थियां उठीं तो परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। किसी मां की गोद सूनी हो गई तो किसी बहन से भाई का साया छिन गया। परिजनों को संभालने पहुंचे ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक सके। एक साथ पले-बढ़े तीन दोस्तों की मौत ने पूरे गांव को गम में डुबो दिया।
मजदूरी करके घर लौट रहे विशाल कोरी (18), ईशू कोरी (20) और रोहित (18) की मौत से तीन परिवारों की खुशियां उजड़ गईं। बुधवार सुबह तीनों के घरों में रिश्तेदारों और परिचितों की भीड़ जुटी रही। विशाल की मां मीना की आंखें बार-बार बेटे को तलाशती रहीं। बहन कोमल और भाई श्रवण का रो-रोकर बुरा हाल था।
ईशू की मां रंगीता और पिता दल बहादुर कोरी उर्फ कल्लू सदमे में थे। भाई लकी, सक्षम और बहन बिनश भी भाई को याद कर बिलख रहे थे। रोहित की मां सरिता, भाई मोहित और बहन शिवानी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वंशराज ने कहा कि तीनों दोस्त हमेशा साथ रहते थे। गांव में उन्हें अक्सर एक साथ देखा जाता था। उनकी मौत से पूरे गांव को गहरा दुख पहुंचा है।
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सुरेंद्र ने बताया कि तीनों कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी उठा रहे थे। मजदूरी करके घरवालों की मदद करते थे। उनके जाने से परिवारों का सहारा छिन गया। सुरेश यादव ने बताया कि बुधवार सुबह तीनों की अर्थियां उठीं तो गांव का हर व्यक्ति भावुक हो गया। परिजनों को रोते देखकर ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक सके। शिवेंद्र ने कहा कि तीनों की दोस्ती ऐसी थी कि वे हर जगह साथ दिखाई देते थे। किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन तीनों की अर्थियां भी साथ उठेंगी।
परिवार का सहारा बनने निकले थे तीनों
विशाल, ईशू और रोहित कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियां समझने लगे थे। मजदूरी करके वे घर का खर्च चलाने में मदद करते थे। परिजनों को उम्मीद थी कि मेहनत के दम पर तीनों परिवार की स्थिति बेहतर करेंगे। किसी को अंदाजा नहीं था कि रोजी-रोटी कमाने निकले उनके बेटे और भाई कभी लौटकर नहीं आएंगे। हादसे ने तीन परिवारों की उम्मीदें छीन लीं। अब घरों में उनकी यादें और बिछड़ने का असहनीय दुख रह गया है।
हमेशा साथ रहते थे तीनों दोस्त
ग्रामीणों के मुताबिक विशाल, ईशू और रोहित को गांव में अक्सर साथ देखा जाता था। तीनों मजदूरी के लिए भी साथ निकलते थे। परिवार की मदद करने और भविष्य संवारने की कोशिश में वे एक-दूसरे के साथ थे। बुधवार को जब तीनों की अर्थियां एक के बाद एक उठीं तो लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि हमेशा साथ रहने वाले दोस्त अब कभी नहीं लौटेंगे। तीन घरों से उठती चीखों के बीच ग्रामीण परिजनों को संभालते रहे। पूरे गांव में शोक छाया रहा।
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मजदूरी करके घर लौट रहे विशाल कोरी (18), ईशू कोरी (20) और रोहित (18) की मौत से तीन परिवारों की खुशियां उजड़ गईं। बुधवार सुबह तीनों के घरों में रिश्तेदारों और परिचितों की भीड़ जुटी रही। विशाल की मां मीना की आंखें बार-बार बेटे को तलाशती रहीं। बहन कोमल और भाई श्रवण का रो-रोकर बुरा हाल था।
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ईशू की मां रंगीता और पिता दल बहादुर कोरी उर्फ कल्लू सदमे में थे। भाई लकी, सक्षम और बहन बिनश भी भाई को याद कर बिलख रहे थे। रोहित की मां सरिता, भाई मोहित और बहन शिवानी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वंशराज ने कहा कि तीनों दोस्त हमेशा साथ रहते थे। गांव में उन्हें अक्सर एक साथ देखा जाता था। उनकी मौत से पूरे गांव को गहरा दुख पहुंचा है।
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सुरेंद्र ने बताया कि तीनों कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी उठा रहे थे। मजदूरी करके घरवालों की मदद करते थे। उनके जाने से परिवारों का सहारा छिन गया। सुरेश यादव ने बताया कि बुधवार सुबह तीनों की अर्थियां उठीं तो गांव का हर व्यक्ति भावुक हो गया। परिजनों को रोते देखकर ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक सके। शिवेंद्र ने कहा कि तीनों की दोस्ती ऐसी थी कि वे हर जगह साथ दिखाई देते थे। किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन तीनों की अर्थियां भी साथ उठेंगी।
परिवार का सहारा बनने निकले थे तीनों
विशाल, ईशू और रोहित कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियां समझने लगे थे। मजदूरी करके वे घर का खर्च चलाने में मदद करते थे। परिजनों को उम्मीद थी कि मेहनत के दम पर तीनों परिवार की स्थिति बेहतर करेंगे। किसी को अंदाजा नहीं था कि रोजी-रोटी कमाने निकले उनके बेटे और भाई कभी लौटकर नहीं आएंगे। हादसे ने तीन परिवारों की उम्मीदें छीन लीं। अब घरों में उनकी यादें और बिछड़ने का असहनीय दुख रह गया है।
हमेशा साथ रहते थे तीनों दोस्त
ग्रामीणों के मुताबिक विशाल, ईशू और रोहित को गांव में अक्सर साथ देखा जाता था। तीनों मजदूरी के लिए भी साथ निकलते थे। परिवार की मदद करने और भविष्य संवारने की कोशिश में वे एक-दूसरे के साथ थे। बुधवार को जब तीनों की अर्थियां एक के बाद एक उठीं तो लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि हमेशा साथ रहने वाले दोस्त अब कभी नहीं लौटेंगे। तीन घरों से उठती चीखों के बीच ग्रामीण परिजनों को संभालते रहे। पूरे गांव में शोक छाया रहा।