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Amethi News: गैर प्रांतों तक फैला है नकली खाद व कीटनाशक गिरोह का नेटवर्क
Fri, 02 Jan 2026 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:23 AM IST
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अमेठी। कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष डॉ. देवमणि तिवारी के प्रमोद आलोक इंटर कॉलेज में मंगलवार को पकड़े गए नकली कीटनाशक और उर्वरक फैक्टरी मामले की जांच आगे बढ़ने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। यह अवैध कारोबार केवल एक जिले तक सीमित नहीं है।
इसका नेटवर्क आसपास के कई जिलों और प्रदेशों तक फैला हुआ है। अलग-अलग ब्रांड का नाम इस्तेमाल कर किसानों को गुमराह किया जा रहा है। कृषि विभाग की जांच में सामने आया है कि गिरोह स्थानीय दुकानों और एजेंटों के जरिए नकली कीटनाशक व उर्वरक की आपूर्ति करता है।
पैकेट और बोरियों पर नामी कंपनियों के लेबल, आकर्षक डिजाइन और फर्जी विवरण अंकित कर उत्पादों को असली दर्शाया जाता है। कम कीमत का लालच देकर बड़े पैमाने पर नकली माल खपाया गया। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध फर्मों और व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। इन लोगों ने अलग-अलग जिलों में गोदाम और अस्थायी इकाइयां बना रखी हैं।
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किसानों को केवल अधिकृत दुकानों से ही कीटनाशक और उर्वरक खरीदने की सलाह दी गई है। खरीद के समय बिल लेना जरूरी बताया गया है। किसी भी संदिग्ध उत्पाद की जानकारी तुरंत कृषि विभाग या प्रशासन तक पहुंचाने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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इसका नेटवर्क आसपास के कई जिलों और प्रदेशों तक फैला हुआ है। अलग-अलग ब्रांड का नाम इस्तेमाल कर किसानों को गुमराह किया जा रहा है। कृषि विभाग की जांच में सामने आया है कि गिरोह स्थानीय दुकानों और एजेंटों के जरिए नकली कीटनाशक व उर्वरक की आपूर्ति करता है।
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पैकेट और बोरियों पर नामी कंपनियों के लेबल, आकर्षक डिजाइन और फर्जी विवरण अंकित कर उत्पादों को असली दर्शाया जाता है। कम कीमत का लालच देकर बड़े पैमाने पर नकली माल खपाया गया। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध फर्मों और व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। इन लोगों ने अलग-अलग जिलों में गोदाम और अस्थायी इकाइयां बना रखी हैं।
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किसानों को केवल अधिकृत दुकानों से ही कीटनाशक और उर्वरक खरीदने की सलाह दी गई है। खरीद के समय बिल लेना जरूरी बताया गया है। किसी भी संदिग्ध उत्पाद की जानकारी तुरंत कृषि विभाग या प्रशासन तक पहुंचाने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।