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Amethi News: गर्भवतियों की सेहत के साथ बच्चों के पोषण में जिला अव्वल
Fri, 03 Apr 2026 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 03 Apr 2026 12:25 AM IST
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अमेठी सिटी। महिला रोग विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे अमेठी जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं। खासकर गर्भवतियों की सेहत में सुधार के साथ मातृ मृत्युदर में भी कमी आई है। इसके अलावा कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में आशातीत सुधार हुआ है। यह बात यूनिसेफ की ओर से जारी रैंकिंग रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में ग्रामीण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति (वीएचएसएनडी) की सेवाओं में जिले को पूरे प्रदेश में पहला स्थान मिला है।
वीएचएसएनडी के अंतर्गत गांव-गांव शिविर लगाकर गर्भवतियों व बच्चों का नियमित टीकाकरण किया जाता है। गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण भी इस सेवा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। खून और पेशाब की जांच भी नियमित रूप से की जाती है। इसके साथ ही वजन मापन भी होता है। गांव में ही जांच से गर्भ में पल रहे शिशु के विकास का समय पर आकलन संभव होता है। छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के विकास और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बच्चों की ऊंचाई और वजन के आधार पर कुपोषित बच्चों की पहचान की जाती है। उन्हें आवश्यक पोषण उपलब्ध कराकर पोषित श्रेणी में लाने का निरंतर प्रयास हो रहा है। अभिभावकों को भी बच्चों के सही पोषण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
नियमित होती है स्वास्थ्य की निगरानी
मातृ एवं शिशु कल्याण कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को आयरन फोलिक एसिड की गोलियां दी जाती हैं। उनकी नियमित स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित की जाती है। बच्चों में खून की कमी दूर करने के लिए आयरन सिरप भी उपलब्ध कराया जाता है। बीमार और अति कुपोषित बच्चों को आवश्यक दवाएं आंगनबाड़ी केंद्रों से उपलब्ध कराई जाती हैं। इनमें अमोक्सिसिलिन, पैरासिटामोल और विटामिन ए जैसी दवाएं शामिल हैं।
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स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का परिणाम
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि सभी के सहयोग से मिली है। इसके लिए आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विशेष रूप से धन्यवाद के पात्र हैं। गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाएं मिलने से गर्भवतियों और बच्चों को इलाज में सहूलियत मिल रही है। हर माह औसतन 250 सत्र कराए जाते हैं। आगे और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
जिले में सिर्फ नौ प्रसूति रोग विशेषज्ञ
जिले की आबादी करीब 25 लाख है। यहां जिला अस्पताल के अलावा मेडिकल कॉलेज, चार फर्स्ट रेफरल यूनिट, 13 सीएचसी, 30 पीएचसी और एक ट्रॉमा सेंटर है। बावजूद इसके जिले में सिर्फ नौ प्रसूति रोग विशेषज्ञ तैनात हैं, जिनमें से पांच मेडिकल कॉलेज में हैं। फुरसतगंज, जगदीशपुर, अमेठी और गौरीगंज एफआरयू पर सिर्फ एक-एक डॉक्टर तैनात हैं। जिला अस्पताल में गौरीगंज एफआरयू की चिकित्सक को तीन दिन के लिए संबद्ध किया गया है। यहां प्रसूति रोग चिकित्सक के दोनों पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।
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वीएचएसएनडी के अंतर्गत गांव-गांव शिविर लगाकर गर्भवतियों व बच्चों का नियमित टीकाकरण किया जाता है। गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण भी इस सेवा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। खून और पेशाब की जांच भी नियमित रूप से की जाती है। इसके साथ ही वजन मापन भी होता है। गांव में ही जांच से गर्भ में पल रहे शिशु के विकास का समय पर आकलन संभव होता है। छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के विकास और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बच्चों की ऊंचाई और वजन के आधार पर कुपोषित बच्चों की पहचान की जाती है। उन्हें आवश्यक पोषण उपलब्ध कराकर पोषित श्रेणी में लाने का निरंतर प्रयास हो रहा है। अभिभावकों को भी बच्चों के सही पोषण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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नियमित होती है स्वास्थ्य की निगरानी
मातृ एवं शिशु कल्याण कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को आयरन फोलिक एसिड की गोलियां दी जाती हैं। उनकी नियमित स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित की जाती है। बच्चों में खून की कमी दूर करने के लिए आयरन सिरप भी उपलब्ध कराया जाता है। बीमार और अति कुपोषित बच्चों को आवश्यक दवाएं आंगनबाड़ी केंद्रों से उपलब्ध कराई जाती हैं। इनमें अमोक्सिसिलिन, पैरासिटामोल और विटामिन ए जैसी दवाएं शामिल हैं।
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स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का परिणाम
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि सभी के सहयोग से मिली है। इसके लिए आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विशेष रूप से धन्यवाद के पात्र हैं। गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाएं मिलने से गर्भवतियों और बच्चों को इलाज में सहूलियत मिल रही है। हर माह औसतन 250 सत्र कराए जाते हैं। आगे और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
जिले में सिर्फ नौ प्रसूति रोग विशेषज्ञ
जिले की आबादी करीब 25 लाख है। यहां जिला अस्पताल के अलावा मेडिकल कॉलेज, चार फर्स्ट रेफरल यूनिट, 13 सीएचसी, 30 पीएचसी और एक ट्रॉमा सेंटर है। बावजूद इसके जिले में सिर्फ नौ प्रसूति रोग विशेषज्ञ तैनात हैं, जिनमें से पांच मेडिकल कॉलेज में हैं। फुरसतगंज, जगदीशपुर, अमेठी और गौरीगंज एफआरयू पर सिर्फ एक-एक डॉक्टर तैनात हैं। जिला अस्पताल में गौरीगंज एफआरयू की चिकित्सक को तीन दिन के लिए संबद्ध किया गया है। यहां प्रसूति रोग चिकित्सक के दोनों पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।