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Amethi News: सुधा ने स्वरोजगार से भरी सफलता की उड़ान
Tue, 17 Feb 2026 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 17 Feb 2026 12:40 AM IST
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गौरीगंज के गोपालापुर में कपड़े की कटाई करती सुधा मिश्रा।-संवाद
अमेठी सिटी। गौरीगंज के गोपालापुर की सुधा मिश्रा ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत चार लाख रुपये का ऋण लेकर अपना रेडीमेड गारमेंट उद्यम स्थापित किया है। जुलाई 2025 में शुरू हुए व्यवसाय में उन्होंने तीन कुशल महिला कामगारों को रोजगार दिया है।
उनके यहां बने पैंट-शर्ट सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ की बाजारों में खूब बिक रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें चार स्कूलों में ड्रेस बनाने और चिकित्सकों के लिए एप्रन तैयार करने का काम भी मिला है। व्यवसाय शुरू हुए अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन उनके तैयार कपड़ों की गुणवत्ता और डिजाइन की खूब सराहना हो रही है।
सुधा मिश्रा के उद्यम में सिलाई की चार मशीनें, काज बनाने की एक मशीन, बटन लगाने की एक मशीन और ओवरलॉक मशीन है। एक कामगार प्रतिदिन औसतन 10 पैंट या शर्ट तैयार करती है, जिसके लिए उन्हें प्रति पीस 40 रुपये का भुगतान किया जाता है। इससे प्रत्येक महिला कामगार को मासिक लगभग 10 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है। इस व्यवसाय से सुधा की ठीकठाक कमाई हो रही है। सुधा की योजना शीघ्र ही बच्चों और महिलाओं के लिए भी रेडीमेड कपड़े तैयार करने की है, जिसके लिए वह एक विस्तृत कार्ययोजना बना रही हैं।
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मध्यम वर्गीय परिवार की सुधा मिश्रा की शादी वर्ष 2009 में हुई थी। उनकी शुरुआत से ही सिलाई में रुचि रही। यही वजह रही कि वर्ष 2013 में आईटीआई गौरीगंज से कटाई और सिलाई में एक वर्षीय डिप्लोमा प्राप्त किया। इसके बाद वर्ष 2015 में उन्होंने गृह विज्ञान में एमए की डिग्री हासिल की।
2019 में वह प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र में प्रशिक्षक के तौर पर जुड़ीं और पांच वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2025 में उन्होंने अपना उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया और स्वयं को सफलतापूर्वक स्थापित किया। इस यात्रा में उनके पति पवन कुमार मिश्र का पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। दोनों मिलकर इस उद्योग को आगे बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2009 में विवाह के पश्चात उनके पति पारंपरिक रूप से खेती-किसानी और पशुपालन से परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, परंतु अब उनका मुख्य ध्यान उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर केंद्रित है।
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उनके यहां बने पैंट-शर्ट सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ की बाजारों में खूब बिक रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें चार स्कूलों में ड्रेस बनाने और चिकित्सकों के लिए एप्रन तैयार करने का काम भी मिला है। व्यवसाय शुरू हुए अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन उनके तैयार कपड़ों की गुणवत्ता और डिजाइन की खूब सराहना हो रही है।
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सुधा मिश्रा के उद्यम में सिलाई की चार मशीनें, काज बनाने की एक मशीन, बटन लगाने की एक मशीन और ओवरलॉक मशीन है। एक कामगार प्रतिदिन औसतन 10 पैंट या शर्ट तैयार करती है, जिसके लिए उन्हें प्रति पीस 40 रुपये का भुगतान किया जाता है। इससे प्रत्येक महिला कामगार को मासिक लगभग 10 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है। इस व्यवसाय से सुधा की ठीकठाक कमाई हो रही है। सुधा की योजना शीघ्र ही बच्चों और महिलाओं के लिए भी रेडीमेड कपड़े तैयार करने की है, जिसके लिए वह एक विस्तृत कार्ययोजना बना रही हैं।
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मध्यम वर्गीय परिवार की सुधा मिश्रा की शादी वर्ष 2009 में हुई थी। उनकी शुरुआत से ही सिलाई में रुचि रही। यही वजह रही कि वर्ष 2013 में आईटीआई गौरीगंज से कटाई और सिलाई में एक वर्षीय डिप्लोमा प्राप्त किया। इसके बाद वर्ष 2015 में उन्होंने गृह विज्ञान में एमए की डिग्री हासिल की।
2019 में वह प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र में प्रशिक्षक के तौर पर जुड़ीं और पांच वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2025 में उन्होंने अपना उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया और स्वयं को सफलतापूर्वक स्थापित किया। इस यात्रा में उनके पति पवन कुमार मिश्र का पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। दोनों मिलकर इस उद्योग को आगे बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2009 में विवाह के पश्चात उनके पति पारंपरिक रूप से खेती-किसानी और पशुपालन से परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, परंतु अब उनका मुख्य ध्यान उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर केंद्रित है।