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Amethi News: भागवत कथा सुनने से नष्ट हो जाते हैं पाप
Tue, 17 Jun 2025 12:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 17 Jun 2025 12:36 AM IST
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कमरौली (अमेठी)। ग्राम पलिया पश्चिम के पूरे मुन्नू मिश्र गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के 11वें दिन प्रवाचक श्रीसंत मणि ने वामन अवतार की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल श्रवण के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए होती है। इससे मनुष्य के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
प्रवाचक ने कहा कि वामन रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह सिखाया कि अहंकार, दंभ और लोभ से जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं होता है। धन-संपत्ति क्षणिक होती है। परोपकार ही सच्चा धर्म है। राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान देने का वचन दिया, जिसमें भगवान ने दो पग में पूरा ब्रह्मांड नाप लिया और तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना शीश अर्पण कर दिया।
इसी विनम्रता और समर्पण के कारण भगवान ने उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति अहंकार, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होता है, वही ईश्वर की सच्ची कृपा का पात्र बनता है। जैसे सूर्य, वायु, नदियां, बादल और वृक्ष बिना भेदभाव के सबके लिए कार्य करते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी निस्वार्थ सेवा और परोपकार में जीवन लगाना चाहिए। कथा स्थल पर रवि मिश्रा, संतोष मिश्रा, गुरशरण मिश्रा, अरविंद शुक्ल, जसकरण मिश्र, रमाशंकर मिश्र, दुर्गेश मिश्र, बृजेंद्र मिश्र, जितेंद्र मिश्र आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि वामन रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह सिखाया कि अहंकार, दंभ और लोभ से जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं होता है। धन-संपत्ति क्षणिक होती है। परोपकार ही सच्चा धर्म है। राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान देने का वचन दिया, जिसमें भगवान ने दो पग में पूरा ब्रह्मांड नाप लिया और तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना शीश अर्पण कर दिया।
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इसी विनम्रता और समर्पण के कारण भगवान ने उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति अहंकार, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होता है, वही ईश्वर की सच्ची कृपा का पात्र बनता है। जैसे सूर्य, वायु, नदियां, बादल और वृक्ष बिना भेदभाव के सबके लिए कार्य करते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी निस्वार्थ सेवा और परोपकार में जीवन लगाना चाहिए। कथा स्थल पर रवि मिश्रा, संतोष मिश्रा, गुरशरण मिश्रा, अरविंद शुक्ल, जसकरण मिश्र, रमाशंकर मिश्र, दुर्गेश मिश्र, बृजेंद्र मिश्र, जितेंद्र मिश्र आदि मौजूद रहे।
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